अक्षांश रेखाएं

अक्षांश (Latitude)

अक्षांश रेखाएं भू—पृष्ठ पर विषुवत रेखा या भूमध्य रेखा (Equator) के समानांतर खींची गई काल्पनिक रेखाएं है।

यह पृथ्वी के केंद्र से प्रत्येक याम्योत्तर (Meridian) की उत्तर या दक्षिण कोणीय दूरी दर्शाती है। इसे अंशों (Degrees), मिनटों (1° = 60′ Minutes) व सेकंडों (1′ = 60″ Seconds) में दर्शाया जाता हैं।

तकनीकी दृष्टि से अक्षांश, अंश (डिग्री) में अंकित कोणीय मापन (Angular Distance) है जो भूमध्य रेखा पर 0° से लेकर ध्रुव (Pole) पर 90° हो जाता है।

प्रति 1° की अक्षांशीय दूरी (Latitudinal Distance) लगभग 111 कि. मी. (~69 मील) के बराबर होती हैं जो पृथ्वी के गोलाभ (Geoid) के आकार की होने के कारण भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक भिन्न-भिन्न [68.703 मील (110.567 किमी) – विषुवत रेखा पर जबकि 69.407 मील (111.699 किमी) – ध्रुवों पर] मिलती है।

उत्तरी गोलार्द्ध में 23½° उत्तरी अक्षांश कर्क रेखा (Tropic of Cancer) और 66½° उत्तरी अक्षांश उपध्रुव वृत्त (Arctic Circle / Sub-Arctic) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में 23½° द​क्षिणी अक्षांश मकर रेखा (Tropic of Capricorn) और 66½° द​क्षिणी अक्षांश उपध्रुव वृत्त (Antarctic Circle / Sub-Antarctic) कहलाते हैं।

अक्षांश-एवं-देशांतर-रेखाएं_Longitudes-and-latitudes-in-hindi-notes

भूमध्य रेखा पृथ्वी को उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemisphere) और दक्षिणी गोलार्द्ध (Southern Hemisphere) में बांटती है, और इसका अक्षांश शून्य अंश यानि 0° होता है।

प्रमुख अक्षांश रेखाएं (Important Longitude)

भूमध्य रेखा – 0° अक्षांश – (Equator):

भूमध्य रेखा पृथ्वी की सतह पर उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव से सामान दूरी पर स्थित एक काल्पनिक रेखा है। इसे विषुवत रेखा भी कहते है।

पृथ्वी भूमध्य रेखा पर थोड़ी उभरी हुई है। इस रेखा पर पृथ्वी का व्यास 12759.28 कि.मी.(7,927 मील) है, जो ध्रुवों के बीच के व्यास (12713.56 की.मी./7900 मील) से 42.72 कि.मी. अधिक है।

ध्रुवों के विपरित भूमध्य रेखा पर गुरुत्वाकर्षण तुलनात्मक रूप से कमजोर अथवा कम प्रभावी होता है। ऐसा पृथ्वी के घूर्णन और अपकेंद्री प्रभाव बल के कारण है। इसका अर्थ यह हुआ कि आपका भार भूमध्य रेखा पर अपेक्षाकृत कम (0.35% कम) होगा।

यह पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करती है।

इस पर वर्ष भर दिन-रात बराबर होतें हैं।

यहां मौसम भी लगभग समान ही रहता है।

भूमध्य रेखा की लम्बाई लगभग 40,075 कि.मी.(24,901.5 मील) है।

यह पृथ्वी की सतह पर खींचा गया महानतम घेरा (चक्र) है।

सूर्य वर्ष में दो बार, 21 मार्च और 23 सितंबर को भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर से गुजरता है।

भूमध्य रेखा विक्टोरिया झील (33° देशांतर) से होकर गुजरती है।

इक्वेटोरियल गिनी भूमध्य रेखा को नहीं छूता, जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है।

भूमध्य रेखा को वास्तव में ना छूने वाला सबसे निकटतम देश पेरू है।

भूमध्य रेखीय क्षेत्र जैव विविधता का खज़ाना है।

भूमध्य रेखा 12** देशों के स्थलीय भागों को छूकर गुजरती है। मध्याह्न रेखा से प्रारंभ होकर ये पूर्व की ओर इस क्रम में जाती है:

01. साओ तोमे और प्रिन्सीप
02. गैबॉन
03. कॉन्गो
04. कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य
05. युगांडा
06. केन्या
07. सोमालिया
08. इंडोनेशिया
09 किरिबाती
10 ईक्वाडोर
11. कोलम्बिया
12. ब्राज़ील

Note: मालदीव का स्थलीय भाग भूमध्य रेखा को नहीं छूता। हालांकि यह इसकी प्रादेशिक जलसीमा से होकर गुजरती है। अगर प्रश्न जल व थल दोनों से जुड़ा हो तो यह संख्या 13 होगी। कहीं—कहीं यह संख्या 14 (13 + संयुक्त राज्य माइनर आउटलेइंग आइलैंड्स) भी मिल सकती है।

भूमध्य रेखा 3 महासागरों से होकर गुजरती हैं। मध्याह्न रेखा से प्रारंभ होकर ये पूर्व की ओर इस क्रम में जाती है:

01. अटलांटिक महासागर
02. हिन्द महासागर
03. प्रशांत महासागर

कर्क रेखा  – 23½° उत्तरी अक्षांश – (Tropic of Cancer):

कर्क रेखा उत्तरी गोलार्द्ध में 23½° उत्तरी अक्षांश पर भूमध्य रेखा‎ के समानान्तर खींची गई रेखा है।

इस रेखा को कर्क रेखा इसलिए कहते हैं क्योंकि जून क्रांति के समय सूर्य की स्थिति कर्क राशि में होती हैं।

यह पृथ्वी की उत्तरतम अक्षांश रेखा अथवा उत्तरी गोलार्द्ध का उच्चतम् अक्षांश है, जिसपर सूर्य लम्बवत चमकता है। यह घटना जून क्रांति के समय होती है, जब उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य के समकक्ष अत्यधिक झुक जाता है।

21 जून को जब सूर्य इस रेखा के एकदम ऊपर होता है, उत्तरी गोलार्द्ध में वह दिन सबसे लंबा व रात सबसे छोटी होती है।
जब कर्क रेखा पर सूर्य की किरणें एकदम सीधी पड़ती हैं तो परछाईं एकदम नीचे छिप जाती है या कहें कि नहीं बनती है। इस कारण इन क्षेत्रों को अंग्रेज़ी में नो शैडो ज़ोन कहा है।

एक वर्ष में 6—6 माह के में दो अयन होते हैं। सूर्य की स्थिति मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ने को उत्तरायण एवं कर्क रेखा से मकर रेखा को वापसी को दक्षिणायन कहते हैं।

यह भारत के 8 राज्यों से होकर गुजरती है। उज्जैन शहर इसपर स्थित है जहां जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने जंतर मंतर नामक वेधशाला बनवाई थी।

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