अनुक्रम
कावूर का पूरा नाम काउंट कैमिलो दे कावूर था । कावूर का जन्म 1810 ई0 में ट्यूरीन के एक कुलीन परिवार में हुआ था। सैनिक शिक्षा प्राप्त कर वह सेना में इंजीनियर के रूप में भर्ती हुआ। किन्तु अपने उदार विचारों के कारण उसे सेना से 1841 ई0 में त्यागपत्र देना पड़ां 1841-1846 ई0 तक वह अपनी जमींदारी का कार्य करता रहा, इसी समय वह अपनी उदासी दूर करने के लिए कई बार फ्रांस और इग्लैण्ड की यात्रा पर गया। इग्लैण्ड में रहकर उसने संसदीय प्रणाली को नजदीक से देखा और उससे प्रेरित होकर अपने देश में भी उसी प्रकार की शासन प्रणाली स्थापित करने का प्रयत्न करने लगा। 1847 ई0 काउंट कावूर ने ‘इल रिसार्जीमेन्टो’ नामक समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया था। इस पत्र के माध्यम से इटली के एकीकरण की बात कहीं जाने लगी।
- इटली का एकीकरण सार्डीनिया के नेतृत्व में ही सम्भव हो सकता है।
- एकीकरण के लिए यह आवश्यक है कि इटली के राज्यों को आस्ट्रिया से मुक्त कराया जाय और
- आस्ट्रिया से मुक्ति प्राप्त करने के लिए विदेशी सहायता आवश्यक है।
यह काउंट कावूर के महान मस्तिष्क का कार्य था, जिसने मेजिनी के प्रेरणा को एक प्रबल कूटनीतिज्ञ शक्ति के रूप में गतिमान बनाया और गैरीबाल्डी की तलवार का एक राष्ट्रीय अस्त्र के रूप में प्रयोग किया। वास्तव में काउंट कावूर के बिना मैजिनी का आदर्शवाद और गैरीबाल्डी की वीरता निरर्थक होती। काउंट कावूर ने इन दोनों के विचारों में सामंजस्य स्थापित किया।
कावूर के उद्देश्य
कावूर इटली का एकीकरण करना चाहता था जिस तरह मैजिनी, लेकिन दोनों के रास्ते अलग थे। जहाॅ कावूर संवैधानिक राजतंत्र का प्रबल समर्थक था वही मैजिनी इटली में गणतंत्र की स्थापना करना चाह रहा था।
- उसका विश्वास था कि इटली का एकीकरण – सार्डीनिया राज्य के नेतृत्व में ही संभव हैं। अतएव उसने पीडमाण्ड राजवंश को अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया।
- वह सार्डीनिया पीडमाण्ड राज्य को इटली के सर्वशक्तिशाली राज्य में परिवर्तित करना चाहता था। अतएव उसने पीडमाण्ड की सर्वोत्मुखी प्रगति का प्रयास किया।
- वह जानता था कि बिना सशस्त्र संघर्ष के आस्ट्रिया का प्रभुत्व समाप्त नही किया जा सकता हैं। अतएव उसने एक सुसज्जित ओर प्रशिक्षित सेना के निर्माण पर विशेष जोर दिया।
- उसने कूटनीति द्वारा यूरोपीय राज्यों की मित्रता प्राप्त करने की कोषिष की।
काउंट कावूर की विदेश-नीति
काउंट कावूर की गृह-नीति
कावूर की कठिनाइयाॅ
कावूर को अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कठिन प्रयास करना पड़ा। इटली के राज्यों में संगठन और एकता का सर्वदा अभाव था। वे एकजुट होकर आस्ट्रिया की सेना का सामना करने में समर्थ नही थे। यहां कई शासक ऐसे भी थे जो पीडमाण्ड के नेतृत्व में इटली के एकीकरण के विरोधी थे। यहां के देशभक्त और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी विभाजित थे। यहाॅ हो रहे छुटपुट विद्रोहों से इसका एकीकरण संभव नहीं था। गणतंत्रवादी गणतंत्र की स्थापना हेतु प्रयत्नशील थे। आस्ट्रिया जैसे शक्तिशाली राज्य के विरूद्ध यूरोपीय शक्तियों की मित्रता और सद्भावना प्राप्त करना एक दुष्कर कार्य था, लेकिन कावूर अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहा था।
कावूर के सुधार
कावूर ने सार्डीनिया पीडमाण्ड राज्य की प्रगति के लिए वहाॅ कई सुधार किये-
2. उसने सेना संबंधी अनेक सुधार किये लोगों को सेना में भर्ती के लिए प्रोत्साहित किया सेना के प्रशिक्षण अनुशासन पर जोर देते हुए उसे नवीन अस्त्र शस्त्रों से सुसज्जित किया, जहाजी बेड़े, दुर्गो का निर्माण किया।
3. कावूर राजनीति के क्षेत्र में चर्च के हस्तक्षेप को पंसद नहीं करता था क्योंकि कैथोलिक पादरी इटली के एकीकरण के विरोधी थे। अतः उसने चर्च के विशेषाधिकार छीने वहाॅ की बहुत सी भूमि छीन कर वहां अनेक नये स्कूल खुलवायें।
4. उसने सार्डीनिया – पीडमाण्ड में संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना का प्रयत्न किया उसने मताधिकार का विस्तार कर भाषण एवं पे्रस की स्वतंत्रता को स्वीकार किया। इन सुधारों के बाद पीडमाण्ड की गणना इटली के एक शक्तिषाली राज्य में होने लगी।
कावूर का मूल्याकंन
इटली के एकीकरण से पूर्व ही महान देशभक्त कावूर का 6 जून 1861 ई0 को देहावसान हो गया। एलीसन फिलिप्स ने ठीक ही कहा है कि “एक राष्ट्र के रूप में इटली कावूर की देन है।” वस्तुत: कावूर के बिना मैजिनी का आदर्शवाद और गैराबाल्डी की वीरता निष्फल लड़ाई और निराशा के इतिहास में एक अध्याय और बढ़ा देते। कावूर प्रथम व्यक्ति था, जिसने इटली की समस्याओं के सभी पहलुओं को देखा। उसने कुशल राजनेता की भाँति यह जान लिया कि इटली की समस्याओं का समाधान अन्र्तराष्ट्रीय सहयोग, यूरोपीय कूटनीति तथा युद्ध द्वारा ही हो सकेगा। क्रीमिया के युद्ध में सार्डीनिया का भाग लेना कावूर की एक कूटनीतिक पहल थी। पेरिस के शान्ति सम्मेलन में इटली के प्रश्न को प्रस्तुत कर उसे एक यूरोपीय प्रश्न बना दिया। कावूर ने बड़ी बुद्धिमानी से सम्राट को सेना के साथ भेजकर गैराबाल्डी के जोश पर अंकुश लगाया। नि:सदेह कावूर आधुनिक इटली का स्वप्नदृष्टा एवं जन्मदाता था।