डावस योजना क्या थी इसकी मुख्य सिफारिशें

24 अक्टूबर, 1923 को जर्मन सरकार ने क्षतिपूर्ति आयोग को एक पत्र लिखकर, यह
आग्रह किया कि, वह क्षतिपूर्ति की अदायगी के लिए तैयार है, लेकिन, उसने आयोग से प्रार्थना
की कि, वह उसकी आर्थिक क्षमता का अध्ययन कर उसे बताए कि, वह किस प्रकार इस ऋण
को चुका सकता है। जर्मनी के इस अनुरोध को स्वीकारते हुए, इग्लैण्ड और अमेरिका ने
दिसम्बर, 1923 में, जर्मनी की आर्थिक स्थिति की जांच के लिए, दो समितियों की स्थापना की।
पहली समिति के अध्यक्ष चाल्र्स टी. डावस थे, जिससे इसे ‘डावस योजना’ का नाम पड़ा। इस
समिति में ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका, इटली और बेल्जियम के दो-दो प्रतिनिधि थे। इस समिति का
मुख्य कार्य था- जर्मनी के बजट को संतुलित करना तथा जर्मनी की मुद्रा को स्थायी करना।

दूसरी समिति के अध्यक्ष ब्रिटेन के रेजिनाल्ड मेक्कन्ना थे, जिसमें इन देशों का एक-एक
प्रतिनिधि था। इस समिति का मुख्य कार्य, जर्मनी द्वारा आयात वस्तुओं का मूल्यांकन करना था।
इन समितियों की पहली बैठक 14 जनवरी, 1924 को पेरिस में शुरू हुई।

इन समितियों की खास बात यह थी कि इनके सभी सदस्य अर्थशास्त्री थे, क्योंकि यह
एक आर्थिक प्रश्न था, जिसका अभी तक राजनैतिक समाधान ढूंढा गया। डावस समिति ने इस
कठिनाई को समझा एवं जर्मनी की आर्थिक कठिनाईयों को ध्यान में रखते हुए, अपनी रिपोर्ट
तैयार की। 9 अप्रेल, 1924 को इस समिति ने अपनी, एक सौ पच्चीस पृष्ठों की रिपोर्ट, क्षपिपूर्ति
आयोग के सामने पेश की। 

डावस योजना की सिफारिशें

इस रिपोर्ट की सिफारिशें निम्नलिखित थी:

  1. 50 वर्ष के लिए, एक प्रचलन बैंक की स्थापना की जाए, जो नई मुद्रा को जारी करें।
    इस बैंक पर सात जर्मन एवं सात विदेशियों का नियंत्रण रहे। 
  2. जर्मनी को चार करोड़ पौण्ड का विदेशी कर्ज मिले, जिससे वह अपना मुद्रा कोष भर
    सके। 
  3. क्षतिपूर्ति का भुगतान, जर्मनी अपनी मुद्रा, मार्क में करें। 
  4. जर्मनी क्षतिपूर्ति की अदायगी के बन्धक के रूप में चुंगी, शराब, तम्बाकू तथा शक्कर
    पर, कर के रूप में प्राप्त होने वाली आय को वार्षिक किश्त के रूप में अदा करें। 
  5. वार्षिक क्षतिपूर्ति का भुगतान, पांच करोड़ पौण्ड से शुरू हो और धीरे-धीरे चार वर्ष की
    अवधि में बढ़कर एक अरब पौण्ड पहुंच जाए। 
  6. भविष्य का भुगतान, आर्थिक प्रगति के अनुरूप घटता या बढ़ता रहे।
  7. योजना को तुरन्त लागू किया जाए।

11 अप्रैल, 1924 को आयोग ने इन सिफारिशें को मान लिया। इन सिफारिशें को मंजूरी
देने के लिए, जुलाई-अगस्त में लन्दन में एक सम्मेलन बुलाया गया, जिसमें स्वयं जर्मन
चान्सलर स्टेªस्मैन ने भाग लिया, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। एवं बिना किसी राजनैतिक
दाव-पेंच के डावस योजना को स्वीकार कर लिया गया। एक सितम्बर को यह योजना लागू
कर दी गयी। आधी से अधिक रकम, अमेरिका एवं एक चौथाई रकम ब्रिटेन ने, जर्मनी को कर्ज
के रूप में दी एवं बाकी अन्य देशों ने, इससे राजनैतिक गतिरोध समाप्त हो गया।

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