भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य
भारत के मूल संविधान में मूल अधिकारों को ही सम्मिलित किया गया था । प्रारंभ में मौलिक कर्तव्यों
का संविधान में उल्लेख नहीं था । 42वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 51क, भाग 4 में इसे स्थान दिया
गया जिसमें कुल 10 मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है ।
86वें संविधान संशोधन द्वारा एक मौलिक कर्तव्य और
जोड़ा गया, इस प्रकार वर्तमान में कुल 11 मौलिक कर्तव्यों का संविधान में उल्लेख किया गया है जो हैंः-
जोड़ा गया, इस प्रकार वर्तमान में कुल 11 मौलिक कर्तव्यों का संविधान में उल्लेख किया गया है जो हैंः-
- प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों,
संस्थाओं, राष्ट्र-ध्वज और राष्ट्र गान का आदर करें । - स्वतंत्राता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोये
रखे और उनका पालन करें । - भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें ।
- देश की रक्षा करें तथा बुलाये जाने पर राष्ट्र की सेवा करें ।
- भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें । स्त्रियों के
सम्मान के विरूद्ध प्रथाओं का त्याग करें । - हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्व समझे और उसका परीक्षण करें ।
- प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसका संवर्धन करे ।
- मानववाद, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा ज्ञानार्जन एवम् सुधर की भावना का विकास करें ।
- हिंसा से दूर रहें तथा सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें ।
- व्यक्तिगत एवम् सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास
करें जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए उपलब्धि नई उचाईयों को छू ले । - 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या अभिभावक या संरक्षक को अपने बच्चे को
शिक्षा दिलाने का अवसर उपलब्ध कराना चाहिए ।
बिना कर्तव्यों के मौलिक अध्किारो का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि नागरिकों को भी देश के प्रति कुछ
कर्तव्यों का निर्वाह करना चाहिए । तभी वह मौलिक अधिकारों को प्राप्त करने का अधिकारी है ।
