पलाश

इसे देहाती भाषा में खाखरा कहा जाता है। इसके पेड़ से गोंद, दोने पतल बनाने के बड़े पते, बिना काँटोवाली नर्म जलाऊ घरेलू लकड़िया, जड़ से रंगाई-पुताई करने की कुचियाँ इसी के नरम रेशे से प्राप्त होती है। फाल्गुन माह में इसमें फुल आते हैं। जिनको पानी में गलाने से कुदरती केसरिया रंग प्राप्त होता है। जो होली पर खेलने के काम आता है। पलाश को जंगल की ज्वाला भी कहते हैं।

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