अनुक्रम
सियाल
परतदार शैलों के नीचे सियाल की एक परत पायी जाती है। इस परत की रचना सिलिका तथा ऐल्युमिनियम से हुर्इ है। इसी कारण इस परत को सियाल (Si + al = Sial) कहा जाता है। इस परत का औसत घनत्व 2.9 है तथा इसकी औसत गहरार्इ 50 से 300 कि.मी. है, इस परत में ग्रेनाइट चट्टान की अधिकता पायी जाती है तथा सोडियम, पोटेशियम, ऐल्युमिनियम पदार्थो की अधिकता पायी जाती है। महाद्वीपों की रचना इसी सियाल से हुर्इ है ऐसा माना जाता हैं।
सीमा
सियाल के नीचे जो परत पायी जाती है उसे सीमा के नाम से जाना जाता है। इस परत की रचना (Si + ma = Sima) सिलिका+मैग्नेशियम नामक रासायनिक पदार्थो से हुर्इ है इसलिये इसे सीमा नाम से पुकारा जाता है। इसका घनत्व 2.9 से 4.7 तथा गहरार्इ 300 कि.मी. से 2900 कि.मी. तक मानी गर्इ है इस परत की रचना आग्नेय शैलों से हुर्इ है। यही से ज्वालामुखी उद्गार के समय तप्त एवं तरल लावा बाहर आता है।
नीफे
पृथ्वी की तीसरी परत को नीफे के नाम से जाना जाता है। यह सियाल व सीमा के बाद आती है। इस परत की रचना निकिल तथा फेरस नाम रासायनिक पदार्थो से हुर्इ है। इसलिए इस परत को नीफे (Ni+Fe=NiFe) के नाम से पुकारते हैं। यह परत कठोर धातुओं से बनी है, जिस कारण इसका घनत्व सियाल तथा सीमा से अधिक है इसका घनत्व 11 से भी अधिक हैं ऐसा माना जाता है इस परत की गहरार्इ 2900 कि.मी. से 6400 कि.मी. तक ही मानी जाती है।
