भविष्य निधि योजना कर्मचारियों के लिए एक कल्याणकारी योजना है। इस योजना के अंतर्गत एक निश्चित राशि हर माह कर्मचारी के वेतन से भविष्य निधि के लिए अंशदान के रूप में नियोक्ता द्वारा काटी जाती है। कर्मचारी के वेतन के एक निश्चित प्रतिशत के आधार पर नियोक्ता द्वारा भी भविष्य निधि में अंशदान किया जाता है। ये सभी अंशदान मिलाकर निक्षेप अथवा विनियोग के रूप में रखे जाते हैं और इन विनियोगों पर अर्जित ब्याज की राशि कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते में जमा कर दी जाती है।
भविष्य निधि के प्रकार
2. प्रमाणित भविष्य निधि –प्रमाणित भविष्य निधि योजना एक ऐसी योजना है, जिस पर कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952 के प्रावधान लागू हैं। इस अधिनियम के अनुसार कोई व्यक्ति जो 20 या उससे अधिक कर्मचारियों को नियुक्त करता है, तो अपने उपक्रम की स्थापना के 3 वर्षों के बाद उसको भविष्य निधि 1952 के अंतर्गत अपना पंजीकरण कराना तथा कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि प्रारंभ करना अनिवार्य है। यदि नियोक्ता और कर्मचारी चाहें तो 20 से कम संख्या होने पर भी अथवा उपक्रम के स्थान के 3 वर्ष पूरे होने से पहले भी ऐसी भविष्य निधि योजना प्रारंभ कर सकते हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों के सामने निम्नलिखित दो विकल्पों में से एक विकल्प को अपनाना होता है-
- भविष्य निधि आयुक्त द्वारा भविष्य निधि अधिनियम 1952 के अधीन स्थापित सरकारी योजना में सम्मिलित हो सकते हैं, अथवा
- वे अपने ही संगठन में एक भविष्य निधि योजना आरंभ कर सकते हैं और उसके लिए भविष्य निधि आयुक्त से अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं।
4. सार्वजनिक भविष्य निधि –यह योजना सार्वजनिक भविष्य निधि अधिनियम 1968 के अंतर्गत संचालित है। जनता का कोई भी सदस्य जो सेवारत हो अथवा नहीं, इस निधि में अंशदान दे सकता है। इसलिए स्वयंरोजगार वाले व्यक्ति भी इस निधि में अंशदान कर सकते हैं।