भारत में बोली जाने वाली भाषाओं के नाम

भारत में बोली जाने वाली भाषाओं के नाम

भारत में बोली जाने वाली भाषाओं के नाम

कुछ मुख्य भारतीय भाषाओं की चर्चा इस प्रकार है, 

1. असमिया – इस भाषा का प्रयोग असम प्रांत में किया जाता है । इस भाषा को बोलने वालों की संख्या 1.30 करोड़ अर्थात् 1.55 प्रतिशत है । बंगाल और असम दोनों पड़ोसी राज्य की बंगला और असमी भाषाएँ बहुत मिलती-जुलती है । 

2. बंगला – बंगला मुख्य रूप से बंगाल में बोली जाती है । बंगला भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या
6.95 करोड़ अर्थात् 8.22 प्रतिशत है । भाषा की दृष्टि से यह भाषा बहुत ही मधुर और सरल है । बंगला भाषा में ही रविन्द्र नाथ टैगोर
ने अपनी प्रसिद्ध रचना गीतांजली लिखी है । इस भाषा को समृद्ध करने में कई महान विद्वानों का हाथ है ।
जैसे – शरत् चन्द्र राय, बंकिम चन्द्र चटर्जी, राजा राम मोहन राय, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर आदि ।
3. गुजराती – गुजराती भाषा मुख्यतः गुजरात एवं काठियावाड़ में प्रयोग किया जाता है । इस भाषा का प्रयोग करीब 4 करोड़ अर्थात् 4.81 प्रतिशत लोग करते हैं । इस भाषा पर भी अन्य भाषा की तरह हिन्दी और राजस्थानी का प्रभाव है ।
4. हिन्दी – जिसकी लिपि देवनागरी है । इसे बोलने वाले लोग 33.72 करोड़ अर्थात् कुल जनसंख्या का लगभग 39.85 प्रतिशत भाग है । उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार एवं झारखण्ड प्रांतों में हिन्दी भाषा का प्रचलन मुख्य रूप से है ।

5. कन्नड़ – इस भाषा का प्रयोग करने वालों की संख्या 3.87 प्रतिशत अर्थात् 3.27 करोड़ है । कन्नड़ भाषा में संस्कृत भाषा के शब्दों का भी प्रयोग किया गया है ।

6. मलयालम – मलयालम भाषा तमिल भाषा की एक शाखा है । इस भाषा का प्रचलन केरल प्रान्त में किया जाता है । मलयालम भाषा बोलने वालों की संख्या 3 करोड़ अर्थात् 3.59 प्रतिशत है । इस भाषा पर भी तमिल की भांति संस्कृत भाषा का प्रभाव रहा है ।
7. मराठी – मराठी भाषा मुख्यतः महाराष्ट्र क्षेत्र में बोली जाती है । इसको बोलने वाले लोगों की संख्या 6.2 करोड़ अर्थात् 7.38 प्रतिशत है । इसमें भी दो तरह की बोलियाँ प्रचलित हैं – कोंकणी तथा हलवी । कोंकणी गोवा प्रान्त में बोले जाते हैं । जबकि हलवी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में बोली जाती हैं । 

8. उडि़या – उडि़या भाषा मुख्यतः उडि़सा में बोली जाने वाली भाषा है । इसे करीब 2.8 करोड़ अर्थात्
3.22 प्रतिशत लोगों द्वारा बोली जातीे है ।

9. पंजाबी – पंजाबी भाषा की लिपि गुरूमुखी है । पंजाबी भाषा का प्रयोग पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान
के उत्तरी भागों में किया जाता है । पंजाबी भाषा बोलने वाली की संख्या 2.3 करोड़ अर्थात् 2.76 प्रतिशत है ।
इस भाषा को भी पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है । पंजाबी भाषा लाहौर तथा अमृतसर के आस-पास बोली जाती है ।

10. सिन्ध – इस भाषा का प्रयोग सिन्ध् प्रांत के निवासी करते थे जो अब पाकिस्तान क्षेत्र में आते हैं । भारत
विभाजन के समय सिन्ध् से भारत आने वाले लोग इस भाषा का प्रयोग करते हैं । इस भाषा का प्रयोग
करने वालों की संख्या 21 लाख अर्थात् 0.25 प्रतिशत है । 

11. संस्कृत – संस्कृत भाषा वैदिक काल से प्रचलित प्राचीन भाषा है । इस भाषा से कई भाषाओं का उद्भव हुआ है । जैसे – तमिल, तेलगू, मलयालम, मराठी आदि । इसे देव भाषा भी कहा जाता है । संस्कृत भाषा को संविधान में मान्यता प्रदान की गई है ।
12. तमिल –  इसके बोलने वाले लोगों की संख्या 5.3 करोड़ है अर्थात् 6.26 प्रतिशत है । 
13. तेलगू – तेलगू भाषा द्रविड़ भाषा परिवार की प्रमुख भाषा है । इस भाषा का प्रचलन उत्तरी तमिलनाडु, दक्षिणी हैदराबाद, आन्ध््र प्रदेश एवं मैसूर के कुछ भागों में बोली जाती है । इस भाषा को बोलने वालों की संख्या 6.60 करोड़ अर्थात् 7.80 प्रतिशत है । 
14. उर्दू – यह भाषा अरबी, फारसी और हिन्दी तीनों के मिश्रण से बनी है । उर्दू भाषा का भारत में प्रचलन मुस्लिम शासकों के समय से प्रचलित हुआ । ऐसे तो इसका प्रयोग दक्षिण भारत में सबसे पहले हुआ था । लेकिन आज उत्तरी भारत में अधिक बोली जाती है । उर्दू भाषा अपनी तहज़ीब के लिए जानी जाती है । शेरो-शायरी में हम उर्दू का अधिक उपयोग करते हैं । 

15. राजस्थानी – राजस्थानी भाषा हिन्दी की ही उपभाषा है, लेकिन इसे अलग भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने
का प्रयास किया गया । राजस्थानी भाषा
में मालवी, जयपुरी, मारवाड़ी और मेवाती बोलियों का मिश्रण पाया जाता है । प्रारंभ में राजस्थानी बोलियों पर
अन्य भाषाओं का भी प्रभाव था ।

16. बिहारी – बिहारी भाषा अधिकांशतः बिहार प्रान्त में बोली जाती है । इसका प्रचलन मग्ध्ी भाषा के
अपभं्रश से हुआ है । इसमें भोजपुरी, मैथिली और मगही तीन बोलियाँ प्रमुख हैं । भोजपुरी उत्तरी भारत की एक
प्रमुख भाषा है । मैथिली भाषा उत्तर बिहार में बोली जाती हैं ।

17. हिमाली – यह भाषा पूर्वी कश्मीर से भूटान तक के पहाड़ी ढलानों में बोली जाती है । इसके भी तीन
भाग हैं – पश्चिमी, पूर्वी एवं मध्यम हिमाली । पश्चिमी हिमाली का प्रचलन चम्बा से गढ़वाल एवं कुमायु क्षेत्रा
तक, मध्य हिमाली गढ़वाल और कुमायु क्षेत्र में पाया जाता है । पूर्वी हिमाली में खसपुरा, गुरखाली और पर्वतीयं
भाषाएँ बोली जाती हैं 

अन्य भाषाएँ – इन भाषाओं के अलावा भी कई अन्य भाषा भी प्रचलित हैं । जैसे – कोंकणी, मणिपूरी, नेपाली, मैथली, संथाली, वोडो, खासी,  टोडा, मुण्डा, कोरवा,
भूमिज, बिरटोर, खरिया, संथाली, मुण्डारी, कोटकू आदि ।

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