यह कृति अबुल फलज कृत अकबरनामा का ही तीसरा भाग है। एक प्रकार से इसमें अकबर कालीन
मुगल साम्राज्य का सांख्यकीय सर्वेक्षण किया गया है। इसमें अकबर के शासन काल में विकसित आर्थिक
संस्थाओं का वर्णन भी किया गया है। यह ग्रंथ पाँच भागों में विभाजित है पहले भाग में शाही परिवार
दरबार टकसाल, खाद्यान्नों के मूल्य, शाही अस्तबल एवं शस्त्रागार से संबंधित विवरण है। दूसरे भाग में
सेना का विभाजन व दरबारियों के अतिरिक्त जागीर व मनसदारों की सूची दी गयी है। तीसरे भाग
में कोतबाल, फौजदार राज्य में भूमि वर्गीकरण विभिन्न प्रान्तों की राजस्व दरे इत्यादि का उल्लेख है।
चौथे भाग में राजनीति धर्मदर्शन इत्यादि पर प्रकाश डाला गया है। पाँचवे भाग में उसने अकबर के
आदर्शों के साथ ही उसने स्वयं अपना परिचय भी दिया। यह ग्रंथ मुगल साम्राज्य, अकबर की
आर्थिक संस्थाओं, नियमों, कानूनों, भूमि विवरण एवं राजस्व व्यवस्था, सामाजिक व आर्थिक इतिहास को
जानने का प्रमुख स्रोत है।
की गहराई और तारीखी सूझ-बूझ का अंदाजा होता है। इसमें अकबर की शासन प्रणाली का साफ-साफ
उल्लेख किया गया है। लेकिन अबुल फजल के फलसकाना अदांज जिसकी मदद से उसने अपनी
शासन प्रणाली में रूहानीयत का असर दिखाया है, ग्रन्थ को कठिन और दिलचस्प बना देता है।
आइने-ए-अकबरी में हिन्दुओं और उनके नजरीयत को नये सिरे से समझने की कोशिश की गई।
अलबरूनी की यह पुस्तक अरबी में होने के कारण आम लोंगों लिए फायदेमंद थी।
आइने-ए-अकबरी में मुगलकालीन आर्थिक
इतिहास की काफी जानकारी मिलती है।