ऊर्जा संरक्षण के उपाय

हमें ज्ञात है कि पारिस्थितिक तंत्र एवं जीवधारियों के जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिये ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा हमें मुख्यत: सूर्य से प्राप्त होती हैं। पौधे सौर ऊर्जा का उपयोग करके इसे अन्य रूपों में पौधों के शरीर एवं जीवाश्मीय र्इधनों में संचित करते हैं। हमें विभिन्न कार्यो के संपादन हेतु ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। चूँकि नगरीकरण एवं औद्योगिकीकरण की गति काफी तेज हो चुकी है। अत: ऊर्जा के संसाधन की मांग भी बढ़ती जा रही है, और मानव ऊर्जा प्राप्त करने के लिये विभिन्न प्रकार की र्इंधन सामग्रियों का उपयोग करता जा रहा है ।

ऊर्जा प्राप्ति के अनेक स्त्रोत हैं, जैसे कोयला, पेट्रोलियम, सौर ऊर्जा, आण्विक ऊर्जा तथा प्राकृतिक गैसें इनमे प्रमुख हैं। इन स्त्रोतों से प्राप्त ऊर्जा का घरेलू उपयोग उद्योगों तथा कृषि क्षेत्रों में लाया जाता है ।

वर्तमान में भारत की लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा की आवश्यकता जलाये जाने वाली लकड़ी, कृषि अपशिष्टों, जन्तु शक्ति द्वारा पूरी की जाती है। बाकी की 60 प्रतिशत ऊर्जा की आवश्यकता औद्योगिक ऊर्जा है जिसमें से लगभग 30 प्रतिशत बिजली से पूरी होती है। बिजली के रूप में ऊर्जा का उत्पादन तापीय ऊर्जा तथा आण्विक ऊर्जा के रूप में होता है। सम्पूर्ण विश्व में लगभग 45 प्रतिशत ऊर्जा कोयले से 40 प्रतिशत पेट्रोलियम से, प्राकृतिक गैसों (Natural Gases) से, लगभग 15 प्रतिशत, जल विद्युत, ताप विद्युत तथा आण्विक शक्ति के रूप में होती है।

ऊर्जा संरक्षण

ऊर्जा संसाधन के प्रकार 

  1. मानव की शारीरिक शक्ति, 
  2. पशु शक्ति
  3. पवन, 
  4. प्रवाही जल,
  5. ज्वार भाटे की शक्ति, 
  6. सौर्य शक्ति,
  7. र्इधनों से प्राप्त शक्ति, जिनमें लकड़ी का कोयला, खानों से प्राप्त कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और आण्विक र्इंधन हैं ।

वर्तमान काल में औद्योगिक शक्ति (ऊर्जा) के पॉच साधन हैं :- 

  1. कोयला, 
  2. खनिज तेल (पेट्रोलियम)
  3. प्राकृतिक गैस 
  4. बहता हुआ जल और
  5. आण्विक र्इंधन ।

उपरोक्त सभी ऊर्जा संसाधन के दो वर्गों में रखा गया है – 

  1. अनवीनकृत संसाधन- इनका नवीनीकरण संभव नहीं होता । उदाहरण – कोयला, खनिज तेल, आण्विक र्इंधन, प्राकृतिक गैस । 
  2. नवीनीकृत संसाधन – इनका नवीनीकरण किया जा सकता है । उदाहरण – लकड़ी । 
प्रमुख र्इधन –
  1. जीवाश्मीय र्इंधन एवं ऊर्जा । 
  2. लकड़ी । 
  3. प्राकृतिक गैस । 
  4. परमाणु र्इंधन ।
  5. ऊर्जा (र्इंधन) के वैकल्पिक स्त्रोत । 

ऊर्जा संरक्षण क्यो ? 

ऊर्जा संरक्षण का अर्थ है समान गतिविधियों के स्तर के लिये अपेक्षाकृत कम ऊर्जा का उपयोग करना।
आइये एक उदाहरण द्वारा समझने का प्रयास करें। माना कि आप दोपहर के भोजन के लिये दाल बनाना चाहते हैं। इसको करने की दो विधियां हैं- आप दाल को ढक्कनदार साधारण बर्तन में पका सकते हैं या फिर पे्रशर कुकर प्रयोग कर सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि दोनो ही अवस्थाओं में दाल वही रहेगी। प्रेशर कुकर के प्रयोग से आप दाल पकाने में समय व ऊर्जा दोनों की बचत करेंगे। यदि हम एक कदम और आगे बढ़े और कहें कि हम न केवल दाल बल्कि चावल व आलू भी पकाना चाहते हैं, तो पकाने का एक तरीका होगा कि आप तीनों को अलग-अलग पका लें, जिसके फलस्वरूप स्टोव को तीन बार प्रयोग करना होगा। दूसरा तरीका प्रेशर कुकर में अलग-अलग डिब्बों का प्रयोग करके तीनों को एक ही साथ पका लिया जाये। प्रेशर कुकर के प्रयोग का क्या फायदा हैं ? या तीनों वस्तुओं का एक साथ पकाने का क्या फायदा है ? आप ऊर्जा का संरक्षण कर रहे है, अर्थात आप एक ही परिणाम प्राप्त करने के लिये कम ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

अब प्रश्न उठता है कि हमें ऊर्जा का संरक्षण क्यों करना चाहिये ? आखिर हमें हर प्रकार की ऊर्जा हर क्षण सुगमता से उपलब्ध है। ऊर्जा का संरक्षण हमें कर्इ कारणों से करना पड़ता है। इनका उल्लेख नीचे किया गया है।

(1) जब मांग आपूिर्त से अधिक हो 

बढ़ती हुर्इ जनसंख्या, औघोगिकरण, सड़कों पर यातायात और घर, ऑफिस व खेत में स्वचलित यंत्रों के कारण ऊर्जा की मॉग बढ़ रही है। आपने स्वयं भी देखा होगा कि लगातार बढ़ती जनसंख्या से ऊर्जा की मांग बढ़ती जा रही है। बढ़ती जनसंख्या के लिये रहने के लिये घर भी अधिक चाहिये। इससे पेड़ो के कटने की रफ्तार भी बढ़ती जा रही है ताकि फर्नीचर व घर बनाने के लिये लकड़ी प्राप्त हो सके। अधिक लोगों के लिये अधिक कोयला, मिट्टी का तेल और गैस की भी आवश्यकता होगी ताकि अधिक लोगों के लिये खाना पकाया जा सके। आज अधिक लोगों को अपने घर में प्रकाश करने के लिये अधिक बिजली की आवश्यकता है। अपने कूलरों व गीजरो को चलाने के लिये, वांशिंग मशीन व कम्प्यूटर आदि चलाने के लिये उन्हें बिजली की आवश्यकता है जिसका परिणाम अधिक बिजली की खपत और अधिक बिजली की कटौती है। आप ऊर्जा की मांग और आपूर्ति के बीच की खार्इ को पाटने के लिये कौन से कदम उठाने चाहेंगे ?

  1. आपूर्ति बढ़ाकर 
  2. मांग को घटाकर 

चूंकि ऊर्जा की आपूर्ति सीमित है अत: हमारे पास एक विकल्प रह जाता है अर्थात् ऊर्जा की मांग को कम करना। हम ऐसा किस प्रकार कर सकते है ?

(2) ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है 

आप सब बैंक से परिचित हैं- जितना भी धन आप बचा पाते हैं, उसे आप बैंक में डाल देते हैं और कुछ समय पश्चात आप अपनी बचत की वृद्धि होते देख सकते हैं। यदि आप जमा किये पैसे से अधिक पैसा निकाल लेते हैं, तब जल्दी ही आपका पैसा खत्म हो जायेगा और आपको पैसे की तंगी झेलनी पड़ेगी।

अब कल्पना कीजिये कि एक ऊर्जा बैंक है। जो ऊर्जा आप अपने दैनिक क्रियाकलापों से बचाते हैं वह इस ऊर्जा बैंक में जमा होती है ताकि आप भविष्य में इसे प्रयोग कर सकें। जैसे-जैसे आपकी ऊर्जा की बचत बढ़ने लगती है, अधिक ऊर्जा के उत्पादन का दबाव कम होता जायेगा। इसी प्रकार जो ऊर्जा आप बचाते हैं इसका कहीं अन्यत्र उपयोग नही किया जा सकता है, उदाहरण के लिये आप परिवार में दिन के समय विवाह समारोह का आयोजन करना चाहते हैं जिसमें कम सजावटी प्रकाशकी आवश्यकता है तब, जो बिजली आप बचा पाते हैं, उससे शहर में बिजली की कटौती कुछ कम हो जायेगी।

आज प्रत्येक व्यक्ति का उद्देश्य होना चाहिये।

(3) र्इंधन सीमित हैं 

र्इंधन ऊर्जा का सबसे सामान्य स्त्रोत हैं और आप पहले ही जान चुके हैं कि कोयले,गैस और तेल के सीमित भंडार हैं। नीचे दिये चार्ट पर नजर डालने से आपको ज्ञात होगा कि आने वाले वर्षो में र्इंधन की उपलब्धता के संदर्भ में हम कहां है :-

ऊर्जा संरक्षण के उपाय

अब तक आप इस तथ्य को समझ गये होंगे कि अपने जीवन में ही हम इनमें से कुछ ऊर्जा स्त्रोंतों के सूखने की संभावन से जूझ रहे हैं। ऊर्जा के संरक्षण को आम व्यवहार में लाया जाना चाहिये। प्रत्येक को एकजुट होकर सामूहिक रूप से ऊर्जा का संरक्षण करना चाहिये। हममें से प्रत्येक को सोचना होगा, क्या मैं इसके लिये कुछ कर सकता हॅू । हॉं, ऐसे कर्इ तरीके हैं जिनसे हम ऊर्जा संरक्षण में अपनी भागीदारी कर सकते हैं। आइये देखें, ऐसा हम किस प्रकार कर सकते हैं। ऊर्जा का संरक्षण मुख्य रूप से हो सकता है-

  1. घर पर 
  2. खेत या कार्य क्षेत्र पर 
  3. सड़क पर 

(1) घर पर ऊर्जा संरक्षण 

अपने बिजली के बिल पर एक नजर डालें। इसको इतना अधिक नहीं होना चाहिये। आपकी जरा सी सावधानी व देखभाल से यह काम हो सकता है । कैसे –

  1. कमरे से निकलते समय पंखा व बती बंद कर दें? 
  2. ज्यादा बिजली खर्च करने वाले बल्बों के स्थान पर ऊर्जा बचाने वाली ट्यूब लाइट लगायें। – याद रखें, एक 40 वाट की ट्यूब लाइट 100 वाट के बल्ब से दुगुना प्रकाश देती है। इसका अर्थ है अधिक प्रकाश के अलावा 60: बिजली की बचत। 
  3. ट्यूब लाइटों की परम्परागत चोक के स्थान पर इलेक्ट्रानिक चोक लगायें। वे एक तिहार्इ ऊर्जा की खपत करती है।
  4. बतियों और बिजली के उपकरणों को स्वच्छ व धूल रहित रखें। 
  5. अपनी जरूरत के अनुसार प्रकाश कम करने वाले स्विचों का प्रयोग करें । 
  6. दीवारों पर हल्कें रंगों का प्रयोग करें। इससे प्रकाश की आवश्यकता में 40: तक की कटौती करने में सहायता मिलती है। 
  7. पुराने पंखे के रेगुलेटरों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटरों का प्रयोग करें। 
  8. अपनी पारिवारिक जरूरत के हिसाब से ही फ्रिज का आकार रखें। 
  9. बिजली बचाने के लिये ओवन, हेयर ड्रायर और वेक्यूम क्लीनर का कम प्रयोग करें। 
  10. बिना ISI चिन्ह वाले उपकरण प्रयोग न करें। वे सस्ते अवश्य होते हैं परंतु गुणवताविहीन होने से व पुर्जों के प्रभावहीन होने से वे अधिक बिजली खर्च करते है। आर्इ.एस.आर्इ. आपको बिजली बचाने में सहायक होता है 

र्इंधन के बिल में कटौती करने के लिये आप कर्इ साधारण तरीके अपना सकते हैं। आप में से जो लोग एल.पी.जी. या गैस सिलेन्डर घर पर खाना पकाने के लिये प्रयोग करते हैं वे पहले से ही जानते हैं कि गैस की कीमतें हाल हीं में काफी बढ़ी हैं। मिट्टी के तेल का मूल्य भी काफी बढ़ चुका है। अत: अपने र्इधन के बिल में कटौती के लिये हम क्या कर सकते हैं ? यहां हम आपको इस विषय की कुछ छोटी-छोटी जानकारी दे रहे हैं।

  1. आर्इ.एस.आर्इ. (ISI) चिन्ह वाले गैस के चूल्हे ही प्रयोंग करें। 
  2. परम्परागत लकड़ी के चूल्हों के स्थान पर उन्नत धुँआ रहित चूल्हों का प्रयोग करें। जो सरकार द्वारा विकसित किये गये हैं । ये 20-25 % अधिक तापदक्ष होते हैं। 
  3. जहां तक संभव हो सके, सौर चूल्हों का उपयोग करें । सौर ऊर्जा मुफ्त है और काफी मात्रा में उपलब्ध है।
  4. खुले बर्तनों में खाना न पकाएं। प्रेशर कुकर का प्रयोग करके र्इंधन में कटौती करें। 
  5. एक ही समय पर एक से अधिक पकवानों को पकाने क लिये प्रेशर कुकर के सेपरेटर या डिब्बे प्रयोग करें। 
  6. तांबे के तले वाले या सैन्डविच तले वाले बर्तनों का प्रयोग करें जो अधिक ताप संवेदनशील होते हैं।
  7. वाशिंग मशीन पर आवश्यकता से अधिक बोझ न डालें। 
  8. नहाने क लिये बाल्टी में गर्म पानी लें न कि गीजर का फव्वारा प्रयोग करें। 
  9. वातानूकुलन यंत्र को निर्धारित समय के एक घंटे बाद चालू करें और एक घंटे पहले बंद कर दें ।
  10. इस्त्री करते समय सुनिश्चित करें कि आपने सभी कपड़े इकठ्ठे कर लिये हैं। 
  11. बर्तन को गैस पर रखने के बाद ही गैस जलाएं और गैस को बर्तन उतारने से पहले ही बंद कर दें।
  12. गैस के चूल्हे के छिद्रों को साफ रखें और धूल व तेल रहित रखें। 
  13. छोटे बर्तनों के लिये छोटा चूल्हा ही प्रयोग करें। 
  14. रात को गैस के सिलेंडर के रेग्यूलेटर स्विच को भी बंद कर दें। 
  15. जैसे ही भोजन पक जाय तुरंत ही उसे परोस दें ताकि उसे दुबारा गर्म न करना पड़े। 

ऊपर दी गर्इ कुछ छोटी-मोटी जानकारियां घर पर अत्यधिक बिजली और र्इंधन के प्रयोग को कम करने के लिये दी गयी हैं। इन से आप बिजली के बिल में काफी कटौती होगी और आपकी सुविधा व आराम में भी कोर्इ फर्क नहीं पड़ेगा।

(2) खेत व कार्य स्थल पर 

खेतों पर किसान आजकल खेती की मशीनों जैसे ट्रेक्टर, थे्रशर, पम्प आदि को अधिकाधिक प्रयोग कर रहे हैं। अत: किसानों द्वारा भी ऊर्जा संरक्षण के प्रयास किये जाने चाहिये, जिसका अर्थ है कि कम से कम ऊर्जा के उपयोग से अधिक से अधिक कार्य करना चाहिये। आइये देखें कैसे-

  1. अपने टै्रक्टरों की देखभाल भली प्रकार करें। खराब रखरखाव से 25 प्रतिशत डीजल की क्षति होती है। 
  2. डीजल के रिसाव को रोकें। 
  3. जब टै्रक्टर का प्रयोग न हो रहा हो उसके इंजन को बंद कर दें। 
  4. टै्रक्टर को उचित गीयर पर ही चलाएं। 
  5. हवा की छन्नी को साफ रखें जिससे इंजन को क्षति ने पहुँचे । 
  6. पुराने टायरों को बदल दें। 
  7. खेतों में टै्रक्टर के प्रयोग की उचित योजना बनाएं। चौड़ार्इ की अपेक्षा लम्बार्इ दिशा में खुदार्इ करने से डीजल की बचत होती है। 
  8. पेट्रोल व सी.एन.जी. बचाने के कुछ ऐसे तरीके उपयोग में लायें- 
    1. धीमी व स्थिर गति से गाड़ी चलाएं। 
    2. क्लच व बे्रक के प्रयोग को कम करें 
    3. टायरों में हवा के उचित दाब को बनाये रखें। 
    4. हर कीमत पर र्इंधन के रिसाव को रोकें। 
    5. इंजन को सही दशा में रखें। 
  9. गली में प्रकाश के लिये प्रकाश संवेदी स्विच लगाने के लिये प्रोत्साहन दें व सौर पटल लगाएं।
  10. विज्ञापनों के लिये निऑन प्रकाश को प्रोत्साहन न दें। इनके स्थान पर सौर पटल का उपयोग करें जो सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देते हैं और रात में निऑन बत्तियों को प्रकाशित करते हैं। 

भविष्य में ऊर्जा के विकल्प 

1. बायोगैस 

बायागैस हवा की अनुपस्थिति में, जानवरों के गोबर का एक किण्वित उत्पाद है। इसमें मुख्यत: मीथेन गैस होती है जिसकों खाना पकाने के लिये और घर को प्रकाशित करने के लिये सुरक्षित ढंग से प्रयोग किया जाता हैं । साधारणतया, एक छोटा बायोगैस संयंत्र जिसमें दो या तीन जानवरों का गोबर डाला जाता है, एक चार व्यक्तियों के परिवार का खाना बनाने व प्रकाश व्यवस्था के लिये पर्याप्त है। इसके अतिरिक्त, बायोगैस को पानी निकालने के लिये या कम क्षमता वाली छोटी मोटर को चलाने के लिये प्रयोग किया जा सकता है। बायोगैस के कुछ अन्य लाभ इस प्रकार हैं-

  1. बचा हुआ गंदा गोबर एक अच्छी खाद है जो सब्जियों व फसलों की पैदावार बढ़ाता है। 
  2. यह घर के आस पास का वातावरण स्वच्छ रखता है क्योंकि आस पास का सारा गोबर गैस संयंत्र में डाल दिया जाता है। 
  3. यह लकड़ी जलने से होने वाली बीमारियों से आंखों और फेफड़ों को बचाता है। 
  4. यह जंगलों को संरक्षित रखता है क्योंकि लकड़ी को र्इंधन के लिए नहीं जलाया जाता। 
  5. मजदूरों और मिस्त्रियों को बायोगैस संयंत्र लगने से रोजगार के साधन उपलब्ध होते हैं। 

 2. सौर ऊर्जा 

सौर ऊर्जा मुफ्त में उपलब्ध है और पूर्णरूपेण प्रदूषण मुक्त है। सदियों से यह मानवता को उपलब्ध है परंतु अभी हाल ही में इस ऊर्जा का प्रभावशाली ढंग से प्रयोग करने के लिये तकनीकी विकास हुआ है। आज सौर ऊर्जा को जिन विधियों से उपयोग किया जा रहा है, वे निम्न है-

  1. सौर कुकर :- यह एक उथला, वर्गाकार बक्सा होता है जिसके किनारे व तला काले रंग के होते हैं और ऊपर का ढक्कन कांच से बना होता है। जब कांच के ढक्कन से होता हुआ प्रकाश काले तल से टकराता है तब यह गर्म हो जाता है। जब खाना इस बक्से के अन्दर रखा जाता है, तब इस गर्मी से यह पक जाता है। सौर कुकर के उपयोग के कुछ फायदे हैं। र्इंधन की कीमत कम हो जाती है। इसके नियमित प्रयोग से प्रतिदिन 2 कि0 जलाने वाले र्इंधन की बचत होती है। यह प्रयोग के लिये पूर्णतया सुरक्षित है क्योकि इसमें न तो आग है न रिसने वाली गैस और न ही बिजली के झटके हैं। इसे लगातार विशेष ध्यान देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक समय में इसमें चार चीजें बनार्इ जा सकती है। इसक उपयोग बहुत सरल है। अपने परिवार का खाना पकाने के लिये सौर कुकर का उपयोग करें। 
  2. सौर प्रकाश- सौर पटल पर कोशिकाओं की सहायता से साधारण दिन के प्रकाश को विद्युत उर्जा में बदला जा सकता है। ये सौर कोशिकाएं अपने उपर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश के अनुरूप विद्युत उत्पादन करती है। जब इन कोशिकाओं के साथ रासायनिक भंडरण बैटेरी का उपयोग किया जाता है तब धूप वाले दिनों में जो अतिरिक्त उर्जा उत्पन्न होती है उसका संग्रह दिनों के लिये किया जाता है। सौर कोशिकाओं को निम्न को प्रकाशित करने के लिये किया जाता है। 
    1. गलियों की 
    2. घरों को 
    3. विज्ञापन हेतु नियॉन प्रकाश में 
  3. सौर ताप- आज सूर्य की ताप उर्जा को विभिन्न तरीकों से प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग होता है- 
    1. घरों में नहाने का पानी गर्म करने के लिये। 
    2. घरों, होटलों व होस्टलों में केन्द्रीकृत ताप प्रणाली के लिये। 
    3. खारे पानी को पीने योग्य बनाने के लिये। 
    4. भवन निर्माण की लकड़ी, अनाज तथा मछली को सौर भट्टी में सुखाने के लिये। 
    5. छोटे व विशेष डिजाइन के फ्रिजों में रेफ्रिजरेशन के लिये। ये फ्रिज जीवन रक्षक दवाओं को कम ताप पर रखे जाने कि लिये और दूध, फल व सब्जियों जैसे नष्ट होने वाले कृषि उत्पादों को संरक्षित करने के लिये उपयोगी है। 

(3) जल उर्जा 

निश्चित रूप से आप सभी ने हमारे देश के भाखड़ा नांगल परियोजना या दामोदर घाटी जैसी बड़ी जलविद्युत परियोजना के विषय में आवश्य सुना होगा। ये बहुत बड़ी परियोजनाएं हैं, जिन्हें करोड़ों रूपये की लागत से बनाया गया है और से बहुत अधिक मात्रा में विद्युत का उत्पादन करती हैं। बिजली की बढ़ी हुर्इ मांग को देखते हुये ऐसी अन्य परियोजनाओं को लगाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। लेकिन चूंकि बड़ी नदियों के अधिकांश किनारों पर इस तरह की परियोजनाएं पहले ही लगायाी जा चुकी हैं अत: नयी बड़ी परियोजनाओं के लिये अब कोर्इ गुजाइश बाकी नहीं है। ऐसी हालत में विकल्प क्या है? अब हमें कुछ नये तरीके अपनाकर सूक्ष्म जल परियोजनाएं लगानी होंगी ? 
ऐसा समझा जाता है कि बहुत अधिक उंचार्इ से गिरता हुआ कम मात्रा का पानी लगभग उतनी ही बिजली पैदा कर सकता है जितना कम उंचार्इ से गिरता हुआ अधिक मात्रा में पानी। अत: छोटी नदियों को सूक्ष्म जल परियोजनाओं के लिये उपयोग किया जा सकता हैं। ऐसी सूक्ष्म परियोजनाओं को लगाने के निम्न लाभ है- 
  1. इनकी स्थापना के लिये अधिक निवेश की आवश्यकता नहीं पड़ती। 
  2. इनका रखरखाव अपेक्षाकृत रूप से सरल है। 
  3. इनको भौगालिक दृष्टि से उन दूर दराज इलाकों में स्थानीय विद्युत आपूर्ति के लिये प्रयोग किया जा सकता है, जहां पर राष्ट्रीय विद्युत तंत्र से बिजली नहीं पहुचार्इ जा सकती है। 
  4. बिजली की स्थानीय आपूर्ति, वितरण के मूल्य को कम कर देती है । 
  5. विद्युत उत्पादन का विकेन्द्रीकरण और आपूर्ति बड़ी विद्युत परियोजनाओं पर दबाव कम कर देती हैं। 

(4) पवन उर्जा 

मानव बहुत लम्बे अर्से से पवन उर्जा का उपयोग कर रहा है। जैसे पानी पर नाव चलाने के लिये, पवन चक्कियों की स्थापना से अनाज पीसने के लिये, आदि। तकनीकी प्रगति से पवन उर्जा के उपयोग से विद्युत उत्पादन संभव हो चला है। आइये देखें ऐसा किस प्रकार होता है। एक उंचे स्तम्भ पर लम्बें फलक या पंखानुमा यंत्र का साधारण ढांचा और एक दिशा नियन्त्रक लगा दिया जाता है । यह पवन मशीन किसी खुले स्थान पर लगा दी जाती है। जब हवा चलती है तब पंखानुमा यंत्र घूमता है और साथ लगे हुये विद्युत उत्पादक में बिजली का उत्पादन करता है। उत्पादित विद्युत की मात्रा हवा की गति पर निर्भर करती है। हवा की गति मेंदुगुनी तेजी, उर्जा उत्पादन में आठ गुना वृद्धि करती है। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि 20 किमी प्रति घंटा की औसत गति लाभप्रद विद्युत उत्पादन के लिये आवश्यक है, जबकि 10 किमी प्रति घंटा की हवा की गति हवा के पम्प को चनाने के लिये काफी है। पवन उर्जा को प्रयोग करने कुछ लाभ निम्न हैं- 
  1. यह पूर्णरूपेण मुफ्त व प्रदूषण मुक्त है। 
  2. इसका उपयोग भौगोलिक दृष्टि से दूर-दराज के क्षेत्रों या पर्वतीय इलाकों की विद्युत आपूर्ति के लिये किया जा सकता है । 
  3. पवन मशीन लगाने में सस्ती होती है और रखरखाव में भी आसान होती हैं

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