समाचार तथा जनमत के लिए लोगों का साक्षात्कार

आज के जमाने में जन संचार के विभिन्न माध्यमों के कारण हमारी जिन्दगी पर गहरा असर पड़ रहा है। हमारा समाज, हमारी संस्कृति, हमारी जीवन शैली, हमारी विचारधारा यानी हर एक चीज को जनसंचार के अलग-अलग माध्यम गहरार्इ से प्रभावित कर रहें हैं । जनसंचार के अलग-अलग माध्यम जैसे रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट और समाचार पत्र-पत्रिकाएं जिस प्रकार देश विदेश के समाचार और जानकारियाँ जन सामान्य तक पहुंचाती हैं उसमें साक्षात्कार का भी महत्वपूर्ण अंशदान होता है। आज जनसंचार की बेहद तेज और प्रतिस्पर्धा पूर्ण प्रक्रिया में साक्षात्कार का महत्व बहुत बढ़ गया है। किसी भी सामान्य समाचार में उससे जुड़े किसी विशिष्ट व्यक्ति अथवा संगठन के अहम प्रतिनिधि का साक्षात्कार, चार चाँद लगा देता है। साक्षात्कार से उस समाचार का प्रभाव और उपयोगिता दोनों बढ़ जाती हैं ।

28 मर्इ 2010 को पश्चिम बंगाल में नक्सलवादियों द्वारा रेल लार्इन में विस्फोट की घटनाओं के सन्दर्भ में देखें तो ज्ञानेश्वरी एक्सपे्रस के इस रेल हादसे में घटना स्थल पर मौजूद एक रेल यात्री ने सबसे पहले एक टीवी चैनल को अपने मोबाइल के जरिए घटना की सूचना दी। टेलीविजन चैनल ने उस यात्री से अनुरोध किया कि वह मौके पर घायलों की संख्या, बचे हुए लोगों की जानकारी आदि सूचनायें जुटाए और जब पांच मिनट बाद चैनल ने उस यात्री का उसी के मोबाइल फोन के जरिए साक्षात्कार लिया तो यह बात स्पष्ट हो गर्इ कि ट्रेन की कौन-कौन सी बोगियाँ पभ््राावित हुर्इ है। और किन-किन बोगियों के यात्री सकुशल है। । इस तीन मिनट के साक्षात्कार ने टे्रन में सफर कर रहे उन यात्रियों के हजारों परिजनों को तत्काल मानसिक राहत पहुंचार्इ जिनकी बोगियाँ दुर्घटना ग्रस्त नहीं हुर्इ थीं ।

इसी तरह मर्इ 2010 में उड़ीसा में आए समुद्री तूफान ‘लैला’ के मामले में भी मौसम विज्ञानियों के साक्षात्कार ने लोगों के खतरे की पूर्व सूचनाएं विस्तार से देकर पहले से ही सचेत कर दिया जिससे बहुत से लोग खतरों में फंसने से बच गए ।

आज साक्षात्कार जनसंचार का एक उपयोगी अंग तो हो ही चुका है लेकिन पत्रकारिता के क्षेत्र में यह एक कलात्मक विधा भी है। साक्षात्कार में उत्तर देने वाले का महत्व जितना है उससे कहीं अधिक महत्व प्रश्न पूछने वाले का होता है। एक आदर्श पत्रकार के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह इस कला में पारंगत बनने का प्रयास करे क्योंकि आज इस कला में निपुणता के बिना पत्रकार का व्यक्तित्व अधूरा है।

साक्षात्कार की विकास यात्रा 

पत्रकारिता की शुरूआत से ही साक्षात्कार इसका अभिन्न अंग रहा है। दुनिया के प्रारम्भिक समाचार पत्रों, लन्दन गजट (1666 र्इस्वी) और पब्लिक आकरेंसेज (अमेरिका में 1690 र्इस्वी में प्रकाशित) में भी लोगों और शासकीय प्रतिनिधियों से बातचीत के आधार पर जानकारियाँ छपती थीं । 29 जनवरी 1780 को प्रकाशित भारत के पहले अखबार बंगाल गजट (इसे इसके सम्पादक-प्रकाशक के नाम पर हिकीज गजट भी कहा जाता है।) में भी र्इस्ट इंण्डिया कंपनी के अधिकारियों से बातचीत के अंश प्रकाशित होते थे, जिनमें व्यापार की व्यवस्थाओं और सार्वजनिक जीवन के नियम-कानूनों की जानकारी दी जाती थी । विश्व की सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी रॉयटर ने भी अपनी शुरूआत, लम्बी समुद्री यात्राओं से आए समुद्री व्यापारियों और जहाजियों से बातचीत के बाद मिली जानकारियों को समाचार बनाकर ही की थी । प्रथम स्वाधीनता संग्राम के दौरान मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर का विश्वप्रसिद्व संदेश-’हिन्दुस्तान के हिन्दुओ और मुसलमानों! उठो, भाइयों उठो, खुदा ने इन्सान को जितनी बरकतें अता की उनमें सबसे कीमती बरकत आजादी है।’ यह संदेश ‘पयामे आजादी’ नामक एक तत्कालीन अखबार में छपा था और यह बहादुरशाह जफर की अपने एक दीवान से हुर्इ बातचीत पर आधारित था। उस दीवान ने इसे अन्य लोगों तक पहुंचाया और तब यह अखबार में भी प्रकाशित हुआ।

अखबारी पत्रकारिता के शुरूआती दिनों से चलकर ‘साक्षात्कार’ ने आज बड़ी दूरी तय कर ली है। आज टीवी के कारण साक्षात्कार खबरों का एक चमत्कारिक साधन बन गया है। इलेक्ट्रानिकी के विकास के कारण अब साक्षात्कार को ऑडियो अथवा वीडियो स्वरूप में रिकार्ड करना भी सम्भव हो गया है। लेकिन जब यह सिर्फ लिखकर रिकार्ड किया जाता था, उस दौर में इसकी विश्वसनीयता को लेकर कर्इ बार, सही या गलत, आरोप-प्रत्यारोप भी लग जाते थे। एक उदाहरण से इसे समझा जा सकता है। लक्ष्मण नारायण गर्दे नामक नामी पत्रकार ने एक बार कोलकाता में देशबन्धु चितरजंन दास के निवास पर आए महात्मा गांधी का साक्षात्कार किया । तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर हुए इस साक्षात्कार के पूरा होने पर गर्दे ने बातचीत के दौरान जो प्रश्न उन्होंने पूछे थे और जो उत्तर महात्मा गांधी ने दिए थे उसका अपने हाथ से लिखा पूरा विवरण गांधी जी के सामने रख दिया और उनसे अनुरोध किया कि अगर आपके उत्तरों को मैने सही-सही लिखा है तो आप कृपया इस पर अपने हस्ताक्षर कर दीजिए। गांधी जी ने हस्ताक्षर करवाने का प्रयोजन पूछा तो गर्दे ने कहा कि ‘भारत मित्र‘ के दिल्ली संवाददाता ने अभी हाल में मौलाना शौकत अली का एक इंटरव्यू लिया था । इसमें मौलाना ने कहा था कि मस्जिद के आगे बाजे का प्रश्न कोर्इ धार्मिक प्रश्न नहीं है। यह बात भारतमित्र के बाद अन्य कर्इ अखबारों में छपी और बाद में जब एक मुकदमे के दारौन नागपुर की एक अदालत में इसे एक नजीर के तौर पर पेश किया गया तो मौलाना ने सार्वजनिक तौर पर यह कह दिया कि भारत मित्र में मेरा जो इंटरव्यू छपा है वह गलत है। इस पर भारत मित्र को पुन: सफार्इ पेश करनी पड़ी और अनावश्यक विवाद हुआ । इसलिए इस घटना के बाद मैने यह निश्चय किया है कि इंटरव्यू पर, इंटरव्यू देने वाले का हस्ताक्षर करा लेना चाहिए ।

आज इंटरव्यू को रिकार्ड करने की तरह-तरह की सुविधाएं उपलब्ध है डिक्टाफोन और कैसेट रिकार्डर के बाद आज डिजिटल रिकार्डर, वीडियो कैमरा, एमपी 3-4 स्पाइकैम, मोबाइलफोन आदि तरह तरह के यंत्र और तकनीक है। जिनके जरिए साक्षात्कार को रिकार्ड किया जा सकता है। हालाँकि विवाद होने पर आज भी अनेक मामलों में साक्षात्कार देने वाला रिकार्डेड होने पर भी तथ्यों से मुकर जाता है लेकिन फिर भी आज रिकाडिंर्ग की सुविधा के कारण साक्षात्कार की विश्वसनीयता बहुत अधिक बढ़ गर्इ है।

समाचार तथा जनमत के लिए लोगों का साक्षात्कार : वर्गीकरण एवं प्रकार 

साक्षात्कार का प्रमुख उद्देश्य पाठकों, श्रोताओं अथवा दर्शकों के लिए समसामयिक विषयों, घटनाओं, समस्याओं या विवादों के बारे में विस्तृत एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना है। साक्षात्कार के जरिए किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति, विषय विशेषज्ञ, विशिष्ट अधिकारी या घटना के प्रत्यक्षदश्र्ाी से सूचनाएं एकत्र की जा सकती हैं। साक्षात्कार के जरिए जनमत का अनुमान किया जा सकता है और जनमत के लिए लोगों का साक्षात्कार भी किया जाता है। हालाँकि आज साक्षात्कार का क्षेत्र बहुत विविधतापूर्ण हो गया है और इसकी सीमाएं बहुत व्यापक हो गर्इ हैं फिर भी मोटे तौर पर साक्षात्कार को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है ।

1. व्यक्तिपरक 

व्यक्तिपरक साक्षात्कार में जिस व्यक्ति का साक्षात्कार किया जाता है वह व्यक्ति सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है। इसमें विषय भी उस व्यक्ति से जुड़ा हो सकता है। लेकिन साक्षात्कार का मुख्य फोकस व्यक्ति विशेष के जीवन, अभिरूचि, विचार, कार्य, उपलब्धि, प्रेरणा आदि पर केन्द्रित होता है। उदाहरणार्थ मर्इ 2010 में सबसे कम उम्र में एवरेस्ट विजय हासिल कर वापस लौटे भारतीय छात्र अर्जुन वाजपेयी का एवरेस्ट विजय के बाद लिया गया साक्षात्कार। इस साक्षात्कार में एवरेस्ट विजय की उपलब्धि का विवरण तो था ही, अर्जुन की जीवनशैली, उसकी मेहनत, लगन और उसके जीवन के भावी लक्ष्यों का भी उल्लेख था।

2.  विषयपरक : 

विषयपरक साक्षात्कार में विषय को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है । इसमें जिस व्यक्ति का साक्षात्कार किया जाता है उसके व्यक्तित्व के स्थान पर उससे सम्बन्धित विषय को प्रमुखता दी जाती है और पूरा साक्षात्कार विषय केन्द्रित होता है। उदाहरण के लिए जून 2010 में कोलकाता और पश्चिम बंगाल के स्थानीय निकाय चुनावों में तृणमूल कांगे्रस की हैरतअंगेज जीत के बाद तृणमूल कांगे्रस की नेता ममता बनर्जी के व्यक्तित्व के बजाय चुनावी नतीजों के प्रभाव और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इसके दूरगामी असर का विश्लेषण किया गया था।

साक्षात्कार कर्इ प्रकार के हो सकते हैं। जैसे शैली के आधार पर साक्षात्कार – विवरणात्मक, वर्णनात्मक, विचारात्मक और भावनात्मक आदि हो सकते हैं। इसी तरह माध्यम के आधार पर साक्षात्कार भेंटवार्ता, पत्रवार्ता, या फोनवार्ता पर आधारित हो सकते हैं। साक्षात्कार के प्रमुख प्रकारों में पूर्व निर्धारित, आकस्मिक, अनौपचारिक और सर्वेक्षण साक्षात्कार शामिल हैं।

  1. पूर्व निर्धारित : इस तरह के साक्षात्कार में समय पहले से निर्धारित होता है । प्राय: विषय और स्थान भी पूर्व निर्धारित होते हैं । कभी-कभी इसमें साक्षात्कार देने वाले को विषय अथवा पूछे जाने वाले प्रश्नों की भी जानकारी दे दी जाती है। अति विशिष्ट व्यक्तियों, बड़े फिल्म कलाकारों, रचनाकारों व अन्य कलाकारों, आदि के साक्षात्कार इस श्रेणी में आते हैं । 
  2. आकस्मिक साक्षात्कार : इस तरह के साक्षात्कार के लिए कुछ भी पूर्व निर्धारित नहीं होता । जैसे किसी घटना से सम्बन्धित कोर्इ व्यक्ति कहीं अचानक मिल जाए और उससे तत्काल विषय पर बातचीत कर ली जाए । उदाहरणार्थ मर्इ 2010 में कारगिल युद्ध के बारे में हुए एक अदालती फैसले के बाद सेना मुख्यालय में आ रहे एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का साक्षात्कार । कुछ टीवी चैनलों के पत्रकार राष्ट्रपति भवन की ओर जा रहे थे । इसी बीच उन्हें अदालती फैसले की जानकारी मिली और तभी उन्हें एक बड़े सैन्य अधिकारी की कार दिखार्इ दी । सेना मुख्यालय में उस अधिकारी के कार से उतरते ही टीवी पत्रकार वहां पहुंच गए और उस सैन्य अधिकारी से साक्षात्कार कर लिया । यह साक्षात्कार उस दिन खूब चर्चा में रहा था। 
  3. अनौपचारिक साक्षात्कार : इस तरह के साक्षात्कार में औपचारिकताएं नहीं होती। किसी खास मामले पर किसी व्यक्ति विशेष या विषय विशेषज्ञ के पास जाकर उससे साक्षात्कार का प्रस्ताव किया जाता है और उसके राजी होने पर बातचीत शुरू हो जाती है । इसमें समय सीमा का ध्यान रखा जाता है और प्राय: यह विषय केन्द्रित होता है । 
  4. सर्वेक्षण साक्षात्कार : इस तरह के साक्षात्कार एक प्रकार से जनमत संग्रह का काम भी करते है । पश्चिमी देशों में इस तरीके का प्रयोग अधिक किया जाता है। इसमें विषय तो पूर्व निर्धारित होता है लेकिन प्रश्नों के उत्तर या तो तीन चार सम्भावित उत्तरों में से एक को चुनकर अथवा प्रश्न का विस्तृत उत्तर प्राप्त कर जनमत का रूझान तय किया जाता है। सर्वेक्षण साक्षात्कार का इस्तेमाल रेडियो और टीवी में अधिक होता है । चुनावों के नतीजों, मंहगार्इ, खेलों में जीत-हार, भ्रष्टाचार आदि हर तरह के मामलों में इस तरह के साक्षात्कार पूरे देश की भावनाओं को समझने में उपयोगी होते हैं । सर्वेक्षण साक्षात्कार पर आधारित समाचार अधिक पढ़े, सुने अथवा देखे जाते हैं । 
  5. पत्रकार सम्मेलन : पत्रकार सम्मेलन भी एक प्रकार का साक्षात्कार ही है । लेकिन समान्य प्रकार के साक्षात्कार में जहाँ एक प्रश्न पूछने वाला और एक उत्तर देने वाला होता है, पत्रकार सम्मेलन में सवाल पूछने वालों की संख्या बहुत अधिक होती है और उत्तर देने वालों की एक-दो या तीन । इसमें साक्षात्कार देने वाला तय करता है कि उसे किस विषय पर और क्या बात करनी है । हालाँकि प्रश्न पूछने वालों को भी अपनी सुविधा और जरूरत के मुताबिक प्रश्न पूछने का अवसर मिलता है।

साक्षात्कार हेतु पूर्व तैयारी 

साक्षात्कार एक ऐसी विधा है जिसमें प्रश्न पूछने वाले की चतुरार्इ, उसकी व्यावहारिकता, विषय की जानकारी और उसका धैर्य बहुत महत्वपूर्ण होता है । लेकिन अच्छे साक्षात्कार के लिए जो बात सबसे अधिक जरूरी होती है वह है साक्षात्कार की तैयारी । साक्षात्कार करने वाले ने किस तरह की तैयारी की है उसी पर साक्षात्कार की सफलता निर्भर होती है।

सबसे पहली बात जो जरूरी है वह है साक्षात्कार के लिए व्यक्ति का चयन। जिस विषय पर साक्षात्कार होना है उस विषय के सबसे अधिक जानकार और बात को साफ तरह से कह सकते वाले व्यक्ति का चयन साक्षात्कार को सफल बनाने के लिए पहला कदम है। व्यक्तिपरक साक्षात्कार के मामले में साक्षात्कार देने वाले का चयन तो स्वत: ही हो जाता है इसलिए इस तरह के साक्षात्कार में साक्षात्कार करने वाले को अपनी तैयारी की शुरूआत साक्षात्कार देने वाले के बारे में जरूरी जानकारी एकत्र करके करनी चाहिए।

विषय की व्यापक जानकारी, साक्षात्कार की तैयारी का दूसरा महत्वपूर्ण चरण है। जिस व्यक्ति या विषय के विशेषज्ञ से साक्षात्कार किया जाना हो उसके बारे में साक्षात्कारकर्ता को जितनी अधिक जानकारी होगी, उतने ही बेहतर तरीके से वह साक्षात्कार ले सकेगा। विषय की जानकारी न होने पर साक्षात्कारकर्ता अच्छे प्रश्न पूछ ही नहीं सकता और ऐसे में साक्षात्कार के नतीजे भी बेहतर नहीं हो सकते । मसलन अगर शास्त्रीय संगीत की किसी बड़ी हस्ती का साक्षात्कार लेना है तो उस व्यक्ति की जीवन यात्रा, उसकी उपलब्धियाँ, उसकी खूबियां- खासियतें, उसकी कमजोरियाँ, संगीत की उस विद्या की जानकारी आदि सब विषयों के बारे में साक्षात्कारकर्ता को ज्ञान होना जरूरी है। ऐसा ही मौसम, विज्ञान, खेल, राजनीति अथवा आर्थिक मामलों के साक्षात्कार में भी होना चाहिए।
विषय के बाद साक्षात्कार का स्थान भी तैयारी की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। खास कर रेडियो और टीवी के लिए होने वाले साक्षात्कारों में साक्षात्कार की सफलता का दारोमदार काफी हद तक स्थान पर निर्भर होता है। किसी संगीतकार के साक्षात्कार के लिए स्टूडियों एक अच्छा स्थान हो सकता है जबकि एक खिलाड़ी का साक्षात्कार मैदान या खेल की पृष्ठभूमि में हो तो वह बेहतर हो सकता है। बहुत महत्वपूर्ण विषय पर किसी एक्सक्लूसिव साक्षात्कार के लिए स्थान ऐसा होना चाहिए जहां बातचीत की निरन्तरता भंग न हो और आने-जाने वालों की वजह से व्यवधान न हो । कर्इ बार व्यवधान से साक्षात्कार की लय बिगड़ जाती है और महत्वपूर्ण सवालों के उत्तर छूट जाते हैं या गड़बड़ा जाते हैं।

साक्षात्कार की तैयारी का अंतिम चरण है साक्षात्कार के साधन। पत्र-पत्रिकाओं के साक्षात्कार के लिए पैन-नोटबुक के अलावा रिकाडिंर्ग के लिए उपयुक्त उपकरण जरूरी हैं तो रेडियो और टेलीविजन के साक्षात्कारों के लिए ऑडियो-वीडियो रिकार्डिंग के उपकरण, माइक आदि को पहले से जांच-परख लिया जाना जरूरी है ताकि ऐन मौके पर चूक न हो जाए। टेप या रिकार्डिंग की अन्य जरूरी सामग्री को भी साक्षात्कार से पूर्व भलीभांति जांच लेना जरूरी है।

साक्षात्कार की तकनीक 

साक्षात्कार जनसंचार की एक महत्वपूर्ण विधा है तो यह पत्रकारिता का एक कलारूप भी है। एक अच्छे साक्षात्कारकर्ता की तुलना शब्दों, भावनाओं और जानकारियों के एक कलाकार से की जा सकती है जो अपनी कला द्वारा साक्षात्कार देने वाले के काम और व्यक्तित्व को निखार सकता है।

साक्षात्कार की तकनीक का सबसे अहम पहलू यह है कि उसमें प्रश्न पूछने वाले का व्यक्तित्व हावी न हो । साक्षात्कारकर्ता को बेहद सहज होना चाहिए । उसे इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि उसकी अपनी विचारधारा या मान्यता अथवा स्थापना साक्षात्कार देने वाले पर थोपी न जाए । उसे जवाब देने वाले को पूरा अवसर देना चाहिए । इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि साक्षात्कार प्रश्न-उत्तर के रूप में ही हो न कि बहस के रूप में । प्रश्न भी छोटे और स्पष्ट होने चाहिए ताकि उनके उत्तर भी स्पष्ट मिल सकें । बहुत लम्बा प्रश्न होने से या प्रश्न के साथ विषय की व्याख्या होने से असल प्रश्न गुम हो जाते हैं और निरर्थक उत्तर मिलने लगते हैं । इसी तरह प्रश्न अगर ऐसे हों कि उनका जवाब हाँ या ना में ही दिया जा सकता हो तो वह भी साक्षात्कार के लिहाज से अधिक लाभप्रद नहीं होता । इस तरह के प्रश्न सिर्फ सर्वेक्षण साक्षात्कार में ही उपयोगी होते हैं ।

साक्षात्कार देने वाले का सम्मान भी जरूरी है। उसका सम्मान होने से एक तरह का विश्वास बढ़ता है और प्रश्नों के सहज उत्तर मिलने की सम्भावना बढ़ जाती है । कभी भी साक्षात्कार का आरम्भ कठिन प्रश्नों से नहीं होना चाहिए । व्यक्तिपरक साक्षात्कार में इस बात का खास ध्यान रखा जाना चाहिए कि उस व्यक्ति के व्यक्तित्व के अधिक से अधिक पहलू उजागर हो सकें । कर्इ बार किसी अभियुक्त या किसी घाघ राजनेता के साक्षात्कार में प्रश्नों को घुमा फिरा कर पूछने से भी मनमुताबिक उत्तर प्राप्त किए जा सकते हैं लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि जवाब पूरे धैर्य से सुने जांए । कर्इ बार उत्तरों से ही बात आगे बढ़ जाती है, लेकिन साक्षात्कारकर्ता के दिमाग में प्रश्नों का खाका एकदम साफ होना चाहिए ताकि प्रश्नों के अभाव में साक्षात्कार के तारतम्य गड़बड़ा न जाए । साक्षात्कारकर्ता का व्यक्तित्व, प्रश्न पूछने की विनम्र शैली, उसकी सतर्क दृष्टि, व्यवहार कुशलता और वााक पटुता से साक्षात्कार देने वाले के मन के गूढ़ रहस्य भी आसानी से बाहर आ जाते हैं । रेडियो और टीवी के साक्षात्कारों में जहां समय सीमा बेहद महत्वपूर्ण होती है, वहीं यह बात भी बहुत जरूरी है कि प्रश्नकर्ता के प्रश्न विषय पर एकदम केन्द्रित हों, ताकि अनावश्यक रूप से समय व्यर्थ न हो और जरूरत के मुताबिक सही उत्तर “ाीघ्र मिल सकें। यदि जवाब देने वाला व्यक्ति विषय से भटक रहा हो और बातचीत की दिशा गड़बड़ा रही हो, तब भी प्रश्न करने वाले में यह क्षमता होनी चाहिए कि वो तत्काल बातचीत का सूत्र अपने हाथ में लेकर हस्तक्षेप करे और पुन: साक्षात्कार को पटरी पर ले जाए।

साक्षात्कार की तकनीक का सबसे अहम पहलू यह है कि उसमें प्रश्न पूछने वाले का व्यक्तित्व हावी न हो । साक्षात्कारकर्ता को बेहद सहज होना चाहिए । उसे इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि उसकी अपनी विचारधारा या मान्यता अथवा स्थापना साक्षात्कार देने वाले पर थोपी न जाए । उसे जवाब देने वाले को पूरा अवसर देना चाहिए । इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि साक्षात्कार प्रश्न-उत्तर के रूप में ही हो न कि बहस के रूप में । प्रश्न भी छोटे और स्पष्ट होने चाहिए ताकि उनके उत्तर भी स्पष्ट मिल सकें ।
यह भी जरूरी है कि साक्षात्कारकर्ता स्वयं अधिक न बोले । उसका प्रयोजन यह होना चाहिए कि जिस व्यक्ति का साक्षात्कार लिया जा रहा है वह विषय और प्रश्नों में दिलचस्पी ले । साक्षात्कार की तकनीक का मूल मंत्र यह है कि प्रश्नकर्ता एक उत्पे्ररक की तरह काम करे और साक्षात्कार देने वाले को इस तरह मंत्र मुग्ध कर ले कि वह सारी जरूरी जानकारी संगीत की लहर की तरह सिलसिलेवार देता चला जाए । ।

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