क्रेता का अर्थ वस्तु के क्रय करने वाले से है। यह क्रेता दो प्रकार के होते हैं – एक तो वे जो वस्तुओं को कच्चे माल के रूप
में क्रय करते हैं; जैसे कारखाने के मालिक द्वारा वस्तु बनाने के लिए वस्तुओं को क्रय करना, दूसरे वे जो वस्तुओं को स्वयं
उपभोक्ता के लिए क्रय करते है यहां क्रेता का अर्थ उन उपभोक्ताओं से है जो वस्तुओं को स्वयं उपभोग के लिए क्रय करते
हैं। विपणन में उपभोक्ता की भूमिका का बहुत बड़ा महत्व है। इसी कारण आज विपणन उपभोक्ता उन्मुखी है और उपभोक्ता को राजा माना जाता है।
विपणन की प्रत्येक क्रिया में उपभोक्ता
का अपना महत्वपूर्ण स्थान है। उपभोक्ता विपणन क्रियाओं का केन्द्र बिन्दू है। ग्राहकों से सही तथा इच्छित परिणामों को प्राप्त
करने के उद्देश्य से उचित विपणन मिश्रण प्रदान करना ही विपणन रीति नीति का अन्तिम उद्देश्य है
क्रेता व्यवहार का अध्ययन विपणन योजना तथा नीति का आधार होता है अतः क्रेता व्यवहार का अध्ययन अत्यंत अनिवार्य है।
का अपना महत्वपूर्ण स्थान है। उपभोक्ता विपणन क्रियाओं का केन्द्र बिन्दू है। ग्राहकों से सही तथा इच्छित परिणामों को प्राप्त
करने के उद्देश्य से उचित विपणन मिश्रण प्रदान करना ही विपणन रीति नीति का अन्तिम उद्देश्य है
क्रेता व्यवहार का अध्ययन विपणन योजना तथा नीति का आधार होता है अतः क्रेता व्यवहार का अध्ययन अत्यंत अनिवार्य है।
क्रेता व्यवहार का अर्थ
‘व्यवहार’ विशिष्ट ‘आचरण’ अथवा ‘तरीके’ का द्योतक है। इस दृष्टि से वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद के समय जो आचरण
क्रेताओं द्वारा किया जाता है या किया जा सकता है। उसे क्रेता व्यवहार की संज्ञा दी जा सकती है।
क्रेताओं द्वारा किया जाता है या किया जा सकता है। उसे क्रेता व्यवहार की संज्ञा दी जा सकती है।
विपणन क्षेत्र के विद्वानों
का कहना है कि – क्रेता व्यवहार वह प्रक्रिया है जो किसी वस्तु या ब्रांड के क्रय सम्बन्धी निर्णयों तथा चयन को बताती हैं। अन्य शब्दों में, “क्रेता अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं की संतुष्टि के लिए क्या, कब, कितनी कैसी, कहाँ तथा किससे वस्तुऐं
एवं सेवाएँ खरीदते हैं और ऐसी खरीद जिस व्यवहार का परिणाम होती है, उसे क्रेता व्यवहार कहा जा सकता है।
का कहना है कि – क्रेता व्यवहार वह प्रक्रिया है जो किसी वस्तु या ब्रांड के क्रय सम्बन्धी निर्णयों तथा चयन को बताती हैं। अन्य शब्दों में, “क्रेता अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं की संतुष्टि के लिए क्या, कब, कितनी कैसी, कहाँ तथा किससे वस्तुऐं
एवं सेवाएँ खरीदते हैं और ऐसी खरीद जिस व्यवहार का परिणाम होती है, उसे क्रेता व्यवहार कहा जा सकता है।
“क्रेता या
उपभोक्ता व्यवहार से अर्थ उपभोक्ताओं या ग्राहकों की क्रय आदतों, क्रय प्रवृत्तियों, क्रय ढंगों व क्रय प्रेरणाओं के अध्ययन से
लगाया जाता है।“
उपभोक्ता व्यवहार से अर्थ उपभोक्ताओं या ग्राहकों की क्रय आदतों, क्रय प्रवृत्तियों, क्रय ढंगों व क्रय प्रेरणाओं के अध्ययन से
लगाया जाता है।“
वस्तुओं तथा सेवाओं को क्रय करते समय जो आचरण, व्यवहार या तरीका क्रेताओं/उपभोक्ताओं के द्वारा अपनाया जाता है
क्रेता व्यवहार अथवा उपभोक्ता व्यवहार कहलाता है।
क्रेता व्यवहार अथवा उपभोक्ता व्यवहार कहलाता है।
‘‘दूसरे शब्दों में, उपभोक्ता व्यवहार के अन्तर्गत इन चार बातों का अध्ययन किया जाता है 1. उपभोक्ता कब क्रय करते
हैं? 2. क्रय कौन करता है? 3. उपभोक्ता कैसे क्रय करते हैं? 4. उपभोक्ता कहां क्रय करते हैं?
हैं? 2. क्रय कौन करता है? 3. उपभोक्ता कैसे क्रय करते हैं? 4. उपभोक्ता कहां क्रय करते हैं?
1. उपभोक्ता कब क्रय करते हैं? – विपणन प्रबन्धक को सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए
कि उपभोक्ता वस्तु को कब क्रय करते हैं? यहां ‘कब’ से अर्थ तीन बातों से लगाया जाता हैः (i) मौसम में (ii) सप्ताह का दिन व (iii) दिन का समय । इन तीनों का विपणन में काफी
महत्व है। इन्हीं के अनुरूप विपणन प्रयत्नों को नियोजित किया जाता है।
कि उपभोक्ता वस्तु को कब क्रय करते हैं? यहां ‘कब’ से अर्थ तीन बातों से लगाया जाता हैः (i) मौसम में (ii) सप्ताह का दिन व (iii) दिन का समय । इन तीनों का विपणन में काफी
महत्व है। इन्हीं के अनुरूप विपणन प्रयत्नों को नियोजित किया जाता है।
कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिनकी मांग किसी खास मौसम में काफी होती है। उदाहरण के लिए, शादी के मौसम में बर्तनों
व कपड़ों की मांग, जाड़ों में चाय, काफी व ऊनी कपड़े की मांग, गर्मियों में ठंडे पेय पदार्थ की मांग, आदि।
व कपड़ों की मांग, जाड़ों में चाय, काफी व ऊनी कपड़े की मांग, गर्मियों में ठंडे पेय पदार्थ की मांग, आदि।
नौकरी वर्ग के व्यक्ति छुट्टी वाले दिन ही क्रय करते हैं। अतः विपणन प्रबन्धक को अपना विज्ञापन छुट्टी वाले दिन
से पहले वाले दिन या छुट्टी वाले दिन के प्रातःकाल या छुट्टी वाले दिन को करना चाहिए।
से पहले वाले दिन या छुट्टी वाले दिन के प्रातःकाल या छुट्टी वाले दिन को करना चाहिए।
विपणन में उपभोक्ता के क्रय का समय भी महत्वपूर्ण है। समय से अर्थ है कि उपभोक्ता किस समय क्रय करता है -सुबह,
दोपहर, शाम व रात्रि। अतः यह कह सकते है कि समय, दिन तथा मौसम का विपणन में काफी महत्व है।
दोपहर, शाम व रात्रि। अतः यह कह सकते है कि समय, दिन तथा मौसम का विपणन में काफी महत्व है।
2. क्रय कौन करता है? – क्रय करने का कार्य कौन करता है इसके अन्तर्गत निम्न तीन तत्वों
को शामिल करते हैं i. वास्तविक रूप में क्रय कौन करता है? ii. क्रय करने का निर्णय कौन लेता है? iii. वस्तु को वास्तविक
रूप में प्रयोग में कौन लाता है? साधारणतया बच्चों के लिए क्रय उनके माता-पिता के द्वारा किया जाता है। पत्नी के
लिए क्रय उसके पति के द्वारा किया जाता है। पति अपने लिए भी स्वयं क्रय कर सकते हैं। एक शिक्षित परिवार में
पत्नी अपने लिए, बच्चों के लिए व पति के लिए भी क्रय करती है।
को शामिल करते हैं i. वास्तविक रूप में क्रय कौन करता है? ii. क्रय करने का निर्णय कौन लेता है? iii. वस्तु को वास्तविक
रूप में प्रयोग में कौन लाता है? साधारणतया बच्चों के लिए क्रय उनके माता-पिता के द्वारा किया जाता है। पत्नी के
लिए क्रय उसके पति के द्वारा किया जाता है। पति अपने लिए भी स्वयं क्रय कर सकते हैं। एक शिक्षित परिवार में
पत्नी अपने लिए, बच्चों के लिए व पति के लिए भी क्रय करती है।
विपणन पर इस बात का प्रभाव पड़ता है कि क्रय कौन करता है? जैसे क्रय करने वाले होते हैं उसी के अनुरूप वस्तु
बनायी जाती है और वैसे ही वितरण माध्यम अपनाया जाता है। उन्हीं के अनुरूप समस्त विज्ञापन कार्यक्रम, विज्ञापन
अपीलें, विज्ञापन कापी, रेडियो और टेलीविजन विज्ञापन, आदि किये जाते हैं तथा विपणन नीतियां व रण नीतियां अपनायी
जाती हैं। यदि वस्तु बच्चों द्वारा क्रय की जाती है तो ऐसी वस्तु में वे सभी गुण होने चाहिए जो बच्चे चाहते हैं तथा विज्ञापन
के विक्रय प्रवर्तन के ढंग भी ऐसे होने चाहिए जो उन तक पहुंच सकें।
बनायी जाती है और वैसे ही वितरण माध्यम अपनाया जाता है। उन्हीं के अनुरूप समस्त विज्ञापन कार्यक्रम, विज्ञापन
अपीलें, विज्ञापन कापी, रेडियो और टेलीविजन विज्ञापन, आदि किये जाते हैं तथा विपणन नीतियां व रण नीतियां अपनायी
जाती हैं। यदि वस्तु बच्चों द्वारा क्रय की जाती है तो ऐसी वस्तु में वे सभी गुण होने चाहिए जो बच्चे चाहते हैं तथा विज्ञापन
के विक्रय प्रवर्तन के ढंग भी ऐसे होने चाहिए जो उन तक पहुंच सकें।
3. उपभोक्ता कैसे क्रय करते हैं? – उपभोक्ता कैसे क्रय करते है इसका असर विपणन क्रियाओं
पर पड़ता है। उपभोक्ता कैसे क्रय करते हैं इसके अन्तर्गत उपभोक्ता की आदतों तथा व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। बाजार में क्रेता विभिन्न तरह के होते है।
पर पड़ता है। उपभोक्ता कैसे क्रय करते हैं इसके अन्तर्गत उपभोक्ता की आदतों तथा व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। बाजार में क्रेता विभिन्न तरह के होते है।
कुछ नकद खरीदना पसन्द करते हैं तो कुछ उधार। यदि किसी स्थान पर उधार लेने वालों की संख्या अधिक है तो
व्यवसायी को उधारी देने की नीति अपनानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो व्यवसायी अपने उद्देश्यों में सफल
नहीं होगा। इसी प्रकार जो उपभोक्ता बड़े पैकिंग में वस्तु क्रय करना पसन्द करते हैं उनको वस्तु बड़े पैकिंग में दी जानी
चाहिए। व्यवसाय में सफलता पाने के लिए क्रय आदतों एवं व्यवहारों के अनुसार वस्तु एवं मूल्य संबंधी नीतियां निर्धारित
की जाती हैं, विपणन कार्यक्रम बनाये जाते हैं, तथा प्रबन्धकीय निर्णय लिये जाते हैं।
व्यवसायी को उधारी देने की नीति अपनानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो व्यवसायी अपने उद्देश्यों में सफल
नहीं होगा। इसी प्रकार जो उपभोक्ता बड़े पैकिंग में वस्तु क्रय करना पसन्द करते हैं उनको वस्तु बड़े पैकिंग में दी जानी
चाहिए। व्यवसाय में सफलता पाने के लिए क्रय आदतों एवं व्यवहारों के अनुसार वस्तु एवं मूल्य संबंधी नीतियां निर्धारित
की जाती हैं, विपणन कार्यक्रम बनाये जाते हैं, तथा प्रबन्धकीय निर्णय लिये जाते हैं।
4. उपभोक्ता कहां क्रय करते हैं? – उपभोक्ता कहां क्रय करते है के अन्र्तगत -i.उपभोक्ता क्रय
करने का निर्णय कहां लेता है और ii. वास्तविक रूप से क्रय कहाँ से होता है? को शामिल किया जाता है।
प्रायः यह पाया गया है कि उपभोक्ता कुछ वस्तुओं के संबंध में क्रय करने का निर्णय अपने परिवार के सदस्यों के साथ
बैठकर घर पर ही लेता है। जैसे रेडियो, टेलीविजन, आदि कुछ वस्तुएं को खरीदने का निर्णय करके वस्तु को क्रय करने
नहीं जाता है बल्कि उसको जो वस्तु किसी दुकान या स्टोर पर अच्छी लगती है उसको क्रय करने का निर्णय वहीं दुकान
पर ले लेता है।
करने का निर्णय कहां लेता है और ii. वास्तविक रूप से क्रय कहाँ से होता है? को शामिल किया जाता है।
प्रायः यह पाया गया है कि उपभोक्ता कुछ वस्तुओं के संबंध में क्रय करने का निर्णय अपने परिवार के सदस्यों के साथ
बैठकर घर पर ही लेता है। जैसे रेडियो, टेलीविजन, आदि कुछ वस्तुएं को खरीदने का निर्णय करके वस्तु को क्रय करने
नहीं जाता है बल्कि उसको जो वस्तु किसी दुकान या स्टोर पर अच्छी लगती है उसको क्रय करने का निर्णय वहीं दुकान
पर ले लेता है।
कुछ मामलों में क्रय करने का निर्णय तो घर पर लेता है लेकिन ब्राण्ड की पसन्द दुकान पर ही करता
है। ऐसी स्थिति में वस्तु की पैकेजिंग अच्छी होनी चाहिए। विज्ञापन भी किया जाना चाहिए जिससे कि उपभोक्ताओं
को वस्तुओं की ब्राण्ड की जानकारी हो सके और उनको अपनी ओर आकर्षित किया जा सके।
है। ऐसी स्थिति में वस्तु की पैकेजिंग अच्छी होनी चाहिए। विज्ञापन भी किया जाना चाहिए जिससे कि उपभोक्ताओं
को वस्तुओं की ब्राण्ड की जानकारी हो सके और उनको अपनी ओर आकर्षित किया जा सके।
उपभोक्ताओं का निर्णय स्थान, निर्माता एवं मध्यस्थों के विक्रय स्थान संबंधी निर्णयों एवं वस्तु संबंधी निर्णयों को प्रभावित
करता है।
करता है।