अनुक्रम
योग का अर्थ है जोड़ना. जीवात्मा का परमात्मा से मिल जाना, पूरी तरह से एक हो जाना ही योग है। योगाचार्य महर्षि पतंजली ने सम्पूर्ण योग के रहस्य को अपने योगदर्शन में सूत्रों के रूप में प्रस्तुत किया है. उनके अनुसार, “चित्त को एक जगह स्थापित करना योग है।
योगासन के प्रकार और उनके लाभ
1. स्वस्तिकासन
स्वस्तिकासन स्थिति- स्वच्छ कम्बल या कपडे पर पैर फैलाकर बैठें।
- पैरों का दर्द, पसीना आना दूर होता है।
- पैरों का गर्म या ठंडापन दूर होता है ध्यान हेतु बढ़िया आसन है।
2. गोमुखासन
गोमुखासन करने की विधि- दोनों पैर स फैलाकर बैठें। बाएं पैर को मोड़कर एड़ी को दाएं नितम्ब (buttocks) के पास रखें।दायें पैर को मोड़कर बाएं पैर इस प्रकार रखें की दोनों घुटने एक दूसरे के ऊपर हो जाएँ। दायें हाथ को ऊपर उठाकर पीठ ओर मुडिए तथा बाएं हाथ को पीठ के पीछे नीचे से लाकर दायें हाथ को पकडिये गर्दन और कमर सीधी रहे। एक ओ़र से लगभग एक मिनट तक करने पश्चात दूसरी ओ़र से इसी प्रकार करें।
- अंडकोष वृद्धि विशेष लाभप्रद है।
- धातुरोग, बहुमूत्र एवं स्त्री लाभकारी है।
- यकृत, गुर्दे एवं वक्ष स्थल को बल है। संधिवात, गाठिया को दूर करता है।
3. गोरक्षासन
गोरक्षासन करने की विधि- दोनों पैरों की एडी तथा पंजे आपस मिलाकर सामने रखिये। मूत्रेन्द्रिय के मध्य) को एडियों पर रखते हुए उस पर बैठ जाइए। दोनों घुटने भूमि पर टिके हुए हों। हाथों को ज्ञान मुद्रा की स्थ में घुटनों पर रखें।
- मांसपेशियो में रक्त संचार ठीक रूप होकर वे स्वस्थ होती है.
- मूलबंध को स्वाभाविक रूप से और ब्रम्हचर्य कायम रखने में यह आसन सहायक है।
- इन्द्रियों की चंचलता समाप्त कर म में शांति प्रदान करता है. इसीलिए इसका नाम गोरक्षासन है।
4. अर्द्धमत्स्येन्द्रासन
अर्द्धमत्स्येन्द्रासन की विधि- दोनों पैर स फैलाकर बैठें. बाएं पैर को मोड़कर एडी को नितम्ब के पास लगाएं। दायें पैर के घुटने के पास बाहर की ओ़र भूमि पर रखें।
- मधुमेह लाभकारी डायबिटीज कण्ट्रोल
- पृष्ठ देश की सभी नस (जो मेरुदंड के इर्द-गिर्द फैली हुई है.) रक्त संचार को सुचारू रूप से चलाता है।
- उदर (पेट) विकारों को दूर कर को बल प्रदान करता है।
5. योगमुद्रासन
- चेहरा सुन्दर,
- स्वभाव विनम्र व
- मन एकाग्र होता है.
6. उदाराकर्षण या शंखासन
स्थिति- काग आसन में बैठ जाइए।
- सभी प्रकार के उदर रोग त मंदागिनी, गैस, अम्ल पित्त, खट्टी-खट्टी डकारों का आना एवं बवासीर आदि निश्चित रूप से दूर होते हैं।
- आँत, गुर्दे, अग्न सम्बन्धी सभी रोगों में लाभप्रद है।
7. सर्वांगासन
- थायराइड को बनाता है।
- मोटापा, दुर्बलता, कमी एवं थकान आदि विकार दूर होते हैं। Related: मोटापा कम करने के आयुर्वेदिक उपाय
- एड्रिन ग्रंथियों को सबल बनाता है।
प्राणायाम
प्राण का अर्थ, ऊर्जा अथवा जीवनी शक्ति है तथा आयाम का तात्पर्य ऊर्जा को नियंत्रित करना है। इस नाडीशोधन प्राणायाम के अर्थ में प्राणायाम का तात्पर्य एक ऐसी क्रिया से है जिसके द्वारा प्राण का प्रसार विस्तार किया जाता है तथा उसे नियंत्रण में भी रखा जाता है.
1. अनुलोम-विलोम प्राणायाम
विधि- ध्यान के आसान में बैठें। श्वास धीरे-धीरे भीतर खींचे। श्वास यथाशक्ति रोकने (कुम्भक) के पश्चात दायें स्वर से श्वास छोड़ दें। श्वास खीचें। यथाशक्ति श्वास रूक बाद स्वर से श्वास धीरे-धीरे निकाल दें। जिस स्वर से श्वास छोड़ें उसी स्व पुनः श्वास लें और यथाशक्ति भीतर रोककर रखें… क्रिया सावधानी पूर्वक करें, जल्दबाजी ने करें।
2. कपालभा प्राणायाम
विधि- कपालभाति प्राणायाम का शाब्दिक अर्थ है, मष्तिष्क की आभा को बढाने वाली क्रिया।
इस प्राणायाम भस्त्रिका के ही सामान होती है परन्तु इस प्राणायाम में रेचक अर्थात श्वास की शक्ति पूर्वक बाहर छोड़ने में जोड़ दिया जाता है। श्वास लेने में ज में ध्यान केंद्रित किया जाता है। कपालभाति प्राण पिचकाने और फुलाने की क्रिया पर जोर दिया जाता है। इस अधिक से अधिक करें।
3. भ्रामरी प्राणायाम
उच्च रक्त चाप पर नियंत्रण करता है।
अष्टांग योग
- यम
- नियम
- आसन
- प्राणायाम
- प्रात्याहार
- धारणा
- ध्यान
- समाधि
आसान से तात्पर्य शरीर की वह स्थिति है जिसमें आप अपने शरीर और मन को शांत स्थिर और सुख से रख सकें.
स्थिरसुखमासनम्: सुखपूर्वक बिना कष्ट के एक ही स्थिति में अधिक से अधिक समय तक बैठने की क्षमता को आसन कहते हैं।
आसनों को अभ्यास शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वास्थ्य लाभ एवं उपचार के लिए किया जाता है।