अनुक्रम
गठन 1946 में हुआ। भारतीय संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था, लेकिन इसके निर्माण की प्रक्रिया बहुत लंबी थी।
भारतीय संविधान के स्रोत
भारतीय संविधान का निर्माण
इसका निर्वाचन किया गया इसके सदस्यों में से 208 सदस्य भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
के और 73 मुस्लिम लीग के थे। संविधान सभा को नवंबर 1946 में देश के लिए संविधान
निर्माण का दायित्व सौंपा गया। इस सभा में सिवाय महात्मा गांधी तथा मोहम्मद अली
जिन्ना के देश के लगभग सभी शीर्षस्थ नेता सम्मिलित थे जैसे- पं. जवाहरलाल नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना आजाद, खान अब्दुल गफ्फार खान, पंगेविंद बल्लभ पंत, डॉ राधाकृष्णन, डॉ पुरुषशत् राम दास टंडन, आचार्य जे.वी. कृपलानी, के.टी. शाह, हृदयनाथ कुंजरू, सर एच.एस. गौर, कन्हैयालाल माणिक लाल मुंशी, श्री कृष्ण सिंह, अलादी कृष्ण स्वामी अय्यर, डॉ जयकर, ख्वाजा नजीमुद्दीन, लियाकत अली खान, सर जगरोल्लाह खान सुहरावर्दी, सर फिरोज खातून और डॉ सच्चिदानंद सिन्हा
आदि। परंतु इसी दौरान देश का विभाजन हो गया और संविधान सभा में सम्मिलित वे
नेता जो मुस्लिम लीग के सदस्य थे, पाकिस्तान चले गए।
सदस्यों ने संविधान के निर्माण के कार्य को पूरा किया। 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में के बाद संविधान निर्माण का कार्य पूरा हुआ।
संविधान सभा की कुल संख्या 389 निश्चित की गई थी। इनमें से 93 सदस्यों
देशी रियासतों एवं 4 चीफ कमिश्नरों के प्रांतों और 292 सदस्य ब्रिटिश प्रांतों के होने चाहिए। संविधान सभा में 10 लाख व्यक्तियों पर एक सदस्य के निर्वाचन की व्यवस्था
थी। प्रांतों को दी गईं सीटें उनकी विभिन्न जातियों में जनसंख्या के आधार पर बंटनी
थी। देशी रियासतों को प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर दिया गया था। उनके
प्रतिनिधियों के बारे में निर्णय करने का अधिकार संविधान सभा के निर्वाचित प्रतिनिधियांे
की समझौता समिति एवं देशी रियासतों के शासकों द्वारा नियुक्त समिति को था, जो
परस्पर विचार-विमर्श कर निर्णय करेंगे। कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान
सभा के लिए चुनाव जुलाई 1946 में संपन्न हुए। ब्रिटिश प्रांतों के इन चुनावों में 208
कांग्रेस, 73 मुस्लिम लीग एवं 15 स्थान स्वतंत्र एवं अन्य दलों को मिले।
का चुनाव किया, जिसे कि नये संविधान के लाग ू होने के समय तक भारत का शासन
संचालित करने का कार्य सौंपा गया था। नवीन संविधान के लाग ू होने के पश्चात तथा
सन् 1952 में आम चुनावों के संपन्न होने से पूर्व इस संविधान सभा ने ही संसद के रूप
में कार्य किया।
पहला सत्र – संविधान का पहला सत्र 9 दिसम्बर 1946 ई. को डाॅ. सच्चिदानन्द
की अध्यक्षता में प्रारभ्ं ा हुआ। उनमें केवल 209 सदस्य ही उपस्थित हुए थे। 11 दिसम्बर
1946 ई. को इस सभा का स्थायी अध्यक्ष डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद को चुना गया।
1947 ई. तक चला। इस सत्र में संविधान सभा ने अपनी एक विशिष्ट समिति संघीय
शक्ति से संबंधित- समिति तथा मंत्रिमण्डल मिशन योजना के एक स्टियरिंग समिति,
एक कार्यक्रम समिति तथा एक अल्पसंख्यक वर्गांंे के लिए मंत्रणा समिति गठित की।
तक चलता रहा। इस समय तक संविधान सभा कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं कर सकी
थी। इससे संविधान सभा के बहुसंख्यक सदस्यों का े यह अभास हो गया कि मुस्लिम
लीग के सदस्य किसी भी दशा में संविधान सभा में सम्मलित नहीं होंगे। तदुपरान्त
संविधान सभा ने सुचारू रूप से संविधान निर्माण करने का कार्य प्रारंभ किया।
शक्ति समिति की रिपार्टे 28 अप्रैल, 1947 ई. को जवाहरलाल नेहरू के द्वारा संविधान
सभा में प्रस्तुत की गई। दूसरे ही दिन 29 अप्रैल 1947 ई. को सरदार पटेल के द्वारा
सभा में मूलाधिकार एवं अल्पसंख्यक वर्ग की मंत्रणा समिति की अंतिम रिपार्टे भी प्रस्तुत
कर दी गई। तत्पश्चात संविधान सभा ने नागरिक मूलाधिकारों विषय में विस्तृत रूप से
विचार करना प्रारंभ कर दिया। सभा ने 2 मई, 1947 ई. को कुछ समय के लिए अपना
कार्य स्थगित करने का निश्चय किया।
इसी दौरान संघीय संविधान पर विचार करना प्रारंभ किया गया। अंत में वित्तीय
संबंधों की एक विशेषज्ञ समिति तथा एक मुख्यायुक्त समिति भी गठित की गई।
1947 ई. को प्रारंभ हुआ। संघ संविधान समिति तथा प्रांतीय संविधान समिति ने
अपनी-अपनी रिपोर्ट संविधान सभा के सामने पेश की। तत्पश्चात संविधान सभा के
सामने मूल अधिकार आदिम जाति तथा अन्य क्षेत्रों के संबंध में भी रिपोर्ट प्रस्तुत की
गई। इसके बाद सर्वाेच्च न्यायालय की तदर्थ समिति ने भी इसके सामने अपनी रिपार्टे
रखी। तत्पश्चात सभा ने प्रांतीय संविधानों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांतों के विषय में विचार करना प्रारंभ किया। 22 जुलाई, 1947 ई. को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय
ध्वज को अंगीकृत किया।
पाँचवां सत्र – 14 जुलाई, 1947 ई. से संविधान सभा का पाँचवां अधिवेशन प्रारंभ हुआ। इसके साथ ही संविधान सभा ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 ई. की शर्तों
के अधीन स्वयं एक पूर्ण प्रमुख संपन्न निकाय का स्वरूप रख लिया। अस्तु, अब यह
सभा कैबिनेट मिशन द्वारा नियत की हुई सीमाओं के अंतर्गत समिति न रहकर
देशवासियों की आवश्यकतानुसार संविधान निर्मित कर सकने को स्वतंत्र हो गई। लार्ड
माउटंबेटन को भारत का गवर्नर जनरल नियुक्त किया गया तथा जवाहरलाल नेहरू
को उनके साथ स्वतंत्र भरत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने का उत्तरदायित्व
सौंपा गया। संविधान सभा ने संविधान बनाने के अतिरिक्त देश के लिए सामान्य कानूनों
का निर्माण करने का उत्तरदायित्व भी संभाल लिया।
इसके अध्यक्ष डाॅ. भीमराव अंबेडकर तथा अन्य प्रमुख सदस्य- श्री के.एम. मुंशी, टी.टीकृष्ण्
ााकुमारी, गोपाल स्वामी आयंगर तथा अलादी कृष्णा स्वामी अय्यर आदि थे। इस
प्रारूप समिति ने श्री बी.एन. राव द्वारा प्रस्तुत प्रारूप के आधार पर कार्य करना प्रारंभ
किया था। एस.एन. मुखर्जी ने इस प्रारूप को अंतिम रूप प्रदान किया।
संविधान के प्रारूप पर विचार करने के लिय 8 मास का समय निश्चित हुआ। इस पर
संविधान सभा ने 4 नवबंर, 1948 के सामान्य वाद-विवाद प्रारंभ कर दिया। यह
वाद-विवाद 9 नवंबर, 1948 तक चला। 19 नवंबर, 1948 ई. से 17 अक्टूबर, 1949 ई के
दौरान संविधान के प्रारूप पर सभा ने भली प्रकार विचार किया।
का तृतीय पाठन 14 नवंबर से लेकर 26 नवंबर, 1949 ई. तक चलता रहा। तत्पश्चात
इसे अंगीकृत करके उसके स्थायी अध्यक्ष डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद के हस्ताक्षरों के लिए
प्रस्तुत किया गया। 26 जनवरी, 1950 से संविधान लागू कर दिया गया।
