प्रशासन की भाषा राष्ट्रभाषा कहलाती है, अस्तु सरकारी कार्यालयों में जिस भाषा का प्रयोग होता है तथा राज्य सरकारें
जिस भाषा में अपने पत्र आदि केन्द्र सरकार की तथा केन्द्रीय प्रशासन अपने संदेश राज्य सरकारों को संप्रेषित करता
है, वह राजभाषा कही जाती है। हमारे देश की केन्द्रीय सरकार हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करती
है। हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी भी सह राजभाषा के रूप में संविधान द्वारा स्वीकृत है। अंग्रेजी भाषा में राजभाषा
को Lingua Franca (लिंग्वा प्रैंका) कहते है। केन्द्र की राजभाषा को ‘संघभाषा’ भी कहा जाता है। सरकारी
आदेश, आज्ञाएँ, विज्ञापन, पत्र-व्यवहार वगैरह इसी भाषा में मुद्रित और प्रसारित होते हैं। प्रदेशों के शासनात्मक एकता
की स्थापना का बहुत अधिक महत्व है।
विधान पालिका में होता है। प्रशासन की भाषा होने के कारण कुछ लोग इसे ‘कचहरी की भाषा’ भी कहते हैं। इस देश में समय-समय पर कई राजभाषाओं द्वारा शासन स्थापित किया गया है। प्राचीन और मध्यकालीन भारत में
संस्कृत ने राजभाषा का कार्य किया। मौर्यों के शासन का संचालन राज्यभाषा पालि ने किया। मुसलमानों के शासन
काल में फारसी राजभाषा बनी और अंग्रेजी के शासनकाल में इस स्थान को अंग्रेजी भाषा ने ग्रहण किया। अब स्वतंत्र भारत में राजभाषा का सिंहासन हिन्दी को सौंपा गया है।
से हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया, इसीलिए 14 सितम्बर को प्रत्येक साल सम्पूर्ण देश में ‘हिन्दी दिवस’
मनाया जाता है। वस्तुतः यह ‘दिवस’ स्वभाषा-चेतना एवं सभी भारतीय भाषाओं के बीच सद्भावना दिवस के रूप
में मनाया जाता है। इतना ही नहीं, इस दिन भारत सरकार के कार्यालयों तथा प्रादेशिक कार्यालयों में भी विभिन्न तरह
की संगोष्ठियाँ, प्रतियोगिताएँ, पुरस्कारों एवं सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है।
कार्यालयों-कोलकाता, गाजियाबाद, गुवाहाटी, मुम्बई, भोपाल, दिल्ली, कोचीन और बेंगलूर-की स्थापना की गयी है।
केन्द्रीय सरकार के मंत्रालयों-विभागों में राजभाषा के प्रयोग को सुनिश्चित करने के लिए 43 हिन्दी सलाहकार
समितियाँ स्वीकृत हैं। हिन्दी अब प्रशासन की भाषा बन रही है।
के लिए राजभाषा विभाग विभिन्न नियमों, अधिनियमों, संकल्पों और आदेशों का कड़ाई के साथ पालन कर रहा है।
यही कारण है कि हिन्दी ज्ञान-विज्ञान, व्यापार-वाणिज्य, विज्ञान, संचार माध्यम तथा सामाजिक नियंत्रण की भाषा
हो रही है। कुल मिलाकर भारत के जन कल्याणकारी गणतंत्र में सम्पर्क ओर राजभाषा के रूप में हिन्दी का भविष्य
सुखद और प्रीतिकर है।
राजभाषा की विशेषताएं
साहित्यिक हिन्दी में जहाँ अभिधा, लक्षणा और व्यंजना के माध्यम से अभिव्यक्ति की जाती है। राजभाषा हिन्दी में केवल अभिधा का ही प्रयोग होता है।
- आयुक्त = Commissioner
- निविदा = Tender
- विवाचक = Arbitrator
- आयोग = Commission
- प्रशासकी = Administrative
- मन्त्रालय= Ministry
- उन्मूलन =Abolition
- आबंटन = Alloment आदि।
हिन्दी में सामान्यत: समस्रोतीय घटकों से ही शब्दों की रचना होती है। जैसे संस्कृत शब्द निर्धन + संस्कृत भाव वाचक संज्ञा प्रत्यय ‘ता’ = निर्धनता। किन्तु अरबी-फारसी शब्द गरीब + ता = गरीबता। किन्तु अरबी-फारसी शब्द गरीब + अरबी-फारसी भाव वाचक संज्ञा प्रत्यय ‘ई’= गरीबी।
- उपकिरायेदार = Sub-letting
- जिलाधीश = Collector
- उपजिला = Sub-district
- अरद्द = uncancelled
- अस्टांपित = unstamped
- अपंजीकृत = unregistered
- मुद्राबन्द = sealed
- राशन-अधिकारी = ration-officer … आदि।
अंग्रेजी, फ्रांसीसी, चीनी, रूसी आदि समृद्ध भाषाओं में एक ही शैली मिलती है, पर राजभाषा हिन्दी में एक ही शब्द के लिए कई शब्द हैं। जैसे –
- कार्यालय -दफ़्तर – ऑफिस
- न्यायालय-अदालत-कोर्ट-कचहरी
- शपथ-पत्र-हलफनामा-एफिडेविट
- विवाह-शादी-निकाह आदि।
राजभाषा हिन्दी का प्रयोग राजतन्त्र का कोई व्यक्ति करता है जो प्रयोग के समय व्यक्ति न हो कर तंत्र का एक अंग होता है। इसलिए वह वैयक्तिक रूप से कुछ न कहकर निर्वैयक्तिक रूप से कहता है। यही कारण है कि हिन्दी की अन्य प्रयुक्तियों में जबकी कतर्ृवाच्य की प्रधानता होती है, राजभाषा हिन्दी के कार्यालयी रूप में कर्मवाच्य की प्रधानता होती है।
