अंतर्राष्ट्रीय कानून, कानून की वह शाखा है, जिसमें राष्ट्र-राज्यों के बीच के आपसी संबंधों को विनियमित करने वाले नियम शामिल है। यह एक परंपरागत और प्रथागत नियमों का ऐसा निकाय है जो राष्ट्र राज्यों द्वारा एक दूसरे के साथ संबंधों में कानूनी रूप से बाध्यकारी होते है।
अंतरराष्ट्रीय कानून की परिभाषा
1. ओपेनहाइम के अनुसार, “अंतरराष्ट्रीय कानून उन परंपरागत नियमों का समूह है, जिन्हें सभ्य राष्ट्र अपने आपसी व्यवहार में वैधानिक रूप से बाध्यकारी समझते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्व
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के महत्व में अभिवृद्वि हुयी है। राष्ट्र-राज्यों ने अपने राजनीतिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक हितों को पूर्ण करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सहारा लिया है ताकि राष्ट्र राज्यों के बीच इन संबंधों में एक व्यवस्था या अनुशासन कायम की जा सके। अंतरराष्ट्रीय कानून राष्ट्रों के बीच संबंधों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि सभ्य राष्ट्रों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपने सम्मान और उनके पालन से संबंधित प्रावधानों को अपने देश के संविधान में भी स्थान प्रदान किया है।
अंतरराष्ट्रीय कानून राष्ट्र-राज्य के लिए एक ढाल के रूप में कार्य करता है, जिसके आधार पर वे अपने अधिकारों की वकालत करते हैं और अन्य राष्ट्रों की नीतियांे की आलोचना के लिए भी एक कानूनी हथियार के रूप में प्रयुक्त करते हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में राष्ट्रों के मध्य वास्तविक संबंधों का संचालन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के आधार पर होता है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मलेनांे का आयोजन भी अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के नियमों के आधार पर ही किया जाता है और यहाँ तक की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना या सदस्यता के नियम अंतरराष्ट्रीय कानूनों के नियम द्वारा शासित होते हैं।
दो राष्ट्रों के मध्य वार्ता के संचालन में राष्ट्र हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मान्यता देते हैं। यहाँ तक की युद्ध के दौरान भी इसका प्रयोग राष्ट्रों द्वारा किया जाता है, ताकि अपने पक्ष का औचित्य अंतरराष्ट्रीय समाज के समक्ष रखा जा सके। इसके साथ ही विश्व जनमत के रूप में अंतरराष्ट्रीय समाज का दबाव भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन के लिए एक आधार प्रदान करता है। वर्तमान में जैविक, रासायनिक व परमाणु हथियार जैसे विनाशकारी अस्त्र-शस्त्रों के विकास ने विश्व व्यवस्था के लिए निश्चित रूप से खतरा उत्पन्न कर दिया है जिसकी वजह से अनियंत्रित शक्ति पर अंकुश रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भय होना जरूरी हो गया है।