अनुक्रम
गांव में रहने वाले सभी बालिक जिन्हें मत देने का अधिकार है (चाहे वह महिला हो या पुरुष, बुर्जुग हो या युवा) तथा जिनका नाम मतदाता सूची में शामिल है, मिलकर ग्राम सभा बनाते हैं। प्रत्येक नागरिक जो 1 जनवरी को 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है वह मत देने का अधिकारी है।
पंचायती व्यवस्था में ग्राम-सभा का महत्व एवं आवश्यकता
स्थानीय स्वशासन या ग्राम स्वराज को गांव स्तर पर स्थापित करने में पंचायती राज संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका देखी जा रही है। एक मजबूत व सक्रिय ग्रामसभा ही स्थानीय स्वशासन की कल्पना को साकार कर सकती है। नये पंचायती राज के अन्र्तगत अब गांव के विकास की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है। पंचायतें ग्रामीण विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का एक मजबूत माध्यम हैं। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि केवल निर्वाचित सदस्य ही इस जिम्मेदारी को निभायेगें। इसके लिए ग्रामसभा ही एकमात्र ऐसा मंच है जहां लोग पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर स्थानीय विकास से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विचार कर सकते है और सबके विकास की कल्पना को साकार रूप दे सकते हैं। स्थानीय स्वशासन तभी मजबूत होगा जब हमारी ग्रामसभा में गांव के हर वर्ग चाहे दलित हों अथवा जनजाति, महिला हो या फिर गरीब, सबकी समान रूप से भागीदारी हो और जो भी योजनायें बनें वे समान रूप से सबके हितों को ध्यान में रखते हुये बनार्इ जायें तथा ग्राम विकास संबन्धी निर्णयों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी हो। लेकिन इसके लिए गांव के अन्तिम व्यक्ति की सत्ता एवं निर्णय में भागीदारी के लिये ग्रामसभा के प्रत्येक सदस्य को उसके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया जाना अत्यन्त आवश्यक है।
यहां इस बात को समझने की आवश्यकता है कि क्या ग्रामीण समुदाय, चाहे वह महिला है या पुरूष, युवा है या बुर्जुग अपनी इस जिम्मेदारी को समझता है या नहीं। क्या ग्राम विकास संबन्धी योजनाओं के नियोजन एवं क्रियान्वयन में अपनी भागीदारी के प्रति वे जागरूक है? क्या उन्हें मालूम है कि उनकी निष्क्रियता की वजह से कोर्इ सामाजिक न्याय से वंचित रह सकता है? ग्रामीणों की इस अनभिज्ञता के कारण ही गांव के कुछ एक ही प्रभावशील या यूं कहें कि ताकतवर लोगों के द्वारा ही ग्रामीण विकास प्रक्रिया चलार्इ जाती है। जब तक ग्राम सभा का प्रत्येक सदस्य पंचायती राज के अन्तर्गत स्थानीय स्वशासन के महत्व व अपनीे भागीदारी के महत्व को नहीं समझेगा, एवं ग्राम विकास के कार्यों के नियोजन एवं क्रियान्वयन में अपनी सक्रिय भूमिका को नहीं निभायेगा, तब तक एक सशक्त पंचायत या गांधी जी के स्थानीय स्वशासन की बात करना महज एक कल्पना है। स्थानीय स्वशासन रूपी इस वृक्ष की जड़ (ग्रामसभा) को जागरूकता रूपी जल से सींच कर उसे नवजीवन देकर गांधी जी के स्वप्न को साकार किया जा सकता।
73वें संविधान संशोधन अधिनियम के अनुच्छेद 243 (ब) अनुसार ग्राम-सभा गांव की मतदाता सूची में चिन्हित सभी लोगों की संस्था है जो राज्य विधान मंडल के द्वारा ग्रामस्तर पर राज्य के द्वारा लागू कानून के अनुरूप उसके द्वारा प्रदत्त कार्यों का संपादन करेगी। ग्रामसभा के कार्यों की रूपरेखा भी राज्यों के द्वारा स्वयं तय की जाती है। संविधान ने ये सारी जिम्मेदारी राज्यों को दी है। संविधान की सातवीं अनुसूची राज्य की अनुसूची है और पंचायत राज भी इसी के अन्र्तगत परिभाषित है।
ग्रामसभा सदस्यों के अधिकार एवं जिम्मेदारियॉं
ग्राम सभा को पंचायत व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। पंचायत व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में इसकी अहम् भूमिका हो़ती है। मुख्यत: ग्रामसभा का कार्य ग्राम विकास की विभिन्न योजनाओं, विभिन्न कार्यों का सुगमीकरण करना तथा लाभाथ्र्ाी चयन को न्यायपूर्ण बनाना है। देश के विभिन्न राज्यों के अधिनियमों में स्पष्ट रूप से ग्रामसभा के कार्यों केा परिभाषित किया गया है। उनमें यह भी स्पष्ट है कि पंचायत भी ग्रामसभा के विचारों को महत्व देगी। मुख्यत: ग्रामसभा का कार्य ग्रामविकास की विभिन्न योजनाओं, विभिन्न कार्यों का सुगमीकरण करना तथा लाभाथ्र्ाी चयन को न्यायपूर्ण बनाना है। ग्राम पंचायतों की विभिन्न गतिविधियों पर नियन्त्ऱण, मूल्यांकन एवं मार्गदर्शन की दृष्टि से ग्रामसभाओं को 73वें संविधान संशोधन अधिनियम के अन्र्तगत कुछ अधिकार प्रदत्त किये गये हैं। ग्रामसभा के कुछ महत्वपूर्ण कार्य तथा अधिकार हैं –
- ग्रामसभा सदस्य ग्रामसभा की बैठक में पंचायत द्वारा किये जाने वाले विभिन्न कायोर्ं की समीक्षा कर सकते हैं, यही नहीं ग्रामसभा पंचायतों की भविष्य की कार्ययोजना व उसके क्रियान्वयन पर भी टिप्पणी अथवा सुझाव रख सकती है। ग्राम पंचायत द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष की प्रशासनिक और विकास कार्यक्रमों की रिर्पोट का परीक्षण व अनुमोदन करती है।
- पंचायतों के आय व्यय में पारदर्शिता बनाये रखने के लिये ग्रामसभा सदस्य को यह भी अधिकार होता है कि वे निर्धारित समय सीमा के अन्र्तगत पंचायत में जाकर पंचायतों के दस्तावेजों को देख सकते हैं आगामी वित्तीय वर्ष हेतु ग्राम पंचायत द्वारा वार्षिक बजट का परीक्षण अनुमोदन करना भी ग्रामसभा का अधिकार है।
- ग्राम सभा का महत्वपूर्ण कार्य ग्राम विकास प्रक्रिया में स्थार्इ रूप से जुड़े रह कर गांव के विकास व हित के लिये कार्य करना है। ग्राम विकास योजनाओं के नियोजन में लोगों की आवश्यकताओं, उनकी प्राथमिकताओं को महत्व दिलाना तथा उनके क्रियान्वयन में अपना सहयोग देना ग्राम सभा के सदस्यों की प्रथम जिम्मेदारी है।
- ग्रामसभा को यह अधिकार है कि वह ग्रामपंचायत द्वारा किये गये विभिन्न ग्राम विकास कार्यों के संदर्भ में किसी भी तरह के संशय, प्रश्न पूछकर दूर कर सकती है। कौन सा कार्य कब किया गया, कितना कार्य होना बाकी है, कितना पैसा खर्च हुआ, कुल कितना बजट आया था, अगर कार्य पूरा नहीं हुआ तो उसके क्या कारण हैं आदि जानकारी पंचायत से ले सकती है। राश्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना के अन्र्तगत ग्राम सभा को विषेश रूप से सामाजिक आडिट करने की जिम्मेदारी है।
- सामाजिक न्याय व आर्थिक विकास की सभी योजनायें ग्राम पंचायत द्वारा लागू की जायेंगी। अत: विभिन्न ग्राम विकास संम्बन्धी योजनाओं के अन्र्तगत लाभाथ्र्ाी के चयन में ग्रामसभा की एक अभिन्न भूमिका है। प्राथमिकता के आधार पर उचित लाभाथ्र्ाी का चयन कर उसे सामाजिक न्याय दिलाना भी ग्रामसभा का परम दायित्व है।
- नये वर्ष की योजना निर्माण हेतु भी ग्रामसभा अपने सुझााव दे सकती है तथा ग्रामसभा ग्रामपंचायत की नियमित बैठक की भी निगरानी कर सकती है।
- ग्राम विकास के लिये ग्राम सभा के सदस्यों द्वारा श्रमदान करना व धन जुटाने का कार्य भी ग्राम सभा करती है। ग्राम सभा यह भी निगरानी रखती है कि ग्राम पंचायत की बैठक साल में हर महीने नियमित रूप से हो रही हैं या नहीं। साल में दो बार आयोजित होने वाली ग्राम सभा की बैठकों में ग्राम सभा के प्रत्येक सदस्य चाहे वह महिला हो, पुरूष हो, युवक हो बुजुर्ग हो, को भाागीदारी करने का अधिकर है। ग्राम पंचायतों को ग्राम सभा के सुझावों पर ध्यान रखते हुये कार्य करना है।
हमने अक्सर देखा व अनुभव किया है कि ग्राम सभा के सदस्य यानि प्रौढ़ महिला, पुरूष जिन्होने मत देकर अपने प्रतिनिधि को चुना है अपने अधिकार एंव कर्तव्य के प्रति जागरूक नहीं रहते। जानकारी के अभाव में वे ग्राम विकास में अपनी अहम भूमिका होने के बावजूद भागीदारी नहीं कर पाते। एक सशक्त, सक्रिय व चेतनायुक्त ग्राम सभा ही ग्राम पंचायत की सफलता की कुंजी है।
ग्राम सभा की बैठक व कार्यवाही
- ग्राम सभा की बैठकें वर्ष में दो बार होती हैं। एक रबी की फसल के समय (मर्इ-जून) दूसरी खरीफ की फसल के वक्त (नवम्बर-दिसम्बर)। इसके अलावा अगर ग्राम सभा के सदस्य लिखित नोटिस द्वारा आवश्यक बैठक की मांग करते हैं तो प्रधान को ग्राम सभा की बैठक बुलानी पड़ती है।
- ग्राम सभा की बैठक में कुल सदस्य संख्या का 1/5 भाग होना जरूरी है अगर कोरम के अभाव में निरस्त हो जाती है तो अगली बैठक में कोरम की आवश्यकता नहीं होगी।
- इस बैठक में ग्राम सभा के सदस्य, पंचायत सदस्य, पंचायत सचिव, खण्ड विकास अधिकारी व विभागों से जुड़े अधिकारी भाग लेंगे।
- बैठक ऐसे स्थान पर बुलार्इ जानी चाहिये जहां अधिक से अधिक लोग विशेषकर महिलाएं भागीदारी कर सकें।
- ग्राम सभा की बैठक का एजेण्डे की सूचना कम से कम 15 दिन पूर्व सभी को दी जानी चाहिये व इसकी सूचना सार्वजनिक स्थानों पर लिखित व डुगडुगी बजवाकर देनी चाहिये।
- सुविधा के लिये अप्रैल 31 मार्च तक के एक वर्ष को एक वित्तीय वर्ष माना गया है। ग्राम प्रधान पिछले वर्ष की कार्य वाही सबके सामने रखेगी। उस पर विचार होगा, पुष्टि होने पर प्रधान हस्ताक्षर करेगा।
- पिछली बैठक के बाद का हिसाब तथा ग्राम पंचायत के खातों का विवरण सभा को दिया जायेगा। पिछले वर्ष के ग्राम विकास के कार्यक्रम तथा आने वाले वर्ष के विकास कार्यक्रमों के प्रस्ताव अन्य कोर्इ जरूरी विषय हो तो उस पर विचार किया जायेगा।
- ग्राम सभा का यह कर्तव्य है कि वह ग्राम सभा की बैठकों में उन्हीं योजनाओं व कार्यक्रमों के प्रस्ताव लाये जिनकी गांव में अत्यधिक आवश्यकता है व जिससे अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सकता है।
- जब ग्राम सभा में एक से अधिक गांव होते हैं तो खुली बैठक में प्रस्ताव पारित करने पर बहस के समय काफी हल्ला होता है। सबसे अच्छा यह रहेगा कि हर गांव ग्राम सभा की हाने वाली बैठक से पूर्व ही अपने अपने गांव के लोगों की एक बैठक कर ग्राम सभा की बैठक में रखे जाने वाले कार्यक्रमों पर चर्चा कर लें व सर्व-सहमति से प्राथमिकता के आधार पर कार्यक्रमों को सूचिबद्व कर प्रस्ताव बना लें और बैठक के दिन प्रस्तावित करें।
ग्राम सभा सदस्यों की भागीदारी बढ़ाने हेतु कुछ कदम
- ग्रामसभा के हर सदस्य की बैठक में भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिये गांव के सार्वजनिक स्थलों, छानियों, (पशुशाला) प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, ग्रामीण सूचना केन्द्र, पंचायत चौक, पंधेरों, विद्यालयों आदि में बैठक की सूचना चिपकाना चाहिए।
- गांव के सम्पूर्ण विकास के लिये महिला की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है जितनी कि पुरूष की। अत: महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु घर के पुरूषों केा संवेदनीकरण (समझाना) करना जरूरी है। बैठक का समय भी ऐसा रखना चाहिये कि उनकी ज्यादा से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
- बैठक से पूर्व प्रभात फेरी के माध्यम से ग्रामसभा सदस्यों को बैठक की सूचना देंना तथा बैठक में भागीदारी के प्रति उन्हें जागरूक करना चाहिए।
- ग्राम सभा की बैठक ऐसे स्थान पर हो जहां आने में सुविधा हो और गांव के सभी लोग आ सकें।
- ग्रामसभा की बैठक के महत्व के प्रति जागरूकता हेतु पदयात्रा अथवा अभियान चलाना व निरन्तर सूचना का प्रसार करना चाहिए। इस अभियान में गांव के सेवामुक्त शिक्षक, सरकारी कर्मचारियों को भी जोड़ना एक महत्वपूर्ण कार्य हो सकता है। बच्चों के माध्यम से ग्रामसभा बैठक पर नाटक/नुक्कड़ करवाकर आदर्श और निष्क्रिय ग्रामसभा के महत्व एवं हानि का बोध कराना चाहिए।
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सक्रिय ग्राम सभा और निष्क्रिय ग्राम सभा
| सक्रिय ग्राम सभा | निष्क्रिय ग्राम सभा |
|---|---|
| सक्रिय ग्राम सभा के सदस्य ग्राम सभा की बैठक के महत्व को समझते हैं व सक्रिय रूप से भागीदारी निभाते हैं। |
निष्क्रिय ग्राम सभा के सदस्य ग्रामसभा की बैठक के महत्व को न समझते हुए बैठक मं े भागीदारी ही नहीं करते हैं। |
| बैठक में सिर्फ उपस्थित ही नहीं रहते हैं अपितु निर्णय लेने में भागीदारी भी निभाते हैं साथ ही बैठक में लिये जा रहे अनुचित निर्णयों पर आवाज उठाते हैं |
बैठक में सिर्फ उपस्थित रहते हैं। और चुपचाप रह कर लिए जा रहे निर्णयों पर अपना वक्तव्य तक नहीें देते हैं। बैठक में लिये जा रहे अनुचित निर्णयों पर कोर्इ प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करते। |
| बैठक में भागीदारी के लिये अन्य सदस्यों को भी प्रेरित करते हैं |
स्वयं ही बैठक में नहीं जाते हैं यदि जाते हैं तो अन्य लोगों को प्रेरित नहीं करते। |
| बैठक शुरू होने से पहले गांव में चर्चा के द्वारा बैठक का माहोल बनाते हैं तथा बैठक में रखे जाने वाल प्रस्ताव पर भी पूरी तैयारी के साथ आते हैं। |
बैठक के बारे में कोर्इ रूचि नहीं दिखाते हैं ना ही इन्हें बैठक में उठाये जाने वाले किसी प्रस्ताव या मुद्दे पर कोर्इ चर्चा करते हैं। |
| सक्रिय ग्राम सभा के सदस्य गांव में हो रहे विकास कार्यक्रमों की निगरानी करते हैं साथ ही ग्राम सभा की बैठक में इन कार्यों पर हो रहे व्यय पर भी प्रश्न पूछते हैं। |
निष्क्रिय ग्राम सभा के सदस्यों को विकास कार्यक्रमों की निगरानी व उससे सम्बन्धित प्रश्न पूछने में कोर्इ रूचि नहीं होती है। |
ग्रामसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना
ग्रामसभा में महिलाओं व उपेक्षित वर्ग की भागीदारी बढा़ने हेतु संभावित प्रयास
- ग्रामसभा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिये गणपूर्ति में उनकी उपस्थिति को न्यूनतम तय किया जाना चाहिये। महिलाओं, कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों को ग्रामसभा की बैठक में जाने और अपने व्यक्तिगत ही नहीं गांव से जुड़े सामूहिक हित संबन्धी मुददों पर अपनी आवाज उठाने हेतु प्रेरित एवं प्रशिक्षित करना चाहिए।
- गांव के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में महिलाओं की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है जितनी कि पुरूषों की, उनकी भागीदारी को प्राय: घर के पुरूषों के द्वारा अनदेखा किया जाता है। ग्रामसभा की बैठक में उनकी भागीदारी के महत्व के प्रति जागरूकता लाने के लिये घर के पुरूषों का संवेदनीकरण किया जाना जरूरी है।
- पर्वतीय क्षेत्रों में महिलायें कृषि एवं घर के कार्यों के साथ-साथ इंर्ध् ान एवं चारा लाने के लिये प्राय: घर से बाहर रहती हैं । अत: बैठक का समय उनकी सुविधानुसार अवश्य ही रखा जाना चाहिये ताकि उनमें महिलायें अधिक से अधिक भाग ले सकें।
- ग्राम सभा की बैठक से पूर्व वार्ड स्तर पर महिलाओं की अलग से बैठक का आयोजन कर उन्हें ग्राम सभा की बैठक में उठाये जाने वाले मुद्दों पर प्रशिक्षित करना चाहिए। इस हेतु गांव के जागरूक व्यिक्यों एवं ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों का संवेदनीकरण करना चाहिए ताकि वे स्वयं गांव की महिलाओं व उपेक्षित वर्ग को ग्राम सभा के लिए तैयार व प्रेरित कर सकें।
- महिलाओं पर अकसर कार्य का बोझ अधिक रहता है अत: महिलाओं को बैठक के महत्व पर जागरूक करते हुए यह सलाह देना कि वे चारा, इंर्ध् ान को बैठक होने के पहले दिन ही जमा कर लें ताकि बैठक के लिए समय निकाल सकें।
- निर्बल वर्ग व महिलाओं के संकोच, भय व झिझक को कम करना तथा विचारों के आदान-प्रदान के कौशल को बढ़ानें के प्रयत्न करना चाहिए, ताकि वे अपनी बात को नि:संकोच बैठक में कह सकें।
- गांव की किसी एक जागरूक महिला को महिला प्रेरक के रूप में विकसित कर, आवश्यक प्रशिक्षण द्वारा उसका ज्ञानवर्धन करना चाहिए ताकि वह गांव की अन्य महिलाओं को भी ग्रामसभा की बैठक में भागीदारी व उसमें लिये जाने वाले निर्णयों के प्रति जागरूक कर सके। ग्रामसभा की बैठक में महिला प्रेरक की उपस्थिति में गांव की महिलायें अपने विचार रखने में संकोच नहीं करेंगी । साथ ही यह ध्यान रखा जाना आवष्यक है कि कोर्इ भी उन्हें अपने विचार रखते समय हतोत्साहित न कर सके।
पंचायत प्रतिनिधियों की ग्रामसभा के प्रति जवाबदेही
- ग्रामविकास सम्बन्धी जो भी योजना गांव में आये, उसकी सारी जानकारी (बजट व कार्यक्रम को लेकर) पंचायत के सूचना पट पर लग जानी चाहिये ताकि गांव के सभी लोगों को इसका पता चल सके।
- गांव के लिये जब योजना बने तो ग्रामसभा के सभी सदस्यों के साथ विचार विमर्श के बाद बने। सबकी निर्णय लेने में भागीदारी ली जाये ।
- ग्रामसभा के सदस्यों को बैठक की सूचना समय पर देना तथा सूचना को सार्वजनिक स्थान पर लगाना ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है।
- ग्रामसभा जो प्रस्ताव बनाये अथवा निर्णय ले, पंचायत प्रतिनिधियों को उसे सम्मान देना होगा।
- ग्राम विकास योजना के अन्तर्गत अगर लाभाथ्र्ाी का चयन करना है तो सब सदस्यों के सामने, प्राथमिकता के आधार पर तथा सर्वसम्मति से हो।
- पंचायत प्रतिनिधियों को चाहिये कि निर्णय प्रक्रिया में मुठठ्ी भर ताकतवर या प्रभावशाली लोगों को नहीं अपितु ग्रामसभा के प्रत्येक सदस्य को शामिल करें। भागीदारी निभाने हेतु उन्हें प्रेरित करने के लिये स्वयं आगे आयें, तभी दोनों सच्चे अर्थों में एक दूसरे के पूरक बनेंगे।