पृथ्वी के धरातल की रचना जिन पदार्थों से हुई है, उसे हम चट्टान कहते हैं। चट्टान शब्द कठोरता का परिचायक है। चट्टानों में अनेक तरह के खनिज पाए जाते हैं, किसी चट्टान के बनने में एक खनिज का योग होता है और किसी चट्टान के बनने में दो या दो से अधिक खनिज तत्वों का योग रहता है। शैल कई प्रकार के खनिजों का तत्सम रूप है और खनिज विशेष प्रकार के रासायनिक मूल तत्वों का योग है।
चट्टान के प्रकार
- आग्नेय चट्टान
- अवसादी चट्टान
- कायान्तरित चट्टानें
आग्नेय चट्टानों में कभी गोल कण नहीं होते। ये चट्टानें प्रायः ज्वालामुखी क्रियाओं से बनती हैं। इन चट्टानों में किसी प्रकार के जीव या वनस्पति के अवशेष नहीं पाए जाते। स्थिति के अनुसार आग्नेय चट्टान के दो भेद हैं
- अम्ल आग्नेय चट्टान,
- पैठिक आग्नेय चट्टान।
मुख्य रूप से ग्रेनाइट, डायोराइट, गैब्रो, पेरीडोटाइट, रायओलाइट, बेसाल्ट प्रमुख आग्नेय चट्टानें हैं।
2. अवसादी चट्टान – धरातल पर पाई जाने वाली अधिकांश चट्टानें अवसादी हैं। ऐसा अनुमान है कि 75 प्रतिशत भाग धरातल का इन्हीं चट्टानों से बना है। अंग्रेजी शब्द sedimentary लैटिन भाषा के sedimentum शब्द से बना है जिसका अर्थ नीचे बैठने से होता है। अस्तु वे चट्टानें जो चूर्ण के एकत्र होकर जमा हो जाने से बनीं वे अवसादी चट्टानें हैं, इन चट्टानों में जाड़े तथा संधियाँ होती हैं। ये जोड़े मुख्यतः संयोजक तल से लम्बवत् होती हैं। अवसादी चट्टानों को उनकी निर्माण विधि के अनुसार चार भागों में विभक्त किया जा सकता हैः
- पूर्ववर्ती चट्टानों के क्षय पदार्थों से निर्मित चट्टानें
- जल में घुले हुए रसायनों से निर्मित चट्टानें
- कार्बनिक तत्वों से निर्मित चट्टानें
- विभिन्न साधनों द्वारा निर्मित चट्टानों के भी उप विभाग हैंः (i) जलज चट्टान, (ii) समुद्री चट्टान, (iii) नदीकृत चट्टान, (iv) हिमानीकृत चट्टान, (v) वायु निर्मित चट्टान।
अवसादी चट्टान के मुख्य रूप- बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, खडि़या, चिकनी मिट्टी, डोलमाइट।