अनुक्रम
समाचार लेखन एक निरंतर चलती
रहने वाली प्रक्रिया है इसके कुछ तरीके हैं किन्तु एक अच्छा पत्रकार उसमें अपनी शैली की विशिष्टता को अवश्य
समाहित कर देता है जिससे वह कुछ अलग दिखे अच्छे समाचार लेखन के कुछ निर्धारण क सिद्धांत है। यह शारीरिक,
मानसिक व भावनात्मक श्रम की माँग करता है। अच्छा समाचार लेखन तुरंत नहीं आ जाता, सामान्यत: यह प्रक्रिया
बहुत धीमी व समय खपाऊ होती है, एक नये पत्रकार को इन सब बातों से डरना नहीं चाहिये बल्कि ऐसी परिस्थितियों
से मुकाबला करना चाहिये। साहित्यिक रूप में यह खून पसीने का परिणाम है।
समाचार लेखन के मूल सिद्धांत
1. साधारण शब्दों व वाक्यों में लेखन
साधारणता या सादापन होना चाहिये। पत्रकारिता का छात्र या इस क्षेत्र मं नवप्रवेशी व्यक्तियों के लिये
साधारण लेखन मददगार ही होगा। कुछ लोग यह सोचते हैं कि बड़े व कठिन शब्द पाठक को आकर्षित
करेंगे किन्तु वास्तव म ें इसका उल्टा होता है। साधारण शब्दाें मेंं पाँच वाक्य लिखना एक कठिन वाक्य लिखने
से बेहतर है। अत: समाचार लेखन साधारण वाक्यों में ही करना चाहिये। बड़े वाक्य पाठकों को दिग्भ्रमित
करते हैं।
2. कम शब्दों का प्रयोग करना चाहिए
प्रयोग कर देते हैं। “राम तथा श्याम की आज आपस में तगड़ी मारपीट हुई” इस वाक्य को इस तरह भी
लिखा जा सकता है कि “राम व श्याम में आज मारपीट हुई”। सीधे व साधारण लेखन का कोई विकल्प
नहीं है, लच्छेदार भाषा से एक अच्छे समाचार लेखक को हमेशा बचने की काेि शश करनी चाहिये तथा लेखन
में दंभ का अहसास नहीं कराना चाहिये।
3. किसी खास तकनीक शैली का प्रयोग नहीं करना चाहिये
कुछ अलग तकनीकी भाषा होती है जिसे उस विशेष का व्यक्ति ही समझ सकता है जैसे क्रिकेट खेल का
खिलाड़ी मिड प्वाइंट व गुगली समझ सकता है टेनिस का खिलाड़ी नहीं। अत: यह शब्द या बाले ी सिर्फ कुछ
ही लोगों तक ही सीमित रहती है। एक आदर्श लेखक को इन शब्द विशेष या बाले ी विशेष का प्रयोग नहीं
करना चाहिए क्योंकि इनका प्रयोग क्षेत्र सीमित होता है और दूसरा पाठक इनको न समझ पाने के कारण
पठन में बोझिलता महसूस करता है। यदि इन विशिष्ट शब्दों का प्रयोग करना ही पड़ जाए तो इनका अर्थ
साधारण भाषा में स्पष्ट कर देना चाहिये।
तक निर्बाध रूप से प्रसारित करने का होना चाहिए अर्थात उसे किसी बंधन में नहीं बांधना चाहिए। किसी
शब्द के अधिक प्रयोग से बचना चाहिये आरै ऐसे लिखे ा या समाचार अच्छे समाचारों की श्रेणी में नहीं आते।
4. विशेषणों के प्रयोग से बच
एक अच्छे पत्रकार को अपने वाक्यों का ताना-बाना संज्ञा व क्रिया के इर्द-गिर्द बनाना चाहिये। विशेषणों
का प्रयोग अक्सर किसी संवाददाता के संदेश की तीव्रता को कम करता है। ध्यान रखने योग्य तथ्य यह
है कि ‘विशेषण’ व ‘क्रिया-विशेषणों’ का प्रयोग हमारी सोच को सीमित करता है। जबकि क्रिया हमारी सोच
की क्षमता का विस्तार है, जिससे लेखन क्षमता भी बढ़ती है।
5. शब्दों के गठन में तारतम्यता
तात्पर्य यह है कि जिस तरह से कपड़े को यदि अच्छी तरह से सिला जाए तो वह अच्छा लगता है उसी
तरह से यदि अच्छे विचार को अच्छी तरह से नहीं लिखा जाये तो वह पढ़ने में बहुत बोझिल लगेगा उसमें
तारतम्यता व आकर्षण दोनों की कमी रहेगी। अच्छे संवाददाता को मानसिक अनुशासन का पालन करते
हुए अपनी प्रति को अच्छी तरह से पढ़कर उसकी गलतियों को निकाल देना चाहिये अन्यथा पाठक आपके
लेख या समाचार को अस्वीकार कर देंगे, उनके लिये संवाददाता का नाम मतलब नहीं रखता बल्कि यह
मतलब रखता है कि वह अच्छा लेखक है या बुरा।
6. दुहराव से बच े –
एसे ी गलतियाँ समाचार मं े भटकाव पैदा करती हैं।
7. व्यर्थ शब्दों को जगह न दें
का बोलचाल में प्रयोग होता है किन्तु लेखन में कम, उनको बराबर महत्व देना चाहिये किन्तु ऐसे शब्द
जिनका लख्े ान में ज्यादा प्रयोग हाते ा है किन्तु बोल-चाल मं े कम, उनको निश्चित तौर पर समाचार प्रति
से बाहर कर देना चाहिये। यथा – राम और श्याम, इसके अतिरिक्त यद्यपि, तथापि, आदि।
8. उद्देश्यपरकता होनी चाहिए
है किन्तु समाचार नहीं। उद्देश्यपरकता समाचार की आत्मा है।
यदि इन सिद्धान्तों का अनुसरण कर समाचार लेखन किया जाये तो इसमें काइेर् शक नहीं है कि वह अपने
उद्देश्य में अवश्य सफल होगा किन्तु इसके लिये पर्याप्त रूप से परिश्रम व लगन की आवश्यकता है।
समाचार लेखन के सिद्धांत के ऊपर विचार करते हुए अमेरिकी
पत्रकार श्री जोसेफ पुलिजर ने निम्नलिखित सिद्धांत निर्धारित किए हैं :
- यथार्थता – समाचार लेखन में यथार्थता का विशेष महत्व है। इसका तात्पर्य है कि वह समाचार जो बिना
किसी लाग-लपेट के बेबाकी के साथ सीधे सीधे ढंग से साफ-साफ लिखा जाए। इसमें कहीं भी बनावटीपन
न हो तथा काल्पनिक आधार भी ग्रहण न किया जाए। - संक्षिप्तता – समाचार का आकार-प्रकार उसके महत्व के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए। ऐसा
नहीं कि जिस समाचार का कोई खास मकसद न हो अथवा प्रसिद्ध न हो या व्यापकता का अभाव हो वैसे
समाचार में फैलाव आवश्यक नहीं। समाचार को हमेशा संक्षिप्त होना चाहिए। ‘समाचार’ के महत्व और कोटि
को ध्यान में रखते हुए कम-से-कम शब्दों में प्रस्तुत करना एक कला है। संक्षिप्तता समाचार लेखन की पहली शर्त है। जो व्यक्ति संक्षेपण
के गुणों से अनभिज्ञ रहता है, वह निश्चित रूप से अच्छा समाचार लेखक नहीं होगा। - रोचकता – समाचार में रोचकता भी होनी चाहिए। यदि समाचार में रोचकता का अभाव रहेगा तो वह नीरस
हो जाएगा। उससे पढ़ने या सुनने-देखने में किसी की भी रुचि नहीं रहेगी। इसलिए समाचार को लोकरुचि
के अनुरूप रोचक भी बनाना होता है।