हलासन के क्या क्या लाभ है?

हलासन में शरीर की स्थिति किसानों द्वारा जमीन जोतने में प्रयोग किये जाने वाले हल के समान हो जाती है। अंग्रेजी में इसे Plow Pose के नाम से जाना जाता है। शरीर का वजन कम करने तथा मेरुदंड को मजबूत करने तथा लचीला बनाने में यह आसन सबसे अच्छा है।

हलासन करने की विधि

  1. जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। 
  2. हथेलियां को कमर के पास जमीन से सटाकर रखें। 
  3. आंखें बंद करके मुंह आकाश की ओर रखें। 
  4. शरीर को ढीला रखें। 
  5. सांस अंदर खींचकर पेट को सिकोड़कर पैरों को ऊपर उठायें। 
  6. दोनों पैरों को उठाकर 900 का एंगल बनायें तथा फिर सांस छोड़ें। 
  7. अब दोनों पैरों को सिर के पीछे जमीन पर टिकाने का प्रयास करें। 
  8. कमर तथा पीठ को पीछे झुकाने के लिए दोनों हाथों की मदद लें। 
  9. हाथ कुहनियां से सीधे रखते हुए पीठ के पीछे जमीन से लगाकर रखें। 
  10. अपनी क्षमता के अनुसार इस स्थिति में रुकें तथा धीरे-धीरे पीठ और पैर को जमीन पर लगाना शुरू करें। 
  11. पूरे आसन के दौरान घुटने सीधे रखने हैं।

हलासन से लाभ

  1. शुगर के रोगियों के लिए लाभदायक।
  2. पेट को पतला करता है। 
  3. वजन कम होता है।
  4. रीढ़ की हड्डी मजबूत एवं लचीली बनती है। 
  5. पाचन तंत्र तथा प्रजनन तंत्र मजबूत होते हैं। 
  6. गर्दन, कंधे, पेट, पीठ और कमर के स्नायु मजबूत बनते हैं। 
  7. सिरदर्द तथा थायराइड में यह आसन लाभदायक है।

हलासन करने में सावधानियां

इस आसन को निम्न रोगों से पीडि़त व्यक्ति न करें-

  1. टीबी (क्षय रोग) के पीडि़त व्यक्ति इसे न करें। 
  2. चक्कर आने पर न करें। 
  3. जो व्यक्ति उच्च रक्तचाप से पीडि़त हैं वे न करें। 
  4. कमर दर्द में न करें। 
  5. मासिक धर्म के पहले दो दिन यह आसन न करें।
  6. हृदय रोग में भी यह आसन वर्जित है।

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