जब रक्त वाहिकाओं में रक्त सामान्य से अधिक दबाव से संचारित होता है तो उसे उच्च रक्तचाप
या हाइपरटेंशन कहते हैं। जिसके कारण हृदय को रक्त वाहिकाओं से रक्त संचारित करने के लिए
अधिक कार्य करना पड़ता है, जिससे हृदय पर अधिक दबाव पड़ता है।
चेतावनी के संकेत या लक्षण के होता है। यही कारण है, कि 30 साल और उससे ऊपर की उम्र के
सभी व्यक्तियों को साल में कम से कम एक बार रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की जांच कराना आवश्यक है।
यदि उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) का नियन्त्रण नहीं किया जाता है, तो इससे रक्त वाहिकाएं,
हृदय एवं शरीर के अन्य अंग जैसे दिमाग, गुर्दे (किडनियां) और आंखों को नुकसान पहुंच सकता
है। लगातार उच्च रक्तचाप जीवन के लिए घातक हो सकता है, और इससे हृदय संबंधी बीमारियां
लकवा, मधुमेह, गुर्दे आदि के रोग हो सकते हैं। यदि रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) को कुछ हद तक कम
कर लिया जाए, तो उससे इन सभी जोखिमों को कम किया जा सकता है।
उच्च रक्तचाप के सामान्य के कारण
नीचे लिखे गये कुछ सामान्य कारक, जो उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) को बढ़ाते हैंः
- जिनके परिवार में पिछला कोई उच्च रक्तचाप का इतिहास रहा हो।
- अस्वस्थ आहार की आदतें-विशेष रूप से अधिक नमक, वसा का प्रयोग, एवं सब्जि़यों/फलों का
कम प्रयोग। - शारीरिक गतिविधि न करना (बैठे रहने वाली जीवन शैली)।
- अत्यधिक वज़न होना (ओवरवेट)।
- किसी भी प्रकार से तम्बाकू का उपयोग (धूम्रपान या तम्बाकू का चबाना)
- शराब का अधिक सेवन
- तनाव/चिंता
उच्च रक्तचाप की पहचान
उच्च रक्तचाप को जांचने का एक ही तरीका है कि उसे
बी.पी. उपकरण द्वारा जांचा जाए। बी.पी. उपकरण विभिन्न
प्रकार के होते हैं।
रक्तचाप जांच आपको दो प्रकार की संख्या (रीडिंग) देता है।
ऊपर वाली संख्या ज्यादा होती है, उसे सिस्टोलिक रक्तचाप
(ब्लड प्रेशर) कहा जाता है। नीचे वाली संख्या जो ऊपर की
संख्या से कम होती है, उसे डाइस्टोलिक रक्तचाप (ब्लड
प्रेशर) कहा जाता है।
एक प्रारंभिक जांच (स्क्रीनिंग) के कार्यक्रम में, एक व्यक्ति जिसका यदि सिस्टोलिक रक्तचाप (ऊपर
वाली रीडिंग) 140 mm Hg या उससे अधिक है एवं डाइस्टोलिक रक्तचाप (नीचे वाली रीडिंग)
90 mm Hg या उससे अधिक है तो उसे चिकित्सक को दिखाने के लिए रेफर करने की जरूरत हैं।