कहलाता है। उदाहरण के लिए-आपने 5,000 की बचत की है। यदि आप इस
धन को घर में ही रखते हैं तो यह 5000 ही रहेगा। पर यदि आप इसे बैंक
में जमा करते हैं तो इस पर ब्याज लगेगा और यह बढ़ेगा जितनी अधिक
अवधि तक आप इसे बैंक में रखेंगे यह उतना ही बढ़ेगा या इससे कोई आप
भूखण्ड खरीदते हैं तो कुछ समय के बाद इस भूखण्ड को बेच कर अधिक
मूल्य प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि भूखण्ड की कीमतें सदैव बढ़ती रहती है।
ऐसे अनेक तरीकें हैं जिससे हम अपने धन का निवेश कर सकते हैं।
निवेश कहां करें?
इसके लिए विभिन्न प्रकार की योजनायें है जो है।
- डाकखाना बचत
- डाकखाने का बचत खाता-
- सी.टी.डी.(क्यूमिलेटिव्ह टाइम डिपॉजिट)-
- डाकखाने का मियादी जमा-
- राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र-
- सामान्य प्रॉवीडेण्ट फण्ड-
- प्रावीडेण्ट फण्ड-
- यूनिट-
- बारह वर्षीय राष्ट्रीय रक्षा पत्र-
- भविष्य निधि मेंं निवेश
- शेयर खरीदना
- भूसंपत्ति में निवेश
1. डाकखाना बचत – बैंक
साधारण आमदनी वाले व्यक्ति भी बचत की सुविधा प्राप्त कर सके, इस
उद्देश्य से भारत सरकार ने डाकखाने में भी बैंक की स्थापना की है।
डाक खाने में निम्नांकित स्वरूपों में बचत की सुविधा प्राप्त होती है-
- बचत खाता,
- सी.टी.डी. (क्यूमिलेटिव्ह टाइम डिपॉजिट),
- डाकखाने की मियादी खाता,
- राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र
- यूनिट।
2. डाकखाने का बचत खाता-
डाकखाने में कोई भी बालिग व्यक्ति अकेले अथवा संयुक्त रूप या किसी
नाबालिग के नाम पर भी खाता खोल सकते हैं। इस खाते का आरंभ 500 रूपये से
भी किया जा सकता है। डाकखाने के बचत खाते में कोई व्यक्ति अधिक से अधिक
1,00,000 रूपये की राशि अपने नाम करवा सकता है। डाकखाने से सप्ताह में केवल
दो बार रूपए निकालने की सुविधा रहती है। जमा कितनी ही बार करवाया जा
सकता है। इस खाते में बचत रकम पर 3% ब्याज मिलता है।
डाकखाने में बचत खाता खोलने के लिए निर्धारित प्रपत्र पर आवश्यक
प्रविष्टियॉं बचत की राशि सहित डाकखाने के बैंक अधिकारी को देनी पड़ती है। इस
खाते में भी हस्ताक्षर का विशेष महत्व है। अत: गृहणी को बचत खाता खोलते समय
किये गये हस्ताक्षर की नकल अपनी डायरी में नोट करना चाहिए। बचत बैंक के
अधिकारी फार्म और जमा की जाने वाली राशि के संबंध में सारी प्रविष्टियॉं
पास-बुक में करते हैं। पास-बुक में खातेदार का नाम, अवस्था, व्यवसाय, खाते का
नाम और जमा की जाने वाली तथा निकाली जाने वाली धनराशि अंकित की जाती
है। हमेशा ही धन निकालते एवं जमा करते समय यह पास-बुक पोस्ट ऑफिस ले
जाना चाहिए। पास-बुक भर जाने पर डाकखाने से दूसरी पास-बुक मिलती है
किन्तु इसके खो जाने से नई पास-बुक हेतु 10 रूपया जमा करना पड़ता है।
आजकल शिक्षित व्यक्तियों की सुविधा के लिए 500 रू. तक की रकम चैक
से निकालने की सुविधा भी डाकखाने द्वारा दी जाती है। चैक का उपयोग वे ही
व्यक्ति कर सकते हैं जिनके खाते में हर समय 500 रूपये जमा हों।
5 रूपये लगातार 500 रूपये तक की राशि से आरंभ किया जा सकता है। बचत की
रकम नियमित रूप से प्रति माह खाते में जमा की जानी चाहिए। समयावधि के
समाप्त होने पर ही साधारण ब्याज के साथ बचत की पूरी रकम लौटा दी जाती है।
यदि बचत की रकम नियमित रूप से वर्ष तक जमा की गई है तो जमा हुई राशि
का 5% आवश्यकता पड़ने पर खातेदार 5 वर्ष में एक बार निकाल सकता है।
के नाम पर 5 वर्ष के लिए खोला जा सकता है। डाकखाने में मियादी खाता 50 से
25,000 रूपये की राशि के रूप में जमा किया जा सकता है। पॉंच वर्ष बीत जाने पर
50 रूपये के ब्याज सहित 62.20 हो जाते हैं। इसी प्रकार प्रत्येक पचास रूपये का
हिसाब कर अवधि की समाप्ति पर जमाकर्ता को सारी रकम लौटा दी जाती है।
की गई। ये सर्टीफिकेट 10,100 और 1,000 की कीमत के डाकखाने से खरीदे जा
सकते हैं। एक वर्ष की अवधि के पूरा होने पर 12 रूपये प्रति सैकड़ा के वार्षिक ब्याज
का लाभ इसमें सम्मिलित कर खरीददारी की रकम लौटाई जाती है।
यदि आवश्यकता पड़े तो भी इस रकम का भुगतान जमा करने की तिथि से
दो वर्ष बाद ही किया जाता है। इसके पूर्व प्रमाण-पत्र की रकम नहीं निकाली जा
सकती। इस प्रमाण-पत्र के भुगतान हेतु वारिस का नामांकन भी किया जा सकता
है। ये प्रमाण-पत्र डाकखाने में ही साधारण मूल्य पर खरीदे जाते हैं और उनका
भुगतान भी उसी डाकखाने में होता है।
तथा 25,000 की कीमतों के डाकखाने से खरीदे जा सकते हैं। इन सर्टीफिकेट पर
12 व वार्षिक रूप से साधारण ब्याज का लाभ मिलता है। कोई भी अकेला वयस्क
व्यक्ति अधिकतम 35,000 रूपये के और संयुक्त रूप में 70,000 रूपये के बारह वर्षीय रक्षा पत्र खरीद सकता है। चीन आक्रमण के परिणामस्वरूप उत्पन्न संकटकालीन
स्थिति का सामना करने की दृष्टि से यह योजना आरंभ की गई। किसी भी हालत
में एक वर्ष के पूर्व इस राशि को वापस नहीं प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यालयों के लिए शुरू की गई है। इस योजना के अन्तर्गत एक छोटी सी धन राशि हर
माह वेतन में से काट ली जाती है। उतनी ही राशि नियोक्ता द्वारा इसमें जमा कर दी जाती
है। इस प्रकार कर्मचारी का धन स्वत: ही दुगना होता जाता है। नौकरी छोड़ने पर अथवा
सेवानिवृत्ति पर यह सारी राशि कर्मचारी को मिल जाती है।
भविष्य निधि में निवेश करने का मुख्य लाभ है कि इस पर आय कर नहीं देना
पड़ता। इसका एक अन्य लाभ यह भी है कि जब भी आपको आवश्यकता पड़े, जैसे- परिवार
में कोई विवाह हो, मकान बनाना हो या बच्चों की उच्च शिक्षा आदि के लिए अपनी भविष्य
निधि से धन निकाल सकते हैं। अत: धन निवेश करने का यह एक अच्छा तरीका है।
बड़े कारखाने एक बड़ी धन राशि एकत्रित करने के लिए अपने शेयर बाजार में बेचते है। इस
धन से वे अपनी सुविधाओं का विस्तार करते हैं अथवा उत्पादन बढ़ाने के लिए और मशीनें
लगाते हैं।
जब कम्पनी लाभ कमाने लगती है तो शेयर धारकों को उस लाभ का हिस्सा दिया
जाता है। ये शेयर दूसरों को खरीदें गये मूल्य से अधिक मूल्य पर बेचे भी जा सकते हैं।
चूंकि शेयर धारक उस कम्पनी का एक आंशिक साझेदार बन जाता है, अत: उसे
लाभ का हिस्सा मिलता है। परन्तु कम्पनी को घाटा होने पर शेयर धारक को घाटा भी
उठाना पड़ता है।
इसलिए जब तक आप उस कम्पनी की स्थिति के बारे में पता लगा कर संतुष्ट न
हो जाए तब तक आपको उसके शेयरों में निवेश नहीं करना चाहिए अन्यथा आपको हानि
हो सकती है।
संपत्ति से है। यदि आप अपनी बचत की राशि किसी भूखण्ड अथवा मकान
खरीदने में लगाते हैं तो यह एक आजीवन निवेश है। जब भी आपको धन
की जरूरत हो आप अपनी सम्पत्ति को खरीदे गये मूल्य से अधिक मूल्य पर
बेच सकते हैं क्योंकि यह देखा गया है कि स्थावर संपत्ति (रीयल एस्टेट) की
कीमतें सामान्यतया बढ़ती ही हैं।
14. निवेश योजना के चुनाव को प्रभा करने वाले कारक –
बैंक में तथा अन्य बचत संस्थाओं में कई तरह की निवेश योजनायें हैं जो अलग-अलग
आपके व्यक्तियों के लिए होती है। किसी भी योजना में अपना पैसा लगाने से पहले आप
नीचे लिखी बातों पर ध्यान दें :-
- बचत की क्षमता-
यदि हमें थोड़ी थोड़ी बचत करनी है तो ऐसी योजना चुनना चाहिए जिसमें
कम से कम जमा करने वाली रकम बहुत अधिक हो। - निवेश की सुरक्षा-
बचत करना आसान नहीं है बहुत अधिक परिश्रम से कुछ जरूरतों को पूरा
करने के लिए हमने बचत की है तो हम चाहेंगे कि वह पूर्ण रूप से सुरक्षित हो
इसलिए हमें निवेश के लिखित प्रमाण पत्रों को सुरक्षित रखना चाहिये ऐसी योजना
से हमेशा बचे जो बाजार के उतार चढ़ाव के कारण ब्याज नहीं दे पाती है। - ब्याज की उच्च दर-
जितकी अधिक लम्बी अवधि के लिए आप अपना पैसा किसी संस्था में
लगायेंगे उतनी ही ब्याज की दर भी बढ़ जाती है। साथ ही अलग अलग संस्थायें
अलग-अलग अवधि के लिए अलग अलग ब्याज देती है। ऐसी संस्थायें जो तुरन्त
पैसा चाहती है ब्याज की दरें ऊंची रखती है। पैसा लगाने से पहले आपको संस्था
की विश्वसनीयता की परख भली भांति कर लेनी चाहिए। - तरलता-
अगर कभी ऐसा होता है कि हमें अचानक पैसे की आवश्यकता आ जाती है
और हमें जमा पैसा वापस चाहिये, तरलता से आप अपना जमा किया पैसा आसानी
से निकाल सकते है। कुछ संस्थायें ऐसी होती है जहां ये सुविधा नहीं होती है। ऐसे
समय में आप जरूरत के समय अपना पैसा वापस नहीं ले पायेगे। - क्रय शक्ति-
निवेश की अवधि समाप्त होने पर आपकी धन की वृद्धि की कीमत उस समय
की बढ़ी हुई मंहगी कीमतों के बराबर या दुगुनी होनी चाहिये। - अन्य लाभ-
ब्याज की उच्च दरों के अतिरिक्त संस्थायें दूसरे कुछ लाभ भी देती है- जैसे
डिविडेन्ट लाभांश और आयकर से छूट आदि।