बाल अपराध के कारण

बाल अपराध के प्रमुख तीन कारण हैं –
  1. सामाजिक कारण
  2. आर्थिक कारण
  3. मनोवैज्ञानिक कारण

      बाल अपराध के सामाजिक कारण-

      (1) पारिवारिक कारण :-

      1. भग्न परिवार – पति-पत्नि के बीच मतभेद, तलाक, मृत्यु आदि के कारण परिवार का संगठन बिगड़ जाता हैं ऐसे परिवार को भग्न परिवार कहते हैं। इस प्रकार के परिवार के बालक नाना प्रकार के अपराध करने लगते हैं।
      2. उपमाता अथवा उपपिता का व्यवहार – कुछ माता-पिता समय से पहले ही मर जाते हैं जिनके बच्चों का पालन-पोषण उपमाता या उपपिता करते हैं परंतु उनका व्यवहार बच्चों के प्रति सख्त एवं रूखा होता है जिससे बच्चों में नाना प्रकार की भावना-ग्रंथियॉं निर्मित हो जाती है जो उन्हें अपराध करने के लिए पे्ररित करती हैं।
      3. अनैतिक परिवार- जिस परिवार में माता-पिता अथवा परिवार के अन्य सदस्य अनैतिक कार्य करते हैं, ऐसे परिवार के बच्चों का झुकाव अपराध की ओर बढ़ जाता है।
      4. अशिक्षित माता-पिता – अशिक्षित माता-पिता बालक का सुचारू रूप से निर्देशन नहीं कर पाते परिणामस्वरूप उनके बच्चे अवांछित व्यवहार करना प्रारंभ कर देते हैं।

        (2) परिवार के बाहरी कारण –

        1.  बुरे समवयस्क बालकों का साथ –बालक के मित्र अच्छे हैं तो बालक अच्छी आदतें सीखता है और बुरे हैं तो बुरी जैसे मित्रों के साथ मिलकर गाली-गलौज करना, चोरी करना, ध्रूम्रपान करना, जुआ खेलना, यौन अपराध करने लगना।
        2. बुरे प्रौढ़ व्यक्तियों का साथ- कभी-कभी बुरे प्रौढ़ व्यक्तियों के सम्पर्क में आने के कारण बालक बुरी आदतों का शिकार हो जाता है। प्राय: घर के नौकर तथा बालकों से मिलने वाले प्रौढ़ व्यक्ति समलिंगी मैथून की ओर अग्रसित करते हैं।
        3. बुरा पड़ोस – यदि बालक के पड़ोस में जुआरी, शराबी, गुण्डे तथा चोर रहते हैं तो बालक के इन लोगों से दुर्गुणों को सीखने की सम्भावना बढ़ जाती है।

            बाल अपराध के आर्थिक कारण-

            1. गरीबी – गरीब बच्चों के पास जीवन की पर्याप्त सुविधायें व आराम नहीं होते। उन्हें चोरी और लूटपाट सबसे सरल माध्यम लगता है अत: छोटे बच्चे चोरी और डकैती करने लगते हैं। कभी-कभी गरीबी के कारण स्वयं माता-पिता ही अपने बच्चों को चोरी करने के लिए उकसाते हैैं।
            2. बेकारी – निर्धनता के साधन बेकारी भी बाल-अपराध का ऐसा आर्थिक कारण है जो स्वयं तो बाल अपराध को जन्म देती है साथ ही कर्इ ऐसी परिस्थितियॉं उत्पन्न करती हैं जिनके वशीभूत होकर बालकों में अपराध मनोवृत्तियॉं जन्म लेती हैं
            3. छोटे बालकों का नौकरी करना – उदरपूर्ति के लिए छोटे बालकों को फैक्ट्रियों , होटलों, चलचित्र इत्यादि में नौकरी करना पड़ता है फलस्वरूप ये शिक्षा से वंचित रह जाते हैें साथ ही साथ बीड़ी पीना, जुआ खेलना, वेश्यावृत्ति, शराबखोरी इत्यादि बुरी आदतें पड़ जाती हैं।

                बाल अपराध के मनोज्ञानिक कारण-

                (1) मानसिक या बौद्धिक कारण :-

                1. निम्न बुद्धि स्तर – सर्वेक्षण में 66 प्रतिशत बाल अपराधियों को दुर्बल बुद्धिवाला पाया गया। दुर्बल बुद्धि वाले बच्चे अच्छा बुरा नहीं सोच पाते तथा अवसर मिलते ही अपराधी व्यवहार करने को तत्पर हो जाते हैं।
                2. विशेष मानसिक योग्यता तथा अभिरुचियों की कमी –मानसिक योग्यता तथा अभिरूचियों का यथायोग्य विकास नहीं होने से किसी भी प्रकार के प्रशिक्षण तथा व्यवसाय के क्षेत्र में समायोजन स्थापित नहीं कर पाता है। अंत में यही असमायोजन की स्थिति में उसमें अपराध संबंधी मनोवृत्ति उत्पन्न होती हैं।

                (2) संवेगात्मक कारण :-

                1. मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति का अभाव- प्रत्येक बालक की कुछ जन्मजात तथा अर्जित मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं जैसे आत्मनिर्भर, पे्रम, सुरक्षा, काम इत्यादि की तृप्ति न होने पर वे कुण्ठित हो जाती हैं और बालक में हीनता, क्रोध, आक्रामकता, विद्रोह इत्यादि की भावनायें जन्म लेती हैं।
                2.  किशोरावस्था – इस अवस्था में संवेगात्मक तनाव तथा मानसिक संघर्ष की अधिकता रहती है और यही स्थिति अनेक समाज-विरोधी कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।

                Leave a Comment