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आतंकवाद वह विचारधारा है जिसमें देश की मुख्य धारा से अलग रहकर अपनी राजनीतिक इच्छापूर्ति के लिए, तोड़-फोड़, लूट-पाट, हत्या, नरसंहार या आगजनी के कार्य लुक-छिपकर किए जाते हैं ताकि सरकार विकास कार्य न कर पाए और अन्ततः आर्थिक परेशानी एवं कानून और व्यवस्था के मोर्चे पर लगातार असफल होने से थककर आतंकवादियों की बात मान ले। भारत में आतंकवाद का प्रच्छन्न रूप कश्मीर में दिर्खाइ देता है, जहाँ के कुछ लोग कश्मीर को भारत को अलग करने के लिए आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हैं।
आतंकवाद का अर्थ
किसी व्यक्ति या संगठित गुट द्वारा समाज या सरकार पर जोर-जबरदस्ती करने या धमकाने के उद्देश्य से, गैर-कानूनी तरीके से हिंसा का इस्तेमाल करना आतंकवाद कहलाता है। आतंकवाद एक सामूहिक अपराध है जो एक आतंकवादी समूह द्वारा किसी व्यक्ति विशेष के विरूद्ध न होकर एक व्यवस्था, धर्म, वर्ग या समूह के विरूद्ध होता है। आतंक फैलाने तथा मनोवैज्ञानिक युद्ध की स्थिति निर्मित करने की तकनीक ही आतंकवाद है।
आतंकवाद की परिभाषा
2. 1973 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इसे परिभाषित करते हुए कहा गया, ‘‘आतंकवाद एक आपराधिक कार्य है जो राज्य के खिलाफ किया जाता है और इसका उद्देश्य भ्रम पैदा करना है। यह स्थिति कुछ व्यक्तियों, समूहों या जन सामान्य की भी हो सकती है।’’
4. रिचार्ड शुल्ज के अनुसार, ‘‘आतंकवाद राजनीतिक व्यवस्था के अन्दर क्रांतिकारी परिवर्तन लेने के उद्देश्य से अलग-अलग प्रकार के राजनीतिक हिंसा प्रयोग में लाने की तैयारी है।’’
आधुनिक समय में सभी प्रकार की आतंकवादी कार्यवाही में हिंसा तथा हिंसा का भय एक अनिवार्य तत्व के रूप में होता है। इसलिए कहा जा सकता है कि आतंकवाद कुछ निश्चित राजनीतिक परिवर्तन लाने के लिए हिंसा या हिंसा की धमकी के द्वारा पैदा किया गया भय है।
योनाह अलेक्जेण्डर के अनुसार, ‘‘आतंकवाद चुने हुए नागरिक विद्वानों के विरूद्धा हिंसा की कार्यवाही या उसकी धमकी है जिससे कि राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए भय का वातावरण बनाया जा सके।’’
7. अलेक्स स्मिथ के अनुसार, ‘‘आतंकवाद हिंसा का या हिंसा की धमकी का उपयोग है, तथा लक्ष्य प्राप्ति के लिए संघर्ष। लड़ाई की एक विधि व रणनीति है एवं
अपने शिकार में भय पैदा करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। यह क्रूर है और मानवीय प्रतिमानों का पालन नहीं करता। इसकी रणनीति में प्रचार एक आवश्यक तत्व है।’’
8. भारतीय सन्दर्भ में आतंकवाद को एक धमकी के रूप में देखा गया है जिसका उद्देश्य विरोधी समूह में अधिक चिन्ता व भय उत्पन्न करना है। निर्दोष व्यक्तियों को उपयोग में लाकर राजनीतिक व धार्मिक मांगो को पूरा करने का उद्देश्य होता है।
9. ब्रिटेन के आतंकवाद निरोधक अधिनियम 1976 में आतंकवाद से अभिप्राय ‘‘राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयोग में लाई गई हिंसा से है जिसमें कि वह सभी तरह की हिंसा सम्मिलित है जिसका उद्देश्य जनता को या समुदाय विशेष को भयभीत करना है।’’
10. अमेरिका के प्रतिरक्षा विभाग के अनुसार, ‘‘समाज या सरकार के खिलाफ गैर-कानूनी बल प्रयोग करना या ऐसा न करके केवल धमकी देना ही आतंकवाद है।’’
अपनाई जाती है। जिसका उद्देश्य किसी निर्णय को लेने के लिए अथवा किसी बात को प्रसारित करने अथवा किसी कमी को उजागर करना हो।’’
आतंकवाद के मुख्य कारण
आतंकवाद की विशेषताएं
जिस प्रकार की राजनीतिक माÍग या अपेक्षाएÍ होती है, उनकी पूर्ति राज्य ही कर सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि आतंकवादियों की माग राजनीतिक स्वायत्तता प्राप्त करनाा है तो उस पर विचार केवल राज्य ही कर सकता है। इसलिए आतंकवादी संगठन यह मानते हैं कि उनकी लड़ाई राज्य अथवा समाज से है।
आतंकवाद के उद्देश्य
आतंकवाद की विविध विशेषताओं के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि आतंकवाद भय पर आधारित कार्यवाही है, जिसका उद्देश्य आने निहित स्वार्थों की पूर्ति हेतु शासन तंत्र का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना होता है।
आतंकवाद आधुनिक समय में एक व्यापक प्रक्रिया बन चुकी है। एक राष्ट्रीय घटना से लेकर अन्तर्राष्ट्रीय प्रक्रिया तक आतंकवाद के विविध स्वरूप स्पष्टतः दृष्टिगोचर होते हैं। आतंकवाद चाहे किसी भी स्तर का हो उनमें कुछ सामान्य प्रवृत्तियों
के बावजूद उद्देश्यात्मक विविधता देखी जा सकती है। आतंकवाद के सामान्यतः निम्नलिखित उद्देश्य माने जा सकते हैं :-
- आतंकवाद का उद्देश्य कतिपय निश्चय उद्देश्यों की पूर्ति करना होता है जैसे कि बंदियों की रिहाई, िफरौती की रकम वसूल करना, आदि। आतंकवादी अपनी कुछ कार्यवाहियों के माध्यम से इस प्रकार की नाटकीय स्थिति उत्पन्न कर देते है, ताकि सरकार तुरन्त प्रभाव से उनकी माÍगों को स्वीकार करने के लिए बाध्य हो जाए। इस प्रकार के भयपूर्ण नाटकीय स्थिति पैदा करना आतंकवादियों की अपनी रणनीति होती है।
- आतंकवादियों का एक उद्देश्य अपने लक्ष्यों को विचारधारा के सन्दर्भ में व्यापक प्रचार-प्रसार करना होता है। आतंकवादी चाहते हैं कि आतंकवाद की कार्यवाही के माध्यम से लोग उनके उद्देश्यों के बारे में जाने। इस प्रकार जितनी अधिक उग्र-आतंकवादी कार्यवाही होगी उतना ही अधिक उनका प्रचार होगा। इस प्रकार आतंकवादी आतंक व भय के माध्यम से अपने उद्देश्य एवं विचारों को प्रसारित-प्रचारित करना चाहते हैं।
- आतंकवाद का उद्देश्य वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक सत्ता का विघटन व समाज में हताशा पैदा करना होता है। वस्तुत: यह अराजकतावादी, क्रांतिवादी व पृथकतावादी आतंकवादियों की एक विशेषता है। बहुत से क्रांतिकारी आतंकवादी इसलिए हिंसा का सहारा लेते है क्योंकि वे मानते हैं, कि इससे जन सामान्य को क्रांति के लिए तैयार किया जा सकेगा।
- आतंकवाद का उद्देश्य बदले की भावना भी हो सकती है। आतंकवादी बदले की कार्यवाही के अन्तर्गत कानून व व्यवस्था का उल्लंघन, सरकारी अधिकारियों का अपहरण, विदेशियों को बन्दी बनाना, आदि कार्यवाही इस उद्देश्य से करते हैं कि जिससे कि सरकार उनके सम्बन्ध में तुरन्त प्रतिक्रिया जाहिर करे।
- राज्य द्वारा पोषित आतंकवाद का उद्देश्य दूसरे राज्य में अव्यवस्था व आंतरिक संकट उत्पन्न करना हो सकता है। ऐसा राज्य न केवल आतंकवादी संगठनों को पोषण व सहायता करता है, अपितु उनको दूसरे राज्य पर आक्रमण करने के लिए उकसाता या प्रेरित भी करता है। बहुत से राज्यों में इस प्रकार के अभिकरणों का गठन कर लिया गया है जो कि आतंकवादी संगठनों व गतिविधियों का संचालन करते हैं। वस्तुत: जो राज्य आतंकवाद का पोषण कर
रहे हैं वे सामाजिक हितों की पूर्ति के लिए इसे एक यंत्र के रूप में प्रयोग का प्रयास कर रहे हैं।
- आतंकवाद का एक उद्देश्य दंड देना भी हो सकता है। बहुत से आतंकवादी इसलिए किसी बड़े नेता की हत्या कर देते हैं क्योंकि उनकी निगाह में उसने कोई सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक अपराध किया था इसलिए उसको दंड देना आवश्यक था।
भारत सरकार को आतंकवाद रोकने के लिए कठोर कदम उठाने चाहिए। जैसा कि हाल में श्रीलंका सरकार ने किया या इजरायल सरकार करती है। सीमा की नाकेबन्दी करनी चाहिए ताकि आतंकवादी घुस न पाएँ। रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए और शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए ताकि युवक गुमराह न हो। सबसे बढ़कर ऐसे कानून बनाए जाने चाहिए जिसके तहत आतंकवादियों को जल्द-से-जल्द कठोर दंड दिया जा सके। जनता को भी सहयोग करना चाहिए और आतंकवादियों के सम्बन्ध में कोई भी सूचना सरकार को तत्काल देनी चाहिए। राजनीतिक दलों को भी अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ऐसे कार्य न करने चाहिए जिसकी ओट में आतंकवादियों को छूट मिले। यदि समय रहते शीघ्र कार्रवाई न की गई तो देश की अखंडता के लिए सबसे बड़ा खतरा दिनोदिन बढ़ता जाएगा।
