एक निश्चित समय के लिए रोकड़ प्राप्तियों एवं भुगतानों का विवरण जिसके
माध्यम से रोकड़ अधिक एवं कमी का पता एक निश्चित समय के लिए लगाया
जाता है, रोकड़ बजट कहलाता है।
अन्य शब्दों में रोकड़ बजट एक निश्चित समय में
अनुमानित रोकड़ प्राप्तियों एवं भुगतानों का विवरण होता है, जिससे रोकड़ शेष की
स्थिति का ज्ञान भी होता है।
अनुमानित रोकड़ प्राप्तियों एवं भुगतानों का विवरण होता है, जिससे रोकड़ शेष की
स्थिति का ज्ञान भी होता है।
रोकड़ बजट की परिभाषा
1. गुथमैन एवं डूगल के अनुसार, ‘‘रोकड़ बजट भावी अवधि के लिए रोकड़
प्राप्तियों और भुगतान का अनुमान है।’’
2. जेम्स वैन हाॅर्न के अनुसार, ‘‘एक रोकड़ बजट कई समय अन्तराल में एक
व्यावसायिक संस्था के भावी रोकड़ प्राप्तियों एवं रोकड़ भुगतानों का अनुमान होता है।’’
रोकड़ बजट का महत्व
रोकड़ बजट का महत्व है –
1. रोकड़ बजट के माध्यम से
व्यवसाय को रोकड़ आवश्यकताओं की जानकारी/अनुमान में सहायता मिलती
है। इसके माध्यम से रोकड़ की आवश्यकता का पूर्वानुमान हो जाता है,
जिसकी सहायता से रोकड़ की व्यवस्था करने में सुविधा होती है।
व्यवसाय को रोकड़ आवश्यकताओं की जानकारी/अनुमान में सहायता मिलती
है। इसके माध्यम से रोकड़ की आवश्यकता का पूर्वानुमान हो जाता है,
जिसकी सहायता से रोकड़ की व्यवस्था करने में सुविधा होती है।
2. रोकड़ बजट के माध्यम से व्यवसायिक संस्थान के
व्ययों को कम किया जा सकता है। इससे संस्थान की लाभप्रदता को बढ़ाया
जा सकता है, साथ ही अपव्यय को भी नियन्त्रित किया जा सकता है।
व्ययों को कम किया जा सकता है। इससे संस्थान की लाभप्रदता को बढ़ाया
जा सकता है, साथ ही अपव्यय को भी नियन्त्रित किया जा सकता है।
3. ठोस लाभांश नीति के लिए लाभ के साथ-साथ रोकड़ की
भी आवश्यकता होती है। अंशधारियों को सन्तुष्ट करने के लिए ठोस लाभांश
नीति अति आवश्यक है।
भी आवश्यकता होती है। अंशधारियों को सन्तुष्ट करने के लिए ठोस लाभांश
नीति अति आवश्यक है।
4. रोकड़ बजट से व्यावसायिक संस्थान की वित्त की
स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। ये ऋण के लिए एक मजबूत
आधार प्रदान करता है। इसके अध्ययन के बाद ही ऋण को स्वीकृत किया
जाता है।
स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। ये ऋण के लिए एक मजबूत
आधार प्रदान करता है। इसके अध्ययन के बाद ही ऋण को स्वीकृत किया
जाता है।
5. रोकड़ बजट रोकड़ नियोजन में भी सहायक होता है। यदि
रोकड़ की कमी पायी जाती है, तो व्यवसाय में आवश्यक रोकड़ की व्यवस्था
की जा सकती है और यदि रोकड़ की अधिकता होती है, तो उसे लाभप्रद
कार्यों में विनियोजित किया जा सकता है।
रोकड़ की कमी पायी जाती है, तो व्यवसाय में आवश्यक रोकड़ की व्यवस्था
की जा सकती है और यदि रोकड़ की अधिकता होती है, तो उसे लाभप्रद
कार्यों में विनियोजित किया जा सकता है।
6. अन्य बजट जैसे उत्पादन बजट व
विक्रय बजट आदि को तैयार करने में भी सहायक है।
विक्रय बजट आदि को तैयार करने में भी सहायक है।
7. रोकड़ बजट की आवश्यकता छोटे व
बड़े दोनों प्रकार के व्यवसायों को होती है, किन्तु बड़े व्यवसायों के लिए
इसका महत्व और बढ़ जाता है।
बड़े दोनों प्रकार के व्यवसायों को होती है, किन्तु बड़े व्यवसायों के लिए
इसका महत्व और बढ़ जाता है।
8. इस बजट की सहायता से अन्य क्रियात्मक बजटों,
जैसे कार्यशील पूँजी, विक्रय, साख, विनियोग आदि क्रियाओं में समन्वय
स्थापित किया जा सकता है।
जैसे कार्यशील पूँजी, विक्रय, साख, विनियोग आदि क्रियाओं में समन्वय
स्थापित किया जा सकता है।