अनुक्रम
ई-कॉमर्स क्या है
इलेक्ट्रानिक कामर्स एक प्रकार की बिक्री-खरीददारी का माडल है जिसमें इंटरनेट का उपयोग किया जाता है। इसके दो आधारभूत प्रकार है: व्यवसाय से व्यवसाय (B.2.B) और व्यवसाय से उपभोक्ता (B.2.C), B.2.B में कम्पनियाँ अपने आपूर्तिकर्ताओं, वितरकों एवं दूसरे सहयोगियों के साथ इलैक्ट्रानिक नेटवर्क के माध्यम से व्यापार करती है एवं B.2. में कम्पनियाँ अपने उत्पादों एवं सेवाओं को अपने उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रानिक नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध कराती है या बेचती है। हालांकि इसके बाद कई दूसरे तरह के ई-कामर्स माॅडल भी चर्चा में है जैसे कि C.2. C (उपभोक्ता-से-उपभोक्ता), C.2.B (उपभोक्ता-से-व्यवसाय), सी .2.A (बिजनेस-टू-एडमिनिस्ट्रेशन) एवं C.2.A (उपभोक्ता-से-एडमिनिस्ट्रेशन) आदि।
ई-कॉमर्स के प्रकार
- व्यवसाय से व्यवसाय (B 2 B) बिजनेस-टू-बिजनेस
- व्यापार-टू-उपभोक्ता (B 2 C) या बिजनेस-टू-कस्टूमर
- उपभोक्ता-टू-उपभोक्ता (C 2 C) या कस्टूमर-टू-कस्टूमर
- उपभोक्ता-टू-व्यवसाय (C 2 B) या कस्टूमर-टू-बिजनेस
- व्यापार-टू-प्रशासन (B 2 A) या बिजनेस-टू-एडमिनिस्ट्रेशन
- उपभोक्ता-टू-प्रशासन (C 2 A) या कस्टूमर-टू-एडमिनिस्ट्रेशन
1. व्यवसाय से व्यवसाय (B 2 B) बिजनेस-टू-बिजनेस
2. व्यापार-टू-उपभोक्ता (B 2 C) या बिजनेस-टू-कस्टूमर
3. उपभोक्ता-टू-उपभोक्ता (C 2 C) या कस्टूमर-टू-कस्टूमर
का वह प्रकार है जिसमें उपभोक्ता से उपभोक्ता के बीच होने वाले व्यावसायिक सौदे सम्मिलित होते है।
नीलामी साइट्स इसका विकसित होता हुआ उदाहरण है। जब किसी उपभोक्ता को कुछ जमीन जायदाद
अथवा वस्तु चाहे वह कार ही क्यों न हो, बेचनी हो तो वह ऐसी संबद्ध वेबसाइट पर अपने द्वारा बेची जाने
वाली संपत्ति या वस्तु की जानकारी उपलब्ध करा देता है ताकि जरूरतमंद उपभोक्ता संपर्क पर क्रय
सके। www.ebey.com वह बेवसाइट है जो उपभोक्ता से उपभोक्ता के बीच नीलामी क्रय
को संभव कर रही है।
4. उपभोक्ता-टू-व्यवसाय (C 2 B) या कस्टूमर-टू-बिजनेस
5. व्यापार-टू-प्रशासन (B 2 A) या बिजनेस-टू-एडमिनिस्ट्रेशन
6. उपभोक्ता-टू-एडमिनिस्ट्रेशन (C 2 A)
- शिक्षा:- दूरस्थ शिक्षा, सूचना प्रसार आदि।
- सामाजिक सुरक्षा:- भुगतान करना, जानकारी के वितरण में।
- कर:- रिटर्न जमा करने हेतु, भुगतान आदि।
- स्वास्थ्य:- बीमारियों के बारे में जानकारी, नियुक्तियाँ, स्वास्थ्य सेवाओं का भुगतान, लोक प्रशासन से जुड़े हुए दोनों माॅडल बी-टू-ए व सी-टू-ए सूचना व संचार प्रौद्योगिकियों की उपयोगिता के साथ सरकार द्वारा नागरिकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं को आसान व उपयोगी बनाता है।
ई-कॉमर्स के लाभ
ई-कॉमर्स परंपरागत व्यवसाय अथवा विपणन/वितरण के तौर-तरीकों की तुलना में व्यावसायिक
संस्थाओं तथा उपभोक्ताओं को कई तरह के लाभ उपलब्ध कराता है। उदाहरणार्थ,
- व्यावसायिक संस्थाओं
को रोकड़ प्रवाह सुगमता पूर्वक उपलब्ध हो जाता है, - इंवेंटरी तेजी से प्रवाहित होती है और
- स्टॉक कम
रखने पड़ते हैं, - मध्यस्थ हट जाते हैं,
- कागजी कार्यवाही व छुटकारा मिल जाता है,
- मानव-शक्ति
लागतों में कमी होती है, - कार्यालय उत्पादकता में वृद्धि होती है,
- सूचनाओं का पारस्परिक आदान-प्रदान
तीव्रतर, परिशुद्ध और कम लागतपूर्ण होने लगता है, - शीघ्र आदेश पूर्ति संभव हो जाती है, और
- ग्राहकीकरण एवं बाजार-विस्तार के कारण दीर्घकाल तक तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना करना संभव हो जाता है।
इसी प्रकार, उपभोक्ताओं को क्रयण से सुविधा प्राप्त होती है, वस्तु/सेवा चयन हेतु विकल्प बढ़ जाते
हैं, उत्पाद मूल्यों में कमी होते रहने से उपभोक्ता की क्रय-शक्ति व जीवन स्तर में वृद्धि होती है, उपभोक्ता न
केवल सर्वोत्तम वस्तुओं और सेवाओं के संपर्क में आते हैं, बल्कि पुरानी जरूरतों की पूर्ति के नये तौर-तरीकों व
उत्पादों के संपर्क में भी आते हैं, बाजार विक्रेता-बाजारों में क्रेता-बाजारों से परिवर्तित होने लगते हैं, और
ग्राहक-सेवाओं संतुश्टि के स्तर में आशातीत वृद्धि होती है। ई-कॉमर्स सामाजिक एवं राजनीतिक बाधाओं को
तोड़ कर विकासशील एवं विकसित राश्ट्रों को परस्पकर जोड़ता है, जिससे साहस, व्यावसायिक योग्यता,
नवाचारात्मक प्रतिभा, तकनीकी ज्ञान तथा वस्तुओं-सेवाओं का आयात-निर्यात बढ़ता है विश्व-षांति एवं मैत्री में
वृद्धि होती है। यदि ई-कॉमर्स का सही तकनीक से उपयोग किया जाए तो इससे प्रत्येक पक्ष को लाभ प्राप्त
होते हैं।
ई-कॉमर्स के दोष
उपर्युक्त अनगिनत लाभों को उपलब्ध कराने वाली ई-कॉमर्स प्रणाली दोषरहित नहीं है। इसके मुख्य
दोष हैं-
- इसमें वस्तुओं-सेवाओं का वैयक्तिक निरीक्षण संभव नहीं है,
- सौदों में उपयुक्त सुरक्षा एवं
गारंटी का अभाव रहता है, - कर-निर्धारण असंभव भले ही नहीं हो, किन्तु कठिनाई पैदा करता है,
- क्रेडिट
कार्ड व्यवस्था की सर्वव्यापकता एवं सर्वग्राहयकता सदैव संदिग्ध रहने वाली है, - भारी भरकम अवस्थापना
विनियोजन कई देशों के लिए कई सामाजार्थिक व शैक्षणिक कारणों से संभव नहीं है, - कम्प्यूटर-जनित
सूचनाओं की विश्वसनीयता की सुरक्षा कठिन कार्य है, तथा जन-विश्वास जीतने में यह प्रणाली विफल रहेगी।
इतने पर भी यह कहा जा सकता है कि ई-कॉमर्स अंतर्राश्ट्रीय व्यापार एवं विपणन में अभूतपूर्व क्रांति लाने वाला
सिद्ध होगा तथा छोटे विपणनकर्त्ता भी बड़े विपणनकर्त्ताओं से प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में आ जाएँगे। प्रतिभा
और विश्वसनीयता क्रेता-विक्रेता संबंधों की आधारशिला बनेगी। ई-कॉमर्स की सफलता के लिए साक्षर होना
महत्वपूर्ण है।
