सौरमंडल किसे कहते हैं? सौरमंडल के ग्रहों के नाम

सौरमंडल में ग्रह

सूर्य के परिवार को सौरमंडल कहते हैं। अन्तरिक्ष में अनेक सौरमंडल हैं।
सौरमंडल में सूर्य एक तारा है जो प्रकाश एवं उष्मा प्रदान करता है। सूर्य से
निकले हुए आठ ग्रह हैं जिनके नाम बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, वरूण,
कुबेर हैं।

सूर्य सौरमंडल का केन्द्र है। यह सौर परिवार का मुखिया है। सूर्य एक
छोटा तारा है जो आकाशगंगा के केन्द्र से आधुनिक गणना के अनुसार 32,000
प्रकाश वर्ष की दूरी पर सर्पिल भुजा के एक सिरे में स्थित है। सूर्य अपने अंष पर
29.4 दिन में एक चक्कर पूर्ण करता है किन्तु धु्रवों में इसकी वर्णन गति 33 दिन
है।

ग्रह स्वयं प्रकाशवान नहीं हैं वरन् तारे के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं।
उपग्रह लघु आकाशीय पिण्ड होते हैं जो ग्रहों की परिक्रमा करते हैं। ये भी तारे से
प्रकाश ग्रहण करते हैं।

अन्तरिक्ष में मानव निर्मित उपग्रह भी स्थापित हैं। सूर्य के चारों ओर परिक्रमा
करते हुए पृथ्वी सहित 9 ग्रह व उनके उपग्रह, उल्काएं, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु आदि
मिलकर सौर परिवार की रचना करते हैं।

सौरमंडल किसे कहते हैं

सौरमंडल के ग्रह

1. बुध- यह सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है, किंतु इसकी चाल सबसे तेज
है इसका व्यास 4878 कि.मी.। बुध का कक्षीय झुकाव 70 तथा घनत्व 5.43 है।
इसकी सतह चन्द्रमा जैसी दिखाई देती है।

2. शुक्र- बुध के बाद सूर्य का निकटतम ग्रह शुक्र है। यह सबसे अधिक
चमकीला है। आकार तथा भार में यह लगभग पृथ्वी के बराबर है, 243 दिनों में
पूरा चक्कर लगा लेता है। यह पूर्व से पश्चिम की ओर अपने अक्ष पर घूमता है
जबकि अन्य ग्रह पश्चिम से पूर्व को घूमते हैं।

3. पृथ्वी- यह सौरमंडल का एक मात्र ऐसा ग्रह है जहाँ मध्यम तापमान
आक्सीजन और प्रचुर मात्रा में जल की उपस्थिति के कारण जीवन पाया जाता है।
मानव का निवास होने के कारण हमारे लिए इसका महत्व सर्वाधिक है। इसका
व्यास 12740 कि.मी. है तथा औसत घनत्व 15.52 है। यह अपने अक्ष पर लम्बवत्
स्थिति से 23 1

झुकी हुई है। पृथ्वी का सम्पूर्ण क्षेत्रफल 51 करोड़ वर्ग कि.मी. है।
चन्द्रमा पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है। इसका व्यास 3475 कि.मी. है, जो कि
पृथ्वी का एक चौथाई है। पृथ्वी से उसकी औसत दूरी 384467 कि.मी. है।
20 जुलाई 1969 में अमेरिकी यान अपोलो 11 ने चन्द्रमा की धरती पर मानव
को उतार कर अन्तरिक्ष यात्रा में नया अध्याय जोड़ा। भारत 22 अक्टूवर 2008 को
चन्द्रयान-1 का सफल प्रक्षेपण कर चन्द्रमा पर यान भेजने वाला छठवाँ देश बन
गया।

4. मंगल- यह पृथ्वी का निकटतम ग्रह है। आकाश में मंगल ग्रह लाल तारे के
समान चमकता दिखाई देता है। इसका व्यास 6787 कि.मी. है। सूर्य के चारों
ओर एक परिक्रमा का समय 687 दिन है।

5. बृहस्पति- यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है जिसका व्यास 142800 किमी.
है। यह सूर्य की एक परिक्रमा 11.9 वर्षों में पूर्ण करता है, जबकि अपनी धुरी
में यह मात्र 9.8 घंटे में ही घूम जाता है। इसके चार प्रमुख उपग्रह हैं।

6. शनि- यह वृहस्पति के बाद दूसरा बड़ा ग्रह है। इसका व्यास 120600 किमी.
इसका घूर्णन समय 10.2 घंटे है। इसका वजन मात्र 0.7 है जो कि सौरमंडल
के सभी ग्रहों से सबसे कम है। अभी तक इसके 22 उपग्रह की पहचान की गई
है।

7. अरूण- यह सूर्य से 2867 करोड़ कि.मी. दूर है। इसका व्यास 51800 किमी.
घनत्व 1.70 है। यह अपनी अक्ष पर 980 झुका है जिससे मौसमी दषाएं काफी
प्रभावित होती हैं। इसका घूर्णन समय 10.8 घंटे तथा सूर्य की परिक्रमा 84 वर्ष में
पूरा करता है।

8. वरूण- यह ग्रह अरूण से काफी मिलता है। सूर्य से उसकी दूरी 449.7
करोड़ कि.मी. है। इसका व्यास 48600 कि.मी. व्यास 1.60 है। सूर्य की परिक्रमा
करने में 165 वर्ष लगते हैं।

9. यम या कुबेर- यह ग्रह सौरमंडल का सबसे बाह्यवर्ती ग्रह है जो कि सूर्य
से 590 करोड़ कि.मी. दूर स्थित है। सूर्य की परिक्रमा के लिए 248 वर्ष लगते
हैं। यहाँ पर तापमान बहुत कम पाया जाता है। अधिकतम तापमान 2220 रहता है।

उपग्रह

1. क्षुद्रग्रह- क्षुद्रग्रह को ग्रहिका भी कहते हैं। ये छोटे-छोटे आकाशीय पिण्ड जो
मुख्यतः मंगल और वृहस्पति ग्रहों के बीच पाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि
ग्रहों की रचना के उपरांत एक व दो ग्रह के विखण्डित हो जाने से क्षुद्र ग्रह बने।
क्षुद्र ग्रहों का व्यास 01 कि.मी. से लेकर सैकड़ों कि.मी. तक पाया जाता है।
अब तक 20000 से अधिक क्षुद्र ग्रह मिल चुके हैं।

क्षुद्र ग्रह
क्षुद्र ग्रह

2. पुच्छलतारे- पुच्छलतारे सौर परिवार के ही अंग हैं वो निश्चित अवधि पर ही
देखे जाते हैं और सूर्य की परिक्रमा करते हैं, इनकी गति सूर्य के निकट आकार
बढ़ जाती है। हैली ने इनका विस्तृत अध्ययन किया है, एक पुच्छल तारे का
नामकरण भी हैली के नाम पर किया गया है। संरचना की दृष्टि से पुच्छल तारे के तीन भाग होते हैं। सिर,
मध्यपिण्ड तथा पूंछ।

धूमकेतु, उल्का तारा
धूमकेतु, उल्का तारा

3. उल्काएं- उल्काएं आकाश में टूटते तारे के रूप में दिखाई देती हैं। ये सौर
मण्डल के सूक्ष्म आकाशीय पिण्ड हैं जो सूर्य के चारों ओर परिभ्रमण करते हैं और
कभी-कभी पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होकर वायुमण्डल में प्रवेश कर जाते
हैं।

उल्कापिंड
उल्कापिंड

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