साधनों के माध्यम से जनमानस को संदेश पहुँचाया जाता है। जन संचार में संदेश मूल स्रोत से समाचार पत्र और पुस्तकों, रेडियो,
टेलीविजन, सिनेमा, इंटरनेट आदि मध्यवर्ती जैसे माध्यमों के द्वारा विस्तृत
एवं जनमानस या ग्रहणकर्ताओं तक प्रेषित किया जाता है।
उपयोग द्वारा अधिकांश और विभिन्न प्रकार के श्रोताओं को सूचना, विचार
और दृष्टिकोण का जनसंचार करना है।’’
जनसंचार के कार्य
विकसित किया है। जहां संचार समाज की मानसिक अवस्था, वैचारिक चिंतन की प्रवृत्ति, संस्कृति तथा जीवन
को विभिन्न दिशाओं को नियंत्रित करने में अपनी महती भूमिका निभाता है वहीं वह व्यक्ति को समाज के साथ
जोड़ता भी है।
है। प्रत्येक दिन समाचार-पत्र, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर आदि माध्यमों द्वारा समाज की विविध
घटनाओं, आपात परिस्थितियों, त्रासदी घटनाओं, नवीनतम खोजों, वैज्ञानिक प्रगति, सामाजिक उन्नति,
राजनीतिक स्थितियों आदि सूचनाओं से समाज को परिचित कराता है।
और व्यक्तियों के समूह के बीच आपसी सहयोग और साझेदारी के लिए आवश्यक है कि इनके बीच
संचार बना रहे।
बल्कि समाज की प्रत्येक गतिविधि और जीवन-धारा के अनसुलझे प्रश्नों, उनके कारणों तथा परिणामों
के विषय में भी समाज को परिचित कराया जाता है। समाज इस ज्ञान को अर्जित कर अपनी जीवन
की दिशा को तय कर सकता है।
जन-समुदाय का मनोरंजन भी करता है। ये माध्यम विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा मानव जीवन को सरस
बनाते हैं। गीत, संगीत, फिल्म, कविता, नाटक, धारावाहिक, वृत्तचित्र, रूपक, कार्टून आदि के द्वारा
समाज को मनोरंजन के साथ-साथ अनेक संदेश भी संप्रेषित करते हैं।
विचारधाराओं का देश है, उसके बावजूद भी भारत को यदि धर्मनिरपेक्ष देश कहा जाता है तो उसमें
संचार की महती भूमिका भी है। संचार माध्यमों द्वारा अनेक भाषाओं में ऐसे संदेशों का प्रकाशन या
प्रसारण किया जाता है जो समाज को अपने राष्ट्र के प्रति एक होने के लिए प्रेरित करते हैं।
उपलब्धियों को विश्व में प्रचारित-प्रसारित करने के साथ-साथ वह संस्कृति के सभी प्रतिमानों के
विकास के लिए अपना योगदान देता है।
संचार उपर्युक्त कार्यों एवं उद्देश्यों के अतिरिक्त जनमत का निर्माण करने में भी अपनी महती भूमिका
निभाता है। वह समाज की सोच को प्रभावित करता है। वह लोगों को अपनी परंपरा और वर्तमान
के बीच सामंजस्य बिठाने में सहयोग देता है, वह प्रकृति और समाज के बीच भी एक सेतु का कार्य
करता है। यदि संचार न हो तो मनुष्य मृत है।
जनसंचार के माध्यम
1. टेलीविज़न – संचार का सर्वाधिक लोक-प्रचलित दृश्य-श्रव्य माध्यम है दूरदर्शन । यह वर्तमान तकनीकी युग की महत्त्वपूर्ण भेंट है । तस्वीरों को प्रसारित करने की युक्ति सन् 1890 ई. में ज्ञात हो चुकी थी । 1906 में ली.डी. फारेस्ट ने शीशे की नली से बिजली निकालकर नया प्रयोग किया तथा फ्लेमिंग द्वारा वायरलैस टेलीग्राफ को पेटेंट कराया गया । 1908 में कैम्पवेल ने टेलीवजिन के सिद्धान्त को प्रस्तुत किया। 26 जनवरी, सन् 1926 को स्काटलैण्ड के जॉन लोगी वेयर्ड ने इसका सफल प्रदर्शन किया ।
भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के शब्दों में, ‘रेडियो मानव को विज्ञान का एक वरदान है, जो पलभर में हजारों मील दूर बैठे लोगों की आपसी स्थिति से अवगत कराता है और उनमें खुशी की लहर भर देता है । जवरीमल्ल पारेख ने ठीक ही लिखा है कि, ‘‘रेडियो निरक्षरों के लिए भी एक वरदान है । जिसके द्वारा वे सिर्फ सुनकर अधिक से अधिक सूचना, ज्ञान और मनोरंजन हासिल कर लेते हैं ।
रेडियो और ट्रांजिस्टर की कीमत भी बहुत अधिक नहीं होती । इस कारण वह सामान्य जनता के लिए भी कमोबेश सुलभ है । यही कारण है कि टी.वीके व्यापक प्रसार के बावजूद तीसरी दुनियां के देशों में रेडियो का अपना महत्व आज भी कायम है ।
रेडियो का आविष्कार 19वीं शताब्दी में हुआ । वास्तव में रेडियो की कहानी 1815 ई. से शुरू होती है, जब इटली के एक इंजीनियर गुग्लियो मार्कानी ने रेडियो टेलीग्राफी के जरिए पहला संदेश प्रसारित किया । यह संदेश ‘मोर्स कोड’ के रूप में था । रेडियो पर मनुष्य की आवाज पहली बार 1906 में सुनाई दी । यह तब संभव हुआ जब अमेरिका के ली डी फारेस्ट ने प्रयोग के तौर पर एक प्रसारण करने में सफलता प्राप्त की । उसने एक परिष्कृत निर्यात नलिका का आविष्कार किया, जो आने वाले संकेतों को विस्तार देने के लिए थी । डी फारेस्ट ही था, जिसने सर्वप्रथम 1916 में पहला रेडियो समाचार प्रसारित किया । वह समाचार वास्तव में संयुक्त राष्ट्र में राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम की रिपोर्ट थी ।
कुछ किताबें हजारों साल पहले छापी गई थी तथा अभी तक अस्तित्व में हैं । तथा पुस्तकों में उपस्थित विचार काफी लम्बे समय तक चलते हैं । बहुत सी पुस्तकें एक संस्कृति को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुॅंचाती है । पुस्तकें लम्बे समय तक बनी रहती हैं । परन्तु मनुष्य जीवन समाप्त हो जाता है । मार्शल मैकुलहान के अनुसार पुस्तकें मनुष्य के व्यक्तिगत, सुढ़ौल व तर्कपूर्ण विचारों का बढ़ाती है ।
- उपभोक्ता मैगज़ीन
- व्यापार और तकनीकी मैगज़ीन
- व्यवसायिक मैगज़ीन
- शैक्षिक और शोधकर्ता जरनल
उपभोक्ता मैगज़ीन मुख्यत: विज्ञापनों पर आधारित होती है । वे एक निश्चित वर्ग तक पहुंचना चाहते हैं जैसे नर, नारी, बच्चे, बड़े बुजुर्ग व्यक्ति, खेल प्रिय, फिल्मों को पसंद करने वाले, आटोमोबाइल व युवा लोगों तक ।
व्यापार और तकनीकी मैगज़ीन व्यवसायिक जरनल होते हैं जो कि विशेष पाठकों व्यापारियों, व्यवसायों, कारखानों के स्वामियों के लिए होती है । ये इनसे सम्बन्धित विषयों पर जानकारी लिये होती है ।
जनसंपर्क मैगज़ीन संगठनों, सरकारी एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और दूसरे संगठनों के लिए होती है जो कि कर्मचारियों, उपभोक्ताओं, ओपिनियन लीडर के लिए जानकारी लिये होती है ।
शैक्षिक और शोधकर्ता जरनल जानकारी और ज्ञान को फैलाने के लिए होती है । इन मैगज़ीनों में विज्ञापन नहीं होते हैं ।
मैगज़ीन, मीडिया ग्रुप, प्रकाशन संस्था, समाचारपत्रों, छोटी संस्थाओं, संगठनों, व्यापारिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों द्वारा छापी जाती है । मैगज़ीन सरकारी विभागों व राजनैतिक पार्टियों द्वारा भी छापी जाती है ।
मैगज़ीन मुख्यत: साप्ताहिक, पाक्षिक व मासिक छपती है । यह चार महीने बाद व छ: महीने बाद भी छपती है । कुछ मैगज़ीन साल में एक बार छपती हैं। मैगज़ीन सामान्यत: श्त्मंकमते कपहमेजश् की भांति भी हो सकती है और टेलीविजन कार्यक्रमों को प्रदर्शित करने वाली गाइड के रूप में भी हो सकती है । बहुत सी मैगज़ीन ऐसी भी होती हैं जो कि दो विशिष्टता को लिये होती हैं । ये सामान्यत: लगातार छपती हैं और प्रत्येक मैगज़ीन समाज के कुछ विशेष वर्गों के लिए होती है ।
कुछ मैगज़ीन ज्ञान लिए व कुछ मनोरंजन लिये होती हैं । शुरूवाती दौर में मैगज़ीन का आस्तित्व धुंधला था, समाचारपत्र व मैगज़ीन की सीमा में कोई विशेष अन्तर न था ।
प्राचीन काल की मैगज़ीन में Journal des Scarans को लिया जाता है । जो कि पेरिस से 1665 में शुरू हुई थी । इस किताब को छोटा करके लिखा गया था । शीघ्र ही यह स्वयं के विषयों (Material) के साथ आई । उसके पश्चात् “The Tatler” और “The Spectator” इंगलैंड से छापी गयी । यह मैगज़ीन 18वीं शताब्दी में 4-4 महीने के बाद छपी । इन दोनों मैगज़ीन ने अपने विचारों और मनोरंजन को व कुछ समाचारों को छापा ।
अमेरिकी मैगज़ीन General Magazine vkSj Historical Chronicle 1741 में छपी । General Magazine dks Benjamin Franklin ने छापा था और इसके तीन दिन बाद Franklin के प्रतियोगी Andrew Bradford us American Magazine को छापा ।
यह दोनों मैगज़ीन जल्द ही बंद हो गयी । यह दोनों मैगज़ीन लंबे समय तक अपनी सेवाएं इसलिए प्रदान नहीं कर पायी क्योंकि उनकी प्रतियॉं अधिक नहीं बिक रही थी (Limited circulation ) और विज्ञापनों की भी कमी थी । अमेरिका में मैगज़ीन का सुनहरी सफर 19वीं शताब्दी में शुरू हुआ । 1879 में मैगज़ीन बहुत कम कीमत पर बनाई गई ।
इस समय के दूसरे विकास पल्प कागज का सस्ता होना प्रिंटिंग प्रेस का सुधारा रूप, लीनो टाइप की खोज, ओटोमेटिक टाइप-सैटिंग था दूसरे विकासों में चित्रों का पुन: प्रकाशित होना था ।
इसी कारण मैगजीन कम खर्चे पर छापी गई जो कि बहुत आकर्षक थी । सस्ती होने के कारण इसे काफी लोगों तक पहुंचाया गया । इससे जहां मैगजीन की प्रतियां अधिक बिकी (Circulation ) वहीं विज्ञापन भी अधिक आने लगे । उस समय की सबसे सफल मैगजीन अमेरिका की Colliers और Cosmopolitan थी । अधिक तकनीकी योग्यता और अन्य विकास होने के कारण 20वीं सदी की मैगजीन ने अपना रूप बदला, वह कम कीमत लिए, अधिक बिकने वाली, अधिक विज्ञापन लिए और विभिन्न वर्गों के लिए विभिन्न विषयों की प्रधानता लिये हुए थी ।
शुरूआत में, जब वैज्ञानिक अस्तित्व में आई उसे अपना स्थान बनाने के लिए जन माध्यमों से संघर्ष करना पड़ा । जैसे रेडियो, टेलीविजन, फिल्म । परन्तु समाचारपत्र व मैगजीन अपना स्थान बनाने में सफल रहे ।
मैगजीन जनसंचार के विभिन्न माध्यमों में से एक है । मैगजीन की संख्या, सामग्री की प्रकृति, उपयोगिता आदि इसे एक राज्य से दूसरे राज्य तक फैलाया गया । इन मैगजीनों को ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनैतिक आधार पर भी बांटा गया ।
साधारणत: मैगज़ीन जानकारी, विचारधारा और व्यवहार को फैलाने में महत्वपूर्ण रोल अदा करती है । यह जहां हमें जानकारी प्रदान करती है वहीं दूसरी तरफ शिक्षा व मनोरंजन को भी पेश करते हुए पाठकों की रुचि का भी ध्यान रखती है।
