अनुक्रम
दमा या अस्थमा के लक्षण
- श्वास लेन में कठिनाई
- अत्यधिक मात्रा में नाक से कफ निकलना
- श्वास कष्ट के समय पसीना आना
- दम घुटने की अनुभूति होना
- श्वास लेते हुए सीटी के समान आवाज होना
- अवसाद बैचेनी खांसी होना
- रोगी झुककर चलता है।
- थोड़े सेपरिश्रम से श्वास अत्यधिक फूलने लगता है।
- रोगी सीधा लेट नहीं पाता
व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली और एलर्जी के लिये प्रतिरोध के स्तर के आधार पर दमा के कारण अलग होते हैं प्रतिरोध के उच्च स्तर श्वसन में हवा के बहाव की रूकावट का कारण बनता है, हालांकि सांस की मांशपेशियां दिन या हृदय को आक्सीजन पंप करने के लिये बहुत अधिक मेहनत करती है तथा समय के साथ ज्यादा तनाव के कारण अधिक कमजोर हो जाती है।
मांशपेशियों पर श्वसन और हवा के आदान प्रदान की प्रक्रिया की सहायता करने के बावजूद रक्त नलिकायें सहायता करने के लिये असमर्थ होती है जिसके परिणामस्वरूप श्वसन तन्त्र प्रभावित होता है तथा मांसपेशियों की ऐठन और श्वसनी दीवार मार्ग अवरूद्ध हो जाता है। ठण्डी और शुष्क हवा, धुंआ प्रदूषण, परागकण धूल कवच तनाव, चिंता और श्वसन संक्रमण जैसी एलर्जी कारकों से आप में दमा के विकास की संभावना में वृद्धि हो जाती है।
दमा या अस्थमा को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ
अस्थमा के मरीजों को दूध और इससे बनने वाले खाद्य पदार्थ जैसे दही, आइसक्रीम, पनीर घी इत्यादि से बचना चाहिये क्योंकि इनसे कफ, खाँसी तथा छींक जैसी समस्यायें बढ़ जाती है।
नट्स:-इनके सेवन में न सिर्फ अस्थमा पीडि़तों की समस्यायें बढ़ जाती है अपितु अटैक भी जल्दी-जल्दी पड़ने लगते हैं ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नट्स के सेवन से बचना चाहिये।
दमा या अस्थमा के प्रकार
दमा फेफड़ों को खासा प्रभावित करता है दमा के कारण व्यक्ति को श्वसन सम्बन्धी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है दमा सिर्फ युवाओं और व्यक्तियों को ही नहीं अपितु बच्चों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। हालांकि अस्थमा के इलाज के लिये इनहेलर भी दिया जाता है लेकिन इनहेलर के दुष्प्रभाव भी होते हैं। इसके अलावा सवाल ये उठता है कि दमा एक प्रकार का होता है या विभिन्न प्रकार का, आइये जानते हैं दमा के प्रकार का होता है या विभिन्न प्रकार का, आइये जानते हैं दमा के प्रकार।
3. निमिक अस्थमा:-जब आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई बीमारी जैसे निमोनियां, कार्डियक जैसी बीमारी हो तो आपको निमिक अस्थमा हो सकता है आमतौर पर मिमिक अस्थमा अधिक तबियत खराब होने पर होती है।
4. चाइल्ड आनसेट अस्थमा:- यह अस्थमा का वह प्रकार है जो सिर्फ बच्चों को होता है अस्थमैटिक बच्चा जैसे-जैसे बड़ा हो जाता है तो बच्चा अपने आप ही अस्थमा से उबरने लगता है यह ज्यादा रिस्की तो नहीं होता है पर समय पर इसका उपचार जरूरी होता है।
5. एडल्ट आनसेट अस्थमा:-यह अस्थमा युवाओं को होता है और अक्सर 20 वर्ष की आयु के बाद होता है इस प्रकार के अस्थमा के पीछे कई एलर्जिक कारण छिपे रहते हैं हालांकि इसका मुख्य कारण प्रदूषण, प्लास्टिक अधिक धूल-मिट्टी और जानवरों के साथ रहने पर होता है। विश्व अस्थमा दिवस 03 मई को माना जाता है विश्व अस्थमा दिवस मई महीने के पहले मंगलवार को पूरे विश्व में घोषित किया गया है।
अस्थमा रोगियों को पूरे जीवन भर विशेष सावधानियां अपनानी पड़ती है अस्थमा रोगियों हर मौसम में अतिरिक्त सावधानियां अपनानी पड़ती है तथा सांस ही अतिरिक्त सुरक्षा की भी आवश्यकता पड़ती है।
6. मिस्क्ड अस्थमा:-इस प्रकार का अस्थमा किसी भी कारण से हो सकता है कई बार ये अस्थमा एलर्जिक कारणों से, या नाॅन एलर्जिक कारणों से हो सकता है इतना ही नहीं इस प्रकार के अस्थमा होने के कारण का पता लगाना थोड़ा मुश्किल भी होता है।
7. एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा:-कई लोगों को शारीरिक सक्रियता के कारण अस्थमा हो जाता है तो कई लोग क्षमता से अधिक कार्य करने लगते हैं तो वे अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।
8. कफ वेरियंट अस्थमा:- कई बार अस्थमा का कारण वेरिएंट होता है जब आपको लगातार कफ की शिकायत रहती है या खांसी के दौरान अधिक कफ आता है तो आपको अस्थमा का अटैक पड़ सकता है।
9. आक्यूपेशनल अस्थमा:- यह अस्थमा अटैक अचानक काम के दौरान पड़ता है यदि आप नियमित रूप से एक ही जैसा काम करते हैं इस दौरान आपको अस्थमा का अटैक पड़ने लगते हैं या आपको अपना कार्यस्थल सूट नहीं होता हो जिससे अस्थमा अटैक पड़ जाता है।
10. नाइटटाइम या नाॅक्र्टनल अस्थमा:– यह एक विशेष प्रकार का अस्थमा होता है जो निश्चित समय पर अटैक आता है या अक्सर रात के समय अस्थमा अटैक पड़ने लगे तो यह समझना चाहिये कि आप नाॅक्र्टनल अस्थमा के शिकार हैं।
दमा या अस्थमा के आयुर्वेदिक उपचार
- तुलसी और अदरक का रस दोनों को 3-3 ग्राम शहद के साथ सेवन करें।
- सफेद प्याज का रस 2 चम्मच तथा शहद दो चम्मच दोनों को मिलाकर पियें।
- मदार की जड़ 10 ग्राम अजवायन 5 ग्राम तथा गुड़ 10 ग्राम सबको पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर प्रतिदिन 2 गोली गर्म पानी के साथ खायें।
- गेहूं के हरे पौधे का रस नित्य पियें।
उपवास का प्रयोग करें रात में यदि भोजन न लें तो उत्तम रहेगा या अदरक नीबू तुलसी का काढ़ा बनाकर सेवन करें।
