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गुड़ किसी भी प्रकार के गन्ने के रस से प्राप्त प्राकृतिक चीनी का उत्पाद है। इसे कई युगों से उत्पादित
किया जाता रहा है। गुड़ के कुल उत्पादन का 70 प्रतिशत से
अधिक उत्पादन भारत में किया जाता है। 3000 से अधिक वर्षों
से यह आयुर्वेद में मिठास के रूप में प्रयोग किया जा
रहा है और साथ ही यह पोषक मूल्यों से भी भरा है।
कि एक चम्मच गुड़ में 4.5 मिलीग्राम कैल्शियम, 2.3 मिलीग्राम
फास्फोरस, 8 मिलीग्राम मेग्नीशियम, 85 मिलीग्राम पोटैशियम,
0.5 मिलीग्राम आइरन तथा कुछ मात्रा में जिं़क, कापर, थाईमिन
व नियासीन होते हैं। यह हमारे शरीर में ऊर्जा प्रदान करता है। साथ ही प्राकृतिक
खनिज और विटामिन भी प्रदान करता है। पिछले कई वर्षों से
लोगों द्वारा अधिक मात्रा में इसका उपभोग किया जाता रहा है।
लेकिन जिस प्रकार से समय बदल रहा है लोगों की जीवनशैली में
भी बदलाव आया है और इसके कारण गुड़ की खपत भी दैनिक
आहार में प्रभावित हो रही है। गुड़ की कम खपत स्वास्थ्य संबंधी
समस्याओं में वृद्धि कर रही है। आयुर्वेद औषधीय प्रणाली में,
गुड़ के मानव स्वास्थ्य पर पर्याप्त लाभकारी प्रभाव हैं।
यह तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक
होता है और इसका सेवन करने से मांसपेशियों
को आराम करने में सहायता मिलती है। यह
थकान से राहत भी प्रदान करता है। इसमें
सेलेनियम भी पाया जाता है जो इसे एक अच्छा
एंटीऑक्सीडेंट बनाता है जिससे शरीर से मुक्त
कणों को साफ करने में मदद मिलती है। इसमें
पाये जाने वाले पोटैशियम और सोडियम शरीर की
कोशिकाओं के अम्लीय संतुलन को बनाए रखने में
मदद करते हैं जिससे अम्ल और एसीटोन पर
काबू पाने में सहायता मिलती है।
पाया जाता है और इससे एनीमिया, जो विशेष रूप से महिलाओं
में पायी जाती है, रोकने में सहायता प्रदान करता है। इसके साथ
ही इसमें एलर्जी संबंधी एंटीएलर्जिक गुण पाये जाते हैं जो अस्थमा
के मरीजों को राहत प्रदान करता है।
गुड़ के फायदे
और धूल को बाहर फेंक कर भोजन की नली, श्वसन अंगों,
फेफड़े, पेट और आंतों को साफ करने में मदद करता है और
शरीर में उचित पाचन के लिए संबंधित एंजाइमों को सक्रिय
करता है। फाइबर सामग्री के रूप में, यह पेट से संबंधित
बीमारियों जैसे कब्ज में राहत प्रदान करता है और इस तरह
शरीर से विषाक्त पदार्थों को मल के रूप में बाहर निकालता है।
अदरक के साथ गुड़ का संयोजन अम्लता और आमाशय की
समस्याओं के प्रति असरकारी पाया जाता है। गुड़ का सेवन
शरीर के तापमान को इष्टतम बनाए रखने में सहायक होता है
जिससे पेट का माहौल शांत और ठंडा बनाए रखने में मदद
करता है। बर्फ के ठंडे पानी में गुड़ का मिश्रण इसके लिए एक
प्रभावी उपाय है।
11. रक्त संबंधित बीमारियों और विकार- गुड़ का सेवन रक्त से
संबंधित बीमारियों और विकारों पर काबू पाने में मदद करता है
क्योंकि इसका नियमित रूप से सेवन रक्त शोधक के रूप में कार्य
करता है तथा कुल रक्त हीमोग्लोबिन की संख्या को भी बढ़ाता
है।
12. हड्डी संबंधित समस्याएं- मैग्नीशियम की शरीर में कम मात्रा
होने से हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न होती है जो
शरीर में कैल्शियम के स्तर के विनियमन के साथ अन्य खनिज
पदार्थ जैसे विटामिन डी, काॅपर और जिंक का भी विनियमन
करता है। इसके साथ ही यह हड्डी से संबंधित समस्याओं जैसे
गठिया को दूर करने में सहायक होता है क्योंकि यह हड्डियों और
जोड़ों को मजबूत बनाता है तथा उचित पोषण प्रदान करता है।
गुड़ का अदरक के साथ सेवन करने से जोड़ों के दर्द में राहत
मिलती है। एक अन्य सामान्य उपाय यह भी माना गया है कि हर
दिन एक गिलास दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से यह हड्डियों
में मजबूती प्रदान करता है और इस तरह हड्डियों से जुड़ी
समस्याओं को रोकता है।
लकवा- बदलती जीवन शैली के कारण लकवा एक आम और
खतरनाक समस्या होती जा रही है। एक अध्ययन से यह ज्ञात
होता है कि लकवे का संबंध शरीर में पोटेशियम के स्तर से है।
पोटेशियम का उच्च सेवन करने से 24 प्रतिशत स्ट्रोक के खतरे
की घटना में कमी पायी जाती है। इस रोग से बचने के लिए गुड़
एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
113. पुरानी खांसी – गुड़ का
सेवन से गले की नरम ऊतकों को आराम मिलता है जिसके फलस्वरूप यह गले के संक्रमण को कम करने में मदद
करता है। आयुर्वेदिक औषधीय उपचार प्रणाली के अनुसार,
पुरानी खांसी से पीडि़त रोगियों को गुड़ का सेवन करने से फेफड़ों
को गर्म बनाने में मदद करता है और इस तरह श्वसन तंत्र को
आराम मिलता है।
1. मासिक समस्याएं- बदलती भोजन की आदतों और जीवन शैली
के कारण होने वाली माहवारी से संबंधित कई बीमारियों से
महिलाएं को पेट में दर्द होता है जो कि गुड़ का सेवन करने से
इस दर्द से आराम प्रदान करता है। गुड़ पोष्टिक तत्वों से भरपूर्ण
है जो आम मानव के आहार में जरूरी होते हैं। इस कारण से गुड़
का सेवन महवारी की समस्याओं से पिडि़त महिलाओं में प्रभावी
होता है। आमतौर पर ऐसी महिलाओं को महवारी चक्र शुरू होने
से पहले गुड़ की एक छोटी मात्रा का सेवन करने की सलाह दी
जाती है जिससे एंडरफीन हारमोन बनता है जो महिलाओं में
पूर्व-मासिक सिंड्रोम के लक्षणों से निजात पाने में सहायता प्रदान
करता है।
2. एनीमिया- यह महिलाओं में सबसे आम होने वाली बीमारियों में
से एक है। यह खून में आइरन की कमी के कारण से होती है।
गुड़ में प्रचुर मात्रा में आइरन पाया जाता है। इस कारण से
अनिमिया ग्रसत महिलाओं को इसके सेवन करने की सलाह दी
जाती है जिससे उनके रक्त में आरबीसी का समान्य स्तर बना रहे
तथा इस रोग को रोका जा सके। गुड़ में आइरन की प्रचुर मात्रा
का एक कारण यह भी हो सकता है की गुड़ बनाने की प्रक्रिया में
लोहे के बर्तनों का प्रयोग किया जाता है। अनिमिया ग्रसित
महिलाओं में चने व गुड़ का मिश्रण को सप्ताह में एक बार
नियमित रूप से सेवन करने से इस रोग के प्रति कम प्रवण किया
जा सकता है।
3. गर्भवती महिलाओं हेतु सहायक- गुड़ में प्रचुर मात्रा में लोहा व
फोलेट पाये जाते हैं जिसका गर्भवती महिलाओं में सेवन करने से
लाभ मिलता है ।
भोजन के बाद गुड़ खाने के फायदे
2. प्रतिरक्षा शक्ति/प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया- गुड़ का सेवन शरीर के कई संक्रमणों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है क्योंकि यहएंटीऑक्सीडेंट और खनिजों जैसे जिंक और सेलेनियम से भरपूर है जो मुक्त आयन क्षति को रोकने में मदद करता है और हमारे प्रतिरक्षा स्तर को भी बढ़ाता है ।
3. आंत की शक्ति बढ़ाने में मदद करता है- गुड़ में मैग्नीशियम आयनों की बड़ी मात्रा के कारण, यह आंत की शक्ति बढ़ाने में मदद करता है। गुड़ के सेवन के प्रत्येक 10 ग्राम से शरीर में 16 ग्राम मैग्नीशियम पोषक तत्व का सेवन होता है। यह 16 ग्राम मैग्नीशियम पोषक तत्व शरीर के प्रत्येक दिन पोषक तत्व की आवश्यकता के लगभग 4 प्रतिशत के बराबर है।
4. गुड़ का सेवन शरीर की कमजोरी और थकान को कम करता है- शक्कर (एक सरल कार्बोहाइड्रेट अणु) त्वरित ऊर्जा प्रदान करता है क्योंकि यह रक्तप्रवाह में आसानी से अवशोषित हो जाता है। दूसरी ओर गुड़, एक जटिल कार्बोहाइड्रेट आकृति है जो शक्कर की तुलना में शरीर में बहुत धीमी गति से ऊर्जा प्रदान करता है लेकिन इससे उत्पादित ऊर्जा लंबी अवधि की होती है। इसका तात्पर्य यह है कि शक्कर का सेवन रक्त में शुगर का स्तर अचानक बढ़ा देता है जो कि गुड़ के संबंध में सही नहीं है। ऐसे लोगों में जहां त्वरित ऊर्जा की आवश्यकता होती है शर्करा ही सबसे अच्छा विकल्प होता है, लेकिन जब यह ऊर्जा लंबी अवधि के लिए आवश्यक होती है तो वहाँ गुड़ का सेवन लाभकारी होता है जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। गुड़ का सेवन शरीर की कमजोरी और थकान को कम करता है।
5. शरीर की प्राकृतिक सफाई – गुड़ का सेवन श्वसन मंडल, फेफड़े, आंतों और खाद्य पदार्थों से अवांछित कणों को हटाने में मदद करता है विशेष रूप से उन श्रमिकों के लिए इसके सेवन की सलाह दी जा रही है जो कोयले की खानों में काम करते हैं। कोयला उद्योगों जैसे धुएँ व धूल के उद्योगों में काम कर रहे कर्मचारियों द्वारा गुड़ का सेवन करने से किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होती है। साथ ही साथ ऐसे लोगों में फेफड़े के घावों की कम घटनाएं देखी गयी है।
7. यकृत को साफ करने में- गुड़ का सेवन मनुष्यों के शरीर से अवांछित हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक होता है तथा यकृत को साफ करने में मदद मिलती है।
9. तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में- गुड़ का सेवन तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है।
10. जल प्रतिधारण कम कर देना- गुड़ का सेवन पानी के प्रतिधारण को कम करने में मदद करता है क्योंकि इसमें पोषक तत्वों विशेष रूप से पोटेशियम पाया जाता है।
ज्यादा गुड़ खाने के नुकसान
गुड़ का सेवन जहां एक ओर मानव स्वास्थ्य पर लाभकारी है वही
दूसरी ओर इसमें कुछ नुकसान भी हैं, जो केवल तभी होती है जब बहुत खाया जाता है। मानव स्वास्थ्य में ज्यादा गुड़ खाने के नुकसान हैं-
- परजीवी संक्रमण के साथ-साथ आंतों के कीड़ों की अधिक
संभावना। - शरीर में वसा बढ़ानाः- अपरिष्कृत गुड़ का सेवन या
उपयोग करने से शरीर में वसा बढ़ाने की संभावना होती
है। - रक्त के स्तर में उतार चढ़ावः- गुड़ की अत्यधिक सेवन
अक्सर रक्त के स्तर में परिवर्तन की ओर ले जाता है। - अत्यधिक गुड़ की खपत अग्न्याशय के उचित काम को
प्रभावित करती है जिससे इंसुलिन के उत्पादन पर प्रभाव
पढ़ सकता है। यह अन्य शरीर के अंगों जैसे कि किडनी,
आंख, हृदय आदि के कार्य को प्रभावित कर सकता है। - इसके अलावा, मेडिकल विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है
कि मधुमेह और अल्सरेटिव कोलाइटिस रोगियों द्वारा गुड़
के प्रयोग से बचा जाना चाहिए और यहां तक कि इसका
प्रयोग गाजर व मछली के साथ नहीं करना चाहिए।

