SSL का पूरा नाम सिक्योर सॉकेट लेयर है और इसका प्रयोग वेबसर्वर और क्लांईन्ट के बीच सिक्योर कनेक्शन बनाने के लिए किया जाता है। SSL को 1990 में नेटस्केप ने विकसित किया था। SSL यह सुनिश्चित करता है कि किसी वेबसर्वर और ब्राऊजर के बीच संचारित कोई भी डाटा एनक्रिएट रहे। जिससे भेजी गई कोई भी सूचना को टैम्परिंग और धोखाधड़ी से बचाया जा सके। SSL एक प्रकार का स्टैन्डर्ड प्राटोकाॅल है इसका प्रयोग किसी नेटवर्क पर भेजे गए डाकूमेन्ट के सुरक्षित प्रसारण के लिए किया जाता है। SSL किसी नोड के मध्य संदेश करने के लिए ट्रासपोर्ट कन्ट्रोल प्राटोकाॅल (TCP) का उपयोग करता है। SSL में साॅकेट शब्द एक नेटवर्क पर क्लाईन्ट और सर्वर के बीच डाटा ट्रासफर करने के प्रोसेस से है।
सिक्योर सॉकेट लेयर (SSL) के कार्य (Functions of Secure Sockets Layer (SSL))
2. यह डाटा को टैम्परिंग या परिवर्तन या छेड़छेाड से बचाता हे।
3. क्लाईन्ट सर्वर आथेन्टीकेशन SSL प्राटोकाॅल के माध्यम से किसी क्लाईन्ट और सर्वर को प्रमाणित करने के लिए स्टैन्डर्ड क्रिप्टोग्राफिक तकनीक का उपयोग कर आथेन्टीकेट करता है। SSl / TLS Certificate एक प्रकार का डाटा फाईल होती है जिसमें किसी संस्थान की सारी जानकारी को एक विशेष रुप से उपयोग की गयी क्रिप्टोग्राफिक की में समाहित/बांधकर रखी होती है जब किसी वेबसाईट पर SSl / TLS Certificate को इन्स्टाल किया जाता है तब वे वैबसर्वर और उससे जुड़ने वाले ब्राऊजर के बीच एक सुरक्षित सम्बन्ध को एलेबल करता है।
SSLCertificate के उपयोग पर किसी वेबसाईट का URL http : //’ के वजाय https:// के साथ आता है । Web Address हरे रंग के पैडलाॅक के साथ दिखाई देता है।